भारत में शहरों के विस्तार के साथ-साथ कई नदियां नाले में तब्दील होती जा रही हैं. विज्ञान और पर्यावरण केंद्र द्वारा जनवरी 2012 के प्रथम सप्ताह में जारी की गई रिपोर्ट में यह तथ्य दिया गया है.
विज्ञान और पर्यावरण केंद्र द्वारा जारी एक्सक्रेटा मैटर्स: हाउ अर्बन इंडिया इज सोकिंग अप वॉटर, पॉल्युटिंग रिवर्स एंड ड्राउनिंग इन इट्स ओन एक्सक्रेटा (Excreta Matters: How urban India is soaking up water, polluting rivers and drowning in its own excreta) नामक इस रिपोर्ट के अनुसार लापरवाही और खराब योजनाओं के कारण ज्यादातर शहरों ने अपनी नदियों को नालों में तब्दील कर दिया है.
एक्सक्रेटा मैटर्स नामक यह अध्ययन भारत के 71 शहरों पर किया गया. इस रिपोर्ट को तैयार करने में साढ़े तीन वर्ष लगे. रिपोर्ट के अनुसार लगभग सभी शहरों के भूजल का स्तर गिरता जा रहा है. इन शहरों में जल तथा अपशिष्ट जल प्रबंधन की कोई योजना नहीं है. साथ ही इन शहरों में रह रहे लोगों को याद भी नहीं है कि ये नदियां ही कभी पानी का मूल स्रोत हुआ करती थीं.
विज्ञान और पर्यावरण केंद्र की निदेशक सुनीता नारायण के अनुसार भारत की ज्यादातर नदियां खतरनाक स्थिति में हैं. खराब सीवेज सिस्टम के कारण वे नालों में तब्दील हो रही हैं. उदाहरण के लिए मुंबई की मीठी नदी विकास के बोझ तले दब गई, जिसके कारण अब यह शहर के बाढ़ वाले पानी को समुद्र में पहुंचाने वाली अपनी परंपरागत भूमिका नहीं निभाती है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बीच से होकर बहने वाली यमुना की जगह एक गंदा काला नाला बहता हुआ दिखता है.
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