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मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अंतर

भारत में संसदीय प्रणाली को ब्रिटिश संविधान से लिया गया है| मंत्रिपरिषद, भारतीय राजनीतिक प्रणाली की वास्तविक कार्यकारी संस्था है जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री के हाथों में होता है| हमारे संविधान के अनुच्छेद 74 में मंत्रिपरिषद के गठन के बारे में उल्लेख किया गया है जबकि अनुच्छेद 75 मंत्रियों की नियुक्ति, उनके कार्यकाल, जिम्मेदारी, शपथ, योग्यता और मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते से संबंधित है।
Nov 29, 2016 11:47 IST

भारत में संसदीय प्रणाली को ब्रिटिश संविधान से लिया गया है| मंत्रिपरिषद,भारतीय राजनीतिक प्रणाली की वास्तविक कार्यकारी संस्था है जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री के हाथों में होता है| हमारे संविधान के अनुच्छेद 74 में मंत्रिपरिषद के गठन के बारे में उल्लेख किया गया है जबकि अनुच्छेद 75 मंत्रियों की नियुक्ति, उनके कार्यकाल, जिम्मेदारी, शपथ, योग्यता और मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते से संबंधित है।

मंत्रिपरिषद का गठन राष्ट्रपति की मदद करने एवं सलाह देने के लिए किया गया है जो मंत्रिपरिषद द्वारा प्रस्तुत सूचना के आधार पर काम करता है| राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद द्वारा दिए गए सलाह को भारत की किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है|

मंत्रिमंडल की भूमिका

a) यह केन्द्र सरकार की सर्वोच्च कार्यकारी संस्था है|

b) यह हमारी राजनैतिक-प्रशासनिक व्यवस्था में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है|

c) यह केन्द्र सरकार की मुख्य नीति निर्धारक अंग है|

d) यह राष्ट्रपति की सलाहकारी संस्था है तथा मंत्रिमंडल का परामर्श राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी है|

e) यह मुख्य आपदा प्रबंधक है और सभी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटती है|

f) यह सभी बड़े विधायी और वित्तीय मामलों से निपटती है|

g) यह विदेश नीतियों और विदेशी मामलों को देखती है|

h) यह उच्चतम स्तर पर, जैसे संवैधानिक अधिकारियों और वरिष्ठ सचिवालय प्रशासकों की नियुक्ति को नियंत्रित करती है|

i) यह केन्द्रीय प्रशासन की मुख्य समन्वयक है|

लोकसभा एवं राज्यसभा में अंतर

मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अंतर

क्र.सं.

मंत्रिपरिषद

मंत्रिमंडल

1.

इसमें मंत्रियों की तीन श्रेणियां– कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री एवं उपमंत्री होती है|

इसमें केवल कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं| अतः यह मंत्रिपरिषद का एक भाग है|

2.

यह सरकारी कार्यों हेतु एक साथ बैठक नहीं करती है| इसका कोई सामूहिक कार्य नहीं है|

यह एक निकाय की तरह है| यह सामान्यतः हफ्ते में एक बार बैठक करती है और सरकारी कार्यों के संबंध में निर्णय करती है| इसके कार्यकलाप सामूहिक होते हैं|

3.

इसे सैद्धान्तिक रूप से सभी शक्तियां प्राप्त है|

यह वास्तविक रूप में मंत्रिपरिषद की शक्तियों का प्रयोग करती है और सरकारी उसके लिए कार्य करती है|

4.

इसके कार्यों का निर्धारण मंत्रिमंडल करती है|

यह राजनैतिक निर्णय लेकर मंत्रिपरिषद को निर्देश देती है तथा ये निर्देश सभी मंत्रियों पर बाध्यकारी होते हैं|

5.

यह मंत्रिमंडल के निर्णयों को लागू करती है|

यह मंत्रिपरिषद द्वारा अपने निर्णयों के अनुपालन की देखरेख करती है|

6.

यह एक संवैधानिक निकाय है| इसका विस्तृत विवरण संविधान के अनुच्छेद 74 तथा 75 में किया गया है| इसका आकार और वर्गीकरण संविधान में वर्णित नहीं है| इसके आकार का निर्धारण प्रधानमंत्री समय और परिस्थिति को ध्यान में रखकर करता है|

इसे संविधान के अनुच्छेद 352 में 1978 के 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा शामिल किया गया था| अतः यह संविधान के मूल स्वरूप में शामिल नहीं थी| अनुच्छेद 352 में इसकी व्याख्या यह है कि “प्रधानमंत्री एवं अन्य कैबिनेट मंत्रियों की परिषद् जिन्हें अनुच्छेद 75 के अन्तर्गत नियुक्त किया जाता है|” इसके कार्यों एवं शक्तियों का वर्णन संविधान में नहीं किया गया है|

7.

यह सामूहिक रूप से संसद के निचले सदन-‘लोकसभा’ के प्रति उत्तरदायी होती है|

यह संसद के निचले सदन-‘लोकसभा’ के प्रति मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी को लागू करती है|

8.

यह एक बड़ा निकाय है जिसमें 60 से 70 मंत्री होते हैं|

यह एक लघु निकाय है जिसमें 15 से 20 मंत्री होते हैं|

Source: laxmikant

मंत्रिपरिषद से संबंधित अनुच्छेद

अनुच्छेद 74: राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का गठन

अनुच्छेद  75: राष्ट्रपति के द्वारा प्रधानमंत्री की नियुक्ति की जाएगी और प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करेंगें| 

अनुच्छेद 77: भारत सरकार के कार्यों का संचालन

अनुच्छेद  78: राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्य

साधारण विधेयक एवं धन विधेयक में अंतर