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सिंधु नदी के साथ जुडी नदी घाटी परियोजनाएं

सिंधु नदी के साथ जुडी महत्वपूर्ण नदी घाटी परियोजनाए है - भाखड़ा नांगल, इंदिरा गांधी परियोजना, पोंग परियोजना, चमेरा परियोजना, थीन परियोजना, नाथपा झाकड़ी परियोजना, सलाल, बगलिहार परियोजना, दुलहस्ती परियोजना, तुलबुल परियोजना, और उड़ी परियोजना।
Aug 12, 2016 14:33 IST
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भारत में बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को कृषि के लिए सिंचाई , उद्योगों  के लिए बिजली और बाढ़ नियंत्रण की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शुरू किया गया है। जवाहर लाल नेहरू ने बांधों को "आधुनिक भारत का मंदिर" कहा था, इस तथ्य से उस समय में बांधों के महत्व का अनुमान लगाया जा सकता है । सिंधु नदी के साथ जुडी महत्वपूर्ण नदी घाटी परियोजनाएं है - भाखड़ा नांगल, इंदिरा गांधी परियोजना, पोंग परियोजना चमेरा परियोजना, थीन परियोजना, नाथपा झाकड़ी परियोजना, सलाल, बगलिहार परियोजना, दुलहस्ती  परियोजना, तुलबुल परियोजना, और उड़ी परियोजना।

भाखड़ा नांगल परियोजना

यह सबसे बडी और सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजना है जिसका नाम दो बांधों के नाम: भाखड़ा और नांगल पर रख गया है और ये सतलुज नदी पर  निर्मित की गयी है। यह दुनिया में दूसरा सबसे ऊंचा बांध है। इस परियोजना में शामिल हैं: (i) भाखड़ा और नांगल - दो बांध (ii) नांगल हाईडल चैनल (iii) 1,204 मेगावाट (मेगावाट) की एक संयुक्त स्थापित क्षमता के साथ बिजली घर (iv) बिजली की  पारेषण लाइने और (v) सिंचाई के लिए भाखड़ा नहर प्रणाली। यह संबंधित राज्यों के लाभ के लिए  पंजाब, हरियाणा और राजस्थान राज्यों के एक संयुक्त उद्यम है जिसे सतलुज के कीमती पानी का दोहन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है । ये बांध 226 मीटर ऊंचा, 518 मीटर लंबा इसकी अधिकतम चौड़ाई के साथ ये आधार के रूप में 362 मीटर है। इस जलाशय को गुरु गोबिंद सिंह, सिख समुदाय के दसवें गुरु के नाम पर गोबिन्दसागर झील के रूप में नामित किया गया है।

इंदिरा गांधी परियोजना या राजस्थान  नहर

यह पहले राजस्थान नहर परियोजना के रूप में जाना जाता था । यह भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है। इसमें शामिल किया गया क्षेत्र 600 किमी लंबा और 45 किमी चौड़ा राजस्थान के थार रेगिस्तान में है। यह दुनिया में सबसे विशाल परियोजनाओं में से एक है जिसका लक्ष्य रेगिस्तान की बंजर भूमि को कृषि उत्पादक क्षेत्र में बदलना है। परियोजना के उद्देश्यों में शामिल है - सूखे से बचाव, पीने का पानी उपलब्ध कराना, पर्यावरण का सुधार, वनीकरण, रोजगार, पुनर्वास, पशु धन के प्रक्षेपण और विकास की योजना और कृषि उपज में वृद्धि

पौंग बांध

हिमाचल प्रदेश में तलवाड़ा के पास, ब्यास नदी पर बना है इसलिए इसे ब्यास बांध भी कहा जाता है। यह परियोजना राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की एक संयुक्त परियोजना  है। यह बांध 6.6 मिलियन एकड़ फीट पानी को स्टोर करने के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि बांध सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुख्य रूप से बनाया गया है। यह बिजली भी पैदा करता है।

बगलिहार परियोजना

यह परियोजना जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर निष्पादित की गई है। 

दुल-हस्ती जल विद्युत परियोजना

यह परियोजना जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बनाई गयी है और इसकी लागत 1263 करोड़ रुपये की है। इस परियोजना की नींव सितम्बर 1984 में रखी गई थी।  इस परियोजना की क्षमता 390 मेगावाट की है ।

थिएन बांध (पंजाब)

यह एक 147 मीटर ऊंचा बांध है जो पंजाब सरकार द्वारा  थिएन गांव में रवि नदी पर 25 किमी माधोपुर नदी के ऊपर बनाया गया है। यह 8 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 600 मेगावाट पॉवर बिजली पैदा करता है । इसका नाम बदलकर रणजीत सागर बांध रखा गया और इसे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 4 मार्च, 2001 को राष्ट्र को समर्पित किया गया था।

चमेरा जल विद्युत परियोजना

इस परियोजना को हिमाचल प्रदेश में रावी नदी पर 540 मेगावाट की चमेरा हाइड्रो बिजली परियोजना को कनाडा ने करीब 335 रुपये के क्रेडिट की पेशकश के साथ चालू किया था।

नाथपा झाकड़ी-जल विद्युत परियोजना

यह भारत की सबसे बड़ी हाइड्रो बिजली परियोजना है | यह हिमाचल प्रदेश में नाथपा झाकड़ी में स्थित है। यह सतलुज नदी पर बनायी गयी है। पहले की छह इकाइयों के  250 मेगावाट 30 दिसंबर 2002  को साधिकार किये गए थे। यह परियोजना सतलुज जल निगम (पहले इसे नाथपा झाकड़ी पावर कारपोरेशन कहा जाता था) द्वारा क्रियान्वित की जा रही है।