Airplane Turbulence: जानें यात्रा के दौरान हवाई जहाज में क्यों लगते हैं झटके (टर्ब्युलेन्स)

Dec 1, 2022, 16:09 IST

Airplane Turbulence: उड़ान के दौरान यात्रियों को कई बार टर्ब्युलेन्स का सामना करना पड़ता है. आखिर क्यों लगते हैं झटके? टर्ब्युलेन्स क्या है? क्या होता है जब एक उड़ान टर्ब्युलेन्स का सामना करती है? क्या यह घटना खतरनाक है? आइये इस लेख के माध्यम से टर्ब्युलेन्स के बारे में विस्तार से अध्ययन करते हैं.

Airplane Turbulence
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Airplane Turbulence: हाल ही में स्पाइसजेट बोइंग B737 विमान की उड़ान SG -945 मुंबई से दुर्गापुर की ओर जा रही थी, जब लैंडिंग के दौरान उसे गंभीर टर्ब्युलेन्स का सामना करना पड़ा. जिसके परिणामस्वरूप दुर्भाग्य से कुछ यात्रियों को चोटें आईं. दुर्गापुर पहुंचने पर तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई. आइये जानते हैं टर्ब्युलेन्स क्या होता है, क्यों होता है?, इत्यादि.

टर्ब्युलेन्स क्या है?

टर्ब्युलेन्स सभी मौसम की घटनाओं में सबसे अप्रत्याशित घटना है. यह हवा की एक अनियमित गति है जो अधिकतर खराब मौसम, आसमानी चक्रवात, तेज़ हवाओं, तूफान और बारिश की वजह से होता है. इस कारण से हवाई यात्रा में बाधा उत्पन्न हो जाती है. 

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जानें क्यों होता है टर्ब्युलेन्स

वातावरण में विद्यमान वायु हमेशा गति में रहती है. विमान इस गति का उपयोग उड़ान भरने में सक्षम होने के लिए करते हैं. एक विमान को स्थिर उड़ान भरने के लिए, पंखों के ऊपर और नीचे से गुजरने वाले वायु प्रवाह का नियमित होना जरूरी  होता है. हालांकि, कुछ मौसम की घटनाएं हवा के प्रवाह में अनियमितता पैदा कर सकती हैं और इससे एयर पॉकेट्स बन जाते हैं. इसी कारण टर्ब्युलेन्स का निर्माण होता है. 

इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि सतह पर हर जगह हवा एक जैसी नहीं होती है कहीं वैक्यूम एरिया होता है तो कहीं चक्रवात जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इस कारण से हवाई जहाज़  में यात्रा के दौरान झटके लगते हैं. जिसे हम टर्ब्युलेन्स कहते हैं.

टर्ब्युलेन्स के प्रकार

एक विमान लगभग 7 प्रकार के टर्ब्युलेन्स का सामना करता है. यह मौसम से संबंधित हो सकता है या यह स्पष्ट वायु टर्ब्युलेन्स (हवा या जेट धाराओं के कारण) भी हो सकता है. 

मौसम संबंधी टर्ब्युलेन्स में, आसमान में बिजली कड़कने और भारी बादल होने के समय विमान में टर्ब्युलेन्स पैदा होता है.

कितनी खतरनाक है टर्ब्युलेन्स की घटनाएँ 

आमतौर पर, पायलटों को टर्ब्युलेन्स से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जो उनकी प्रकृति और तीव्रता पर निर्भर करता है.

टर्ब्युलेन्स खतरनाक हो सकता है यदि वे बादल के गरज के साथ जुड़ा हों क्योंकि उससे विमान के अत्यधिक दबाव या नियंत्रण होने में नुकसान की संभावना होती है.

कई अन्य कारक जैसे उचित प्रशिक्षण नहीं होना, और मौसम का खराब प्रसार या हवा से संबंधित जानकारी भी टर्ब्युलेन्स की घटनाओं में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

जब एक उड़ान टर्ब्युलेन्स का सामना करती है तब क्या होता है?

टर्ब्युलेन्स के कई प्रकार होते हैं इस कारण विमान जब अलग-लग टर्ब्युलेन्स को महसूस करता है तो रिएक्शन भी अलग होता है. 

हल्का टर्ब्युलेन्स (Light turbulence) क्षणिक रूप से ऊंचाई या रवैये में मामूली बदलाव या थोड़ा सा ऊबड़ खाबड़ के कारण होता है. उस समय हवाई जहाज़ में बैठने वालों को अपनी सीट बेल्ट में हल्का सा खिंचाव महसूस हो सकता है.

मध्यम टर्ब्युलेन्स (Moderate turbulence) यह हल्के टर्ब्युलेन्स के ही समान है लेकिन कुछ अधिक तीव्र होता है. हालांकि, इसके दौरान विमान को नियंत्रित करने में कोई नुकसान नहीं होता है. उस समय हवाई जहाज़  में बैठने वालों को अपनी सीट बेल्ट में एक निश्चित तनाव महसूस होगा और असुरक्षित वस्तुओं को हटा दिया जाएगा. 

गंभीर टर्ब्युलेन्स (Severe turbulence) यह ऊंचाई में आए अचानक से बदलाव के कारण या संकेतित एयरस्पीड में आए बड़े बदलाव के कारण होता  हैं. हवाई जहाज़ क्षण भर के लिए नियंत्रण से बाहर हो सकता है. इसके दौरान हवाई जहाज़ में बैठने वालों को उनकी सीट बेल्ट कसकर बैठना अनिवार्य होता है.

अत्यधिक टर्ब्युलेन्स (Extreme turbulence) में, हवाई जहाज़  उछल जाता है और इसे नियंत्रित करना असंभव हो जाता है. इससे संरचनात्मक क्षति हो सकती है. यह काफी खतरनाक होता है. 

चॉप (Chop) एक प्रकार का टर्ब्युलेन्स है जो तेज़ी से और कुछ हद तक लयबद्ध ढंग से ऊबड़ खाबड़ के होने का कारण बनता है.

टर्ब्युलेन्स के समय यात्री चोट से कैसे बचें 

हालांकि यह एक प्राकृतिक घटना है जिससे लड़ना तो मुश्किल है लेकिन फिर भी कुछ सावधानियों को अपनाकर दुर्घटना से बचा जा सकता है. 

सुरक्षित रहने के लिए निचे दिए गए टिप्स को फॉलो किया जा सकता है:

  • यात्रियों को यात्रा के दौरान हर समय अपनी सीट बेल्ट बांधकर बैठना चाहिए ताकि अप्रत्याशित टर्ब्युलेन्स से होने वाली चोटों को आसानी से रोका जा सके.
  • फ्लाइट अटेंडेंट को सुनें.
  • अपनी उड़ान की शुरुआत में सुरक्षा ब्रीफिंग पर ध्यान दें और सुरक्षा ब्रीफिंग कार्ड पढ़ें.
  • अगर आपका बच्चा दो साल से कम उम्र का है तो स्वीकृत चाइल्ड सेफ्टी सीट या डिवाइस का इस्तेमाल करें, इत्यादि.
Shikha Goyal is a journalist and a content writer with 9+ years of experience. She is a Science Graduate with Post Graduate degrees in Mathematics and Mass Communication & Journalism. She has previously taught in an IAS coaching institute and was also an editor in the publishing industry. At jagranjosh.com, she creates digital content on General Knowledge. She can be reached at shikha.goyal@jagrannewmedia.com
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