भारत के किस शहर को कहा जाता है ‘भारत का प्रवेश द्वार’, जानें

Sep 23, 2023, 13:24 IST

भारत में अलग-अलज राज्यों में अलग-अलग जिले हैं। इन जिलों में अलग-अलग शहर हैं, जो कि भारत को विविध भारत बनाने में मदद करते हैं। इन सभी शहरों की अपनी पहचान है, जिससे शहरों को वैश्विक स्तर पहचान बनाने में मदद मिलती है। इस कड़ी में क्या आपको पता है कि भारत के किस शहर को भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। 

भारत का प्रवेश द्वार
भारत का प्रवेश द्वार

भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित शहरों की अपनी-अपनी खासियत है। कई शहरों को उनकी अलग-अलग पहचान के लिए जाना जाता है।

 

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ऐसे में कुछ शहर वैश्विक पटल पर भी अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं। इस कड़ी में हम अपने अलग-अलग लेखों के माध्यम से भारत के शहरों के बारे में जान रहे हैं। क्या आपको पता है कि भारत के किस शहर को भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यह उपनाम शहर को कई वर्षों से मिला हुआ है। 

 

अलग-अलग शहरों का अपना उपनाम

भारत में अलग-अलग शहरों का अपना उपनाम है। शहरों को उनके मूल नाम के अलावा उपनामों से भी लोग जानते हैं। इसके पीछे वहां की भूगौलिक स्थिति, खान-पान, उत्पाद निर्माण, संस्कृति और भाषाएं शामिल हैं। शहरों को उपनाम देने से संबंधित शहरों में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है और स्थानीय स्तर पर भी रोजगार मिलता है। 

 

किस शहर को कहा जाता है भारत का प्रवेश द्वार

भारत में आपने अलग-अलग शहरों के बारे में सुना और पढ़ा होगा। हालांकि, क्या आपको एक ऐसे शहर के बारे में पता है, जिसे भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यदि नहीं, तो आपको बता दें कि महाराष्ट्र राज्य के मुंबई शहर यानि देश की आर्थिक राजधानी को हमारे देश भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। 

 

क्यों कहा जाता है प्रवेश द्वार

अब सवाल यह है कि आखिर इस शहर को ही भारत का प्रवेश द्वार क्यों कहा जाता है। दरअसल, साल 1911 में जब ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी का भारत में आगमन हुआ, तो उनके स्वागत में मुंबई के दक्षिण तट पर गेटवे ऑफ इंडिया स्मारक को बनाया गया था।

हालांकि, उस समय यह अपना मूल रूप में नहीं था, बल्कि उस समय कार्ड बोर्ड की आकृति बनाई गई थी। 

 

कब रखी गई थी स्मारक की आधारशिला

गेटवे ऑफ इंडिया की आधारशिला मार्च, 1916 में रखी गई थी। उस समय गुजराती वास्तुकला को शामिल करते हुए इंडो-सारासेनिक शैली में इसका निर्माण शुरू हुआ। इसके निर्माण से पहले वास्तुकार जॉर्ज विटेट द्वारा डिजाइन को अंतिम रूप दिया गया था।

साल 1924 में जाकर इस स्मारक का निर्माण पूरा हुआ। बाद में यह पर्यटन स्थल के रूप में उभरा। आज आप यहां पहुंचेंगे, तो आपको नौका-सेवा भी मिल जाएगी, जिससे आप अरब सागर की सैर कर सकते हैं। 

 

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

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