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जानिए भारत मे सोना कैसे निकाला जाता है?

भारत में सोने का सबसे अधिक उत्पादन कर्नाटक राज्य में होता है (हुट्टी और उटी नामक खानों से) और इसके अलावा आंध्र प्रदश और झारखण्ड (हीराबुद्दीनी और केंदरूकोचा की खानों से) के कुछ भागों से भी सोना निकाला जाता हैl सोना आमतौर पर या तो अकेले या पारे या सिल्वर के साथ मिश्र धातु के रूप में पाया जाता है। इस लेख में हम झारखण्ड की एक खदान के बारे में बता रहें है जहां से एक टन पत्थर से लगभग 4 ग्राम सोना निकाला जा रहा है और हर वर्ष औसतन 7 किलोग्राम सोना निकाला जा रहा है l
Jan 17, 2018 21:00 IST
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जैसा कि हमें पता है कि भारत में सोने का सबसे अधिक उत्पादन कर्नाटक राज्य में होता है (, कोलार ,हुट्टी और उटी नामक खानों से) और इसके अलावा आंध्र प्रदश और झारखण्ड (हीराबुद्दीनी और केंदरूकोचा की खानों से) के कुछ भागों से भी सोना निकाला जाता हैl सोना आमतौर पर या तो अकेले या पारे या सिल्वर के साथ मिश्र धातु के रूप में पाया जाता है। कैलेवराइट, सिल्वेनाइट, पेटजाइट और क्रेनराइट अयस्कों के रूप में भी यह पाया जाता है। अब ज्यादातर स्वर्ण अयस्क या तो खुले गड्डों से आता है या फिर अंडरग्राउंड खानों से। इस लेख में हम झारखण्ड की एक खदान के बारे में बता रहें है जहां से एक टन पत्थर से लगभग 4 ग्राम सोना निकाला जा रहा है और हर वर्ष औसतन 7 किलोग्राम सोना निकाला जा रहा है l

(सोने की खान के अन्दर सोने की चट्टान)

 GOLD mining in inida

Image source:AZoMining.com

सोना निकालने की 7 प्रक्रियाएं हैं इनमे पहली 4 में मानव के हाथों से होती हैं जबकि 3 रासायनिक हैं l

 GOLD MINING

Image source:Amar Ujala

प्रक्रिया 1 : विस्फोटकों से चट्टानों को तोडना

किस पत्थर को तोडना है इसके जाँच भूविज्ञानी (Geologist) करते हैं और फिर उस चिन्हित चट्टान को डाइनेमाइट की मदद से तोडा जाता है l 300 से 500 मीटर की गहराई से करीब 1 टन पत्थर निकाला जाता है और पूरे दिन में करीब 300 टन मलबा बाहर निकाला जाता है l सोना एक जगह पर जमा नही होता है और यह स्वर्ण अयस्क के रूप में मूव करता रहता है l

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Image source:enterprisemetals.com.au

प्रक्रिया 2 : पत्थरों की पिसाई :-इस निकाले गए मलबे के पत्थरों को मशीन की सहायता से बारीक बालू की तरह पीस लिए जाता है l इस प्रक्रिया में करीब 4 से 5 घंटे लगते हैं l

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प्रक्रिया 3 : बालू को गीला करने की प्रक्रिया: बालू में पानी डाला जाता है और फिर इसको एक टेबल पर डाला जाता है जिस पर गीला कम्बलनुमा कपडा बिछा रहता है l जब गीले कण इस कम्बल की ऊपर से निकलते हैं तो सोने के कण इस कम्बल में चिपक जाते हैं और फालतू का पत्थर बाहर निकल जाता है ; यह प्रकिया कई बार दोहराई जाती है l धयान रहे कि यह प्रक्रिया एक वाइब्रेटिंग टेबल पर संपन्न की जाती है जिसमे पत्थर छन जाता है l

(पत्थर को पीसते हुए मजदूर)

 GOLD CRUSHING

Image source:Money Bhaskar

प्रक्रिया 4 : कम्बल को धोने की प्रक्रिया: पानी में कम्बल धोने से सोने के कण अलग हो जाते हैंl सोना मिश्रित इस पानी को टेबल पर डाला जाता है जहाँ से पानी बह जाता है और सोने के अंश टेबल पर जमा हो जाते हैं l फिर इस जमा हुए सोने से बिस्किट, ईंट प्लेट और अन्य सामान बनाया जाता हैl

 यदि जरुरत पडी तो इन रासायनिक प्रक्रियाओं को करना पड़ता है

पहली रासायनिक प्रक्रिया :-

सायनाइड  की प्रक्रिया :-अगर अयस्क में सोने की मात्रा कम है तो रासायनिक प्रक्रिया का सहारा लिया जाता हैl  खान से निकले पत्थरों और इसके चूर्ण को कार्बन पल्स प्लांट में प्रोसेस करते हैं; इस पर पोटेशियम सायनाइड डालकर 48 घंटे तक छोड़ देते हैं l सायनाइड से रासायनिक प्रतिक्रिया के बाद मलबे में छिपा सोना तरल रूप में बाहर आ जाता है l

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दूसरी रासायनिक प्रक्रिया :-

अमलगमेशन: स्वर्ण अयस्क से शुद्ध सोना हासिल करने के सभी तरीकों में सबसे पहले अयस्क को धोया जाता है और फिर उसे मिल भेज दिया जाता है। मिल में अयस्क को पानी के साथ छोटे-छोटे कणों में पीस लिया जाता है। इसके बाद अयस्क को पारे की परत चढ़ी हुई प्लेटों से होकर गुजारा जाता है। स्वर्ण और पारा मिलकर अमलगम बना लेते हैं। इस प्रक्रिया को अमलगमेशन कहा जाता है। एक बार अमलगम बन जाने के बाद इसे तब तक गर्म किया जाता है, जब तक कि पारा गैस बनकर उड़ नहीं जाता। इसके बाद सोना बचा रह जाता हैl पारे की गैस बहुत ज्यादा जहरीली होती है और इसीलिए इसके निकलते वक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

(मिट्टी को धोकर सोना अलग करने की प्रक्रिया)

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Image source:Money Bhaskar

तीसरी रासायनिक प्रक्रिया : फ्लोटेशन

एक और तरीका है जिसे फ्लोटेशन कहा जाता है। जमीन से निकले अयस्क को एक घोल में रखा जाता है जिसमें झाग बनाने वाले तत्वों के अलावा संग्राहक तत्व भी होते हैं और कुछ दूसरे केमिकल्स भी। झाग बनाने वाला तत्व इस पूरे घोल को झाग में बदल देता है। संग्राहक तत्व सोने के कणों को आपस में बांधते हैं, जिससे एक तैलीय फिल्म बन जाती है जो सतह पर हवा के बुलबुलों से जुड़ जाती है। इसके बाद सोने की इस फिल्म को अलग कर लिया जाता है।

(पूरी प्रक्रिया के बाद मिला सोना)

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Image source:Exploration – OceanaGold

दुनिया में सोने की प्रमुख खानें हैं: किम्बरले (अफ्रीका), ग्रैसबर्ग (पापुआ), कार्लिन नवादा (अमेरिका), वेलाडेरो (अर्जेंटीना), लिहिर (पापुआ न्यू गिनी)

इस प्रकार ऊपर दी गयी सोना निकालने की प्रक्रिया से एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि सोना निकालना एक बहुत ही कठिन प्रक्रिया है यही कारण है कि बाजार में सोने के दाम इतने ज्यादा होते हैं l

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