अमेरिका की जीएसपी स्कीम क्या है और इससे हटाने पर भारत को क्या नुकसान होगा?

जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज (जीएसपी) एक अमेरिकी व्यापार कार्यक्रम है जो कि विकाससील देशों के उत्पादों को अमेरिका में ड्यूटी फ्री एंट्री देता है. अर्थात अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम में शामिल देशों को विशेष तरजीह दी जाती है. अमेरिका उन देशों से एक तय राशि के आयात पर शुल्क नहीं लेता है. जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज की स्थापना 1974 के व्यापार अधिनियम द्वारा 1 जनवरी, 1976 को हुई थी.
Mar 8, 2019 11:55 IST
    India-USA Relation

    जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज (जीएसपी) एक अमेरिकी व्यापार कार्यक्रम है जो कि विकाससील देशों के उत्पादों को अमेरिका में ड्यूटी फ्री एंट्री देता है. अर्थात अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम में शामिल देशों को विशेष तरजीह दी जाती है. अमेरिका उन देशों से एक तय राशि के आयात पर शुल्क नहीं लेता है.

    जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज की नीति 129 विकाससील देशों के लगभग 4,800 उत्पादों को अमेरिका में ड्यूटी फ्री एंट्री देता है. जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज की स्थापना 1974 के व्यापार अधिनियम द्वारा 1 जनवरी, 1976 को हुई थी.

    ज्ञातव्य है की अमेरिका ने अभी हाल ही में भारत को इस स्कीम का लाभ लेने वाले देशों की सूची से बाहर कर दिया है जिसके प्रभावों की विवेचना इस लेख में की गयी है.

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    भारत और अमेरिका व्यापार;

    अमरीकी आंकड़ों के मुताबिक़ दोनों देश सालाना 126.2 अरब डॉलर का व्यापार करते हैं जिसमे अमेरिका का भारत को निर्यात $49.4 अरब डॉलर और आयात $76.7 अरब डॉलर था. अर्थात अमेरिका के साथ भारत का व्यापार 27 अरब डॉलर के सरप्लस में है.

    भारत; अमेरिका को मुख्य रूप से कपडे, फल सब्जियां, हस्तशिल्प चीज़ें, केमिकल, मत्स्य पालन से जुड़े उत्पाद और कृषि आधारित उत्पादों का निर्यात करता है जबकि अमेरिका; भारत को मशीनरी, कृषि उत्पाद, आईटी उत्पाद, मेडिकल उत्पाद, ऑटोमोबाइल गाड़ियाँ इत्यादि निर्यात करता है.

    भारत के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा?

    जनवरी में जारी कांग्रेस रिसर्च सर्विस रिपोर्ट के अनुसार , भारत को जीएसपी स्कीम का सबसे ज्यादा फायदा मिला है. वर्ष 2017 में भारत का 5.7 अरब डॉलर निर्यात ड्यूटी फ्री रहा. जबकि तुर्की ने 1.7 अरब डॉलर का सामान अमेरिका में बिना ड्यूटी निर्यात किया.  भारत 1974 में बनाई गई इस योजना के तहत लाभ पाने वाला विश्व का सबसे बड़ा देश है.

    अब तक इस नीति की वजह से भारत से अमेरिका जाने वाले 1930 उत्पाद अमेरिका में आयात शुल्क देने से बच जाते थे. इस बदलाव से अमेरिका में भारत की हस्तशिल्प चीज़ें, केमिकल, मत्स्य पालन से जुड़े उत्पाद और कृषि आधारित उत्पादों को आयात शुल्क देना पड़ेगा. अगर इसके असर की बात करें तो इससे हज़ारों नौकरियों पर संकट आ सकता है.

    लेकिन अगर वाणिज्य सचिव अनूप वाधवन की बात मानें तो वे कहते हैं कि भारत; जीएसपी के तहत अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर के सामानों का निर्यात करता है, जिसमें से केवल 1.90 करोड़ डॉलर मूल्य की वस्तुएं ही बिना किसी शुल्क वाली श्रेणी में आती हैं. कुल मिलाकर जीएसपी हटाए जाने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत ज़्यादा नहीं होगा और यह अधिकतम 19 करोड़ डॉलर तक ही सीमित रहेगा.

    "जीएसपी से बाहर निकाले जाने से कई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स की प्रतिस्पर्धा को नुक़सान होगा. ज़्यादातर केमिकल उत्पादों की क़ीमत लगभग 5% तक बढ़ जाने की संभावना है जो कि भारत के कुल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा है साथ ही साथ इससे भारतीय उपभोक्ताओं को भी नुक़सान होगा.

    अमेरिका ने ऐसा क्यों किया?

    अमेरिका का कहना है कि भारत में पाबंदियों की वजह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है. वह जीएसपी के मापदंड पूरे करने में नाकाम रहा है. अमेरिका ने पिछले साल अप्रैल में जीएसपी के लिए तय शर्तों की समीक्षा शुरू की थी. पिछले साल 1 जून 2018 अमेरिका ने भारत की स्टील पर 25% और एल्युमीनियम पर 10% टैरिफ लगाया था.

    ट्रम्प का कहना है कि भारत ने अमेरिका को अपने बाजार को ‘समान और उचित’ एक्सेस नहीं दिया. ट्रम्प ने इसके साथ ही भारत में कई अमेरिकी प्रोडक्‍ट्स पर लगने वाली ड्यूटीज की आलोचना की है.

    ध्यान रहे कि अमेरिका से निर्यात की वाली एक बाइक (हार्ले डेविडसन) पर भारत 100% टैरिफ वसूलता है, जबकि वहां से आने वाले इसी तरह के सामान पर अमेरिका कोई टैक्स नहीं लेता है. ट्रम्प ने कहा कि हम भी भारतीय आयात पर बराबर टैरिफ लगाएंगे.

    ज्ञातव्य है की अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा वर्ष 2017 में 27 अरब डॉलर था और यह बढ़ता ही जा रहा है और इस नीति के माध्यम से अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है.

    अमेरिका काफ़ी समय से भारत में मेडिकल डिवाइसों पर लगने वाले प्राइसिंग कैप को हटाने की मांग कर रहा है जिससे अमरीकी कंपनियों को नुक़सान हो रहा है. इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि भारत; अमेरिका से आने वाले आईटी उत्पादों और कृषि क्षेत्र से जुड़े उत्पादों को अपने बाज़ार में ज़्यादा पहुंच उपलब्ध कराए.

    आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका के साथ भारत का व्यापार सरप्लस वाला है अर्थात अमेरिका; भारत से ज्यादा मात्रा में आयात करता है और भारतीय निर्यातकों को अमेरिका जैसा बड़ा बाजार मिला हुआ है. इसके अलावा भारत भी अमेरिका के लिए बहुत बड़ा शस्त्र आयातक देश है. इसलिए दोनों देशों के हित एक दूसरे के साथ मजबूत संबंधों पर ही निर्भर करते हैं. अर्थात अमेरिका को भारत को मिले जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज (जीएसपी) को जारी रखना चाहिए.

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