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जानिये भारत के अब तक के सबसे अमीर आदमी ‘उस्मान अली खान’ के बारे में

हैदराबाद के पूर्व निजाम उस्मान अली खान को भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में गिना जाता है. ब्रिटिश न्यूजपेपर ‘द इंडिपेंडेन्ट’ की एक खबर के अनुसार हैदराबाद के निजाम (1886-1967) की कुल संपत्ति 236 अरब डॉलर आंकी गई थी. आइये इस लेख में मेरे उस्मान अली खान के बारे में कुछ रोचक तथ्यों को जानते हैं.
Nov 6, 2019 12:19 IST
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Mir Osman Ali Khan
Mir Osman Ali Khan


भारत की आजादी के समय देश 565 देशी रियासतों में बंटा था और भारत' के अन्तर्गत तीन तरह के क्षेत्र थे- (1) 'ब्रिटिश भारत के क्षेत्र' , (2) 'देसी राज्य' (Princely states) और फ्रांस और पुर्तगाल के औपनिवेशिक क्षेत्र. जूनागढ़, कश्मीर तथा हैदराबाद तीनों रियासतों को सेना की मदद से भारतीय गणराज्य में मिलाया गया था.

हैदराबाद रियासत ढक्कन के पठार में स्थित थी. हैदराबाद राज्य काफी साधन-संपन्न था. इसका अंतिम नवाब था 'निजाम उस्मान अली खान' था. उस्मान अली ने इटली के बराबर की इस  रियासत पर राज्य किया था. हैदराबाद वर्तमान में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की राजधानी है. इस लेख में भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मेरे उस्मान अली खान के बारे में बता रहे हैं.

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नवाब उस्मान अली खान का जन्म 6 अप्रैल, 1886 को हैदराबाद में हुआ था. नवाब साहब का पूरा नाम 'मीर असद अली ख़ान चिन चिलिच खान निज़ाम उल मुल्क आसफ़ जाह सप्तम' था.

हैदराबाद के निजाम का शासन मुगल निजामशाही के तौर पर 31 जुलाई, 1720 को शुरू हुआ था. इसकी नींव मीर कमारुद्दीन खान ने रखी थी. उस्मान अली खान आसफ़जाही राजवंश के आखिरी निजाम थे. उस्मान अली खान का राज्याभिषेक 18 सितम्बर 1911 को हुआ था और उन्होंने 1948 तक शासन किया था. इस प्रकार नवाब ने कुल 37 वर्ष शासन किया था.

ब्रिटिश न्यूजपेपर ‘द इंडिपेंडेन्ट’ की एक खबर के अनुसार हैदराबाद के निजाम (1886-1967) की कुल संपत्ति 236 अरब डॉलर आंकी गई थी, जबकि फोर्ब्स की लिस्ट के अनुसार मुकेश अम्बानी 40 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के 19 वें सबसे अमीर आदमी हैं. हालाँकि 20 अगस्त को मुकेश की कुल संपत्ति 49 अरब डॉलर थी. फोर्ब्स-2018 लिस्ट में दुनिया के सबसे अमीर आदमी जेफ़ बेजोस की कुल संपत्ति 112 अरब डॉलर है. इस प्रकार आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि नवाब उस्मान अली खान कितने अमीर आदमी थे.

कहा जाता है कि निजाम 20 करोड़ डॉलर (1340 करोड़ रुपए) की कीमत वाले डायमंड का यूज पेपरवेट के रूप में किया करते थे.

नवाब को निम्न सम्मान एवं उपाधियां भी दी गयी थीं;

a. 1911 में उन्हें नाइट ग्रैंड कमांडर ऑफ़ द स्टार ऑफ़ इंडिया की उपाधि दी गई थी.

b. 1917 में नाइट ग्रैंड क्रॉस ऑफ़ द ब्रिटिश एंपायर की उपाधि दी गई थी.

c. 1946 में उन्हें रॉयल विक्टोरिया चेन से सम्मानित किया गया था.

नवाब ने 1918 में उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद की स्थापना करायी थी. निजाम ने चीन से 1965 की लड़ाई के दौरान भारत सरकार को पांच टन (5000 किलो) सोना नेशनल डिफेंस फंड में दिया था. आज इस सोने की कीमत लगभग 1600 करोड़ से अधिक है. ध्यान रहे कि यह वही निजाम थे जो कभी भारत में शामिल नहीं होना चाहते थे.

आश्चर्य की बात यह है कि निजाम इतना अमीर होते हुए भी बहुत कंजूस किस्म के इन्सान थे. कहा जाता है कि निजाम कभी भी प्रेस किये हुए कपडे नहीं पहनते थे और उन्होंने एक ही टोपी को 35 साल तक पहना था. नवाब टीन की प्लेट में खाना खाते थे और बहुत ही सस्ती सिगरेट पीते थे और कभी-कभी तो अपने मेहमान से भी सिगरेट मांग कर पीते थे. यहाँ तक कि निजाम ने कभी सिगरेट का पूरा पैकेट नहीं खरीदा था.

लेकिन भारत की आजादी के बाद जब देश के एकीकरण के प्रयास शुरू हुए तो नवाब को अपनी नवाबी छोड़कर अपनी रियासत को भारतीय गणतंत्र में 1948 में शामिल करना पड़ा. रिकार्ड्स के अनुसार निजाम की नवाबी चली जाने के बाद भी उनकी 9 पत्नियाँ, 42 रखैलें, 200 बच्चे और 300 नौकर थे.

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भारत में विलय के बाद निजाम के पास आय के स्रोत कम होते गये और एक दिन ऐसा भी आया जब नवाब का खानदान भारत छोड़कर चला गया. सूत्रों से पता चलता है कि नवाब के वंशज तुर्की में एक छोटे से फ्लैट में रहकर गुमनाम जीवन गुजार रहे हैं. 

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