मेरिट और गैर मेरिट वस्तुएं क्या होतीं हैं?

मेरिट वस्तुओं को उत्कृष्ट वस्तुएं भी कहा जाता है. सरकार जिन वतुओं के उपयोग को जनहित के लिए बढ़ाना चाहती है उनको मेरिट वस्तुएं कहा जाता है. सरकार जिन वस्तुओं के उपयोग को समाज के लिए हानिकारक समझतीं हैं तथा उन पर रोक लगाती है. ऐसी वस्तुओं को गैर मेरिट वस्तुएं कहा जाता है. उदाहरण: शराब, गांजा, अफीम और अन्य ड्रग्स इत्यादि.
Mar 30, 2019 19:12 IST
    Merit Goods Examples

    मेरिट वस्तुओं की परिभाषा (Definition of Merit Goods):

    मेरिट वस्तुओं को उत्कृष्ट वस्तुएं भी कहा जाता है. सरकार जिन वतुओं के उपयोग को जनहित के लिए बढ़ाना चाहती है उनको मेरिट वस्तुएं कहा जाता है. मेरिट वस्तुओं की पूर्ती उपभोक्ताओं की वरीयता की आधार पर नहीं बल्कि सरकार के अधिमान के आधार पर की जाती है.

    अर्थात इन वस्तुओं को सरकार अपनी मर्जी से लोगों को देती है और लोगों से उनकी राय नहीं पूछती है. उदाहरण के लिए कम लागत पर घर देना, मुफ्त या कम कीमतों पर दिया जाने वाला राशन, सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली दवाइयां और आगनवाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को दिया जाने वाला पोषण युक्त खाना,पब्लिक लाइब्रेरी,अस्पताल और स्कूल इत्यादि.

    बजट द्वारा मेरिट वस्तुओं की व्यवस्था समाज के किसी खास वर्ग के लिए की जाती है जबकि सामाजिक वस्तुओं की व्यवस्था सम्पूर्ण समाज को ध्यान में रखकर की जाती है. मेरिट वस्तुएं इनके प्राप्त कर्ता को सीधे तौर पर लाभ पहुंचतीं हैं साथ ही सामाजिक लाभ का सृजन भी करतीं हैं. जैसे स्कूलों के निर्माण से पढ़े लिखे समाज का निर्माण होता है.

    ध्यान रहे कि मेरिट वस्तुएं निजी अथवा वस्तुएं हो सकती हैं.

    गैर मेरिट वस्तुएं (Non Merit Goods)

    सरकार जिन वस्तुओं के उपयोग को समाज के लिए हानिकारक समझतीं हैं तथा उन पर रोक लगाती है. ऐसी वस्तुओं को गैर मेरिट वस्तुएं कहा जाता है.

    NON MERIT GOODS

    IMAGES:twitter.com

    उदाहरण: शराब, गांजा, अफीम और अन्य ड्रग्स, जुआ के अड्डे, वोइलेंट फिल्म्स और खेल, जैसे ब्लू व्हेल और PUBG खेल

    सरकार गैर मेरिट वस्तुओं के उपभोग को नियंत्रित करने के लिए उन पर अधिक टैक्स लगाती है. जैसे कि आपने सुना होगा कि सरकार हर साल बजट में गुटका, सिगरेट और शराब पर बहुत अधिक कर लगाती है ताकि इनके दाम बढ़ जाएँ और लोग कम उपभोग कर पायें.

    कई बार साक्षात्कारों में इन दोनों वस्तुओं में अंतर पूछा जाता है इसलिए अभ्यर्थियों को इन दोनों के बीच अंतर को ध्यान से पढना चाहिए.

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