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One Nation, One Election: क्या राज्यों की सहमति जरुरी नहीं, कैसे अमल में आयेगा बिल, पढ़ें यहां

Last Updated: Sep 19, 2024, 09:08 IST

पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' (One Nation, One Election) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का विचार पूरे देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने पर आधारित है. इसका उद्देश्य बार-बार चुनावों से बचते हुए प्रशासनिक सुगमता, खर्च में कमी और विकास कार्यों में निरंतरता बनाए रखना है. यह प्रक्रिया पहले 1951-52, 1957, 1962 और 1967 में लागू थी, लेकिन असमय विधानसभा भंग होने से यह क्रम टूट गया. अब फिर से इसे लागू करने के लिए संविधान में संशोधन और व्यापक कानूनी बदलावों की जरूरत होगी.  

पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' (One Nation, One Election) प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.
पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' (One Nation, One Election) प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' (One Nation, One Election) प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. 'One Nation, One Election' का प्रस्ताव, लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनावों को एक साथ कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है. 

'One Nation, One Election' क्या है?

'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का विचार पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का है, यानी लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाव एक साथ होंगे. इस अवधारणा को सबसे पहले 1980 के दशक में प्रस्तावित किया गया था.

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कब पेश होगा बिल:

केंद्र सरकार की कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और यह बिल संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है. यह फैसला 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' पर बनी उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट कैबिनेट के सामने पेश होने के बाद आया है.    

किस समिति ने की थी सिफारिश: 

'One Nation, One Election' पर पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था. मोदी सरकार 2.0 ने इस समिति का गठन किया था ताकि एक साथ चुनाव कराने की व्यवहार्यता के बारें में पता किया जाये. यह बीजेपी के लोकसभा चुनावी घोषणा पत्र के प्रमुख वादों में से एक था। समिति ने इस साल मार्च में राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. 

समिति की 18,626 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में पहला कदम लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने का सुझाव दिया गया है, जिसके लिए राज्यों की सहमति आवश्यक नहीं होगी, बल्कि संविधान संशोधन की आवश्यकता होगी. 

पंचायत चुनाव के लिए क्या हैं सिफारिशें:

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति का गठन एक साथ चुनाव कराने की व्यवहार्यता के बारें में पता लगाने के लिए किया गया था. अगला कदम नगर निगमों और पंचायतों के चुनावों को लोकसभा और विधानसभा चुनावों के साथ मिलाकर कराना होगा. हालांकि, इसके लिए आधे से अधिक राज्यों द्वारा अनुमोदन जरूरी होगा. समिति ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को हकीकत बनाने के लिए कुल 18 संवैधानिक संशोधनों की सिफारिश की है. 

बता दें कि 1951-52, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए थे. हालांकि, बाद में कुछ विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण यह क्रम टूट गया, और 1970 में लोकसभा भी समय से पहले भंग कर दी गई थी. 

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Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.

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First Published: Sep 19, 2024, 09:08 IST

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