जानें भारत में किन कारणों से ट्रेनें लेट होती हैं

Oct 4, 2018, 19:01 IST

भारत में लगभग करोड़ों लोग ट्रेन में सफर करते हैं. अधिकतर लोग एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए ट्रेन का ही इस्तेमाल करते हैं. परन्तु आपने कभी ध्यान दिया है कि कई बार ट्रेन लेट हो जाती है या फिर अधिकतर सर्दियों में ट्रेनें लेट होती हैं. ऐसा क्यों होता है. इसके पीछे क्या कारण हो सकता है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

7 reasons why Indian Railways run late
7 reasons why Indian Railways run late

भारतीय रेल की शुरुआत 16 अप्रैल 1853 को हुई थी. अगर आज भारतीय रेल की पटरियों को एक साथ जोड़ दिया जाए तो उनकी लंबाई पृथ्वी के आकार से लगभग 1.5 गुणा ज्यादा होगी. क्या आप जानते हैं कि देश की सबसे बड़ी रेल सुरंग जम्मू-कश्मीर के पीर पंजाल में है. हर रोज भारत में लगभग करोड़ों लोग रेल में सफर करते हैं. अधिकतर लोग एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए ट्रेन का ही इस्तेमाल करते हैं परन्तु आपने कभी ध्यान दिया है कि कई बार ट्रेन लेट हो जाती है या फिर अधिकतर सर्दियों में ट्रेनें लेट होती हैं. यहां तक कि रद्द भी हो जाती हैं जिसके कारण करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं, उनका समय भी खराब होता है और काफी नुक्सान भी हो जाता है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं कि आखिर ट्रेन के लेट होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं.

भारत में ट्रेनें लेट क्यों होती हैं?

1. रेल के रूटों पर ट्रेन की बहुतायत का होना

देश में जनसंख्या के बढ़ने के साथ-साथ यात्रियों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसके कारण रेलवे को एक ही गंतव्य के लिए अलग-अलग ट्रेनें चलानी पढ़ रही हैं. इससे रूटों पर ट्रेनों की आवाजाही में बढ़ोतरी हुई है. एक ही दिशा में जा रही एक से अधिक ट्रेनों को अपने आगे और पीछे चल रही ट्रेन से विशेष दूरी बनाये रखना पड़ता है, जिससे ट्रेन लेट हो रही हैं.

हमारे देश में रेलवे में यह व्यवस्था है कि 3 ट्रेनें महज 1100 मीटर की दूरी बनाये रखकर भी एक समय पर चल सकती हैं मगर कोई दुर्घटना ना हो जाए इसलिए रेलवे के अधिकारी आज भी ट्रेन को रोककर दूसरी ट्रेन को आगे बढा देते हैं, जिसके कारण से सही समय पर चल रही ट्रेन भी लेट हो जाती है और उसे अपने पीछे चल रही ट्रेन को आगे निकालने के लिए स्टशनों पर रोकना पड़ता है और वो भी लम्बे समय के लिए. इस कारण से भी ट्रेन लेट हो जाती है.

2. ट्रेन की गति का समयानुसार न चलना

रेलवे के ट्रैक विभिन्न रूटों पर इतने सक्षम हैं कि उन पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलायी जा सकती हैं मगर इतनी रफ्तार से ट्रेनों को चलाने की रेलवे को अनुमति नहीं दी गई है और ना ही ट्रैकों का रख-रखाव सही तरीकों से किया जा रहा है. जिससे ट्रेनें लेट चल रही हैं क्योंकि ट्रेनों को गति सही से मिल नहीं पाती हैं.

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3. रेलवे प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा न होना

रेलवे की घोषणाओं में कई ऐसी घोषणाएं या योजनाएं हैं जो राजनितिक फायदे या फिर सरकार के बदलने पर रोक दी जाती हैं या फिर शुरू ही नहीं हो पाती हैं. साथ ही रेलवे में हो रहे घाटे के कारण भी समय पर योजनाएं पूरी नहीं हो पाती हैं और फिर इन योजनाओं की लागत साल दर साल बढ़ती जाती है और इन योजनाओं को पूरा करने में देरी हो जाती है. इन प्रोजेक्ट के अधूरे होने के कारण देश का काफी भाग पटरियों के दोहरीकरण से वांछित है. कई जगह ऐसी भी है देश में जहां दोहरीकरण हुआ भी है तो वहा नदी-नालों पर पुल का काम रुका हुआ है जिसके कारण सही से परिचालन नहीं हो पा रहा है.

4. रेलवे अधिकारियों का रवैया भी जिम्मेदार हो सकता है, ट्रेन के लेट होने में

समय के साथ रेलवे अधिकारियों और रेलवे में जिस तरह बदलाव होना चाहिए था नहीं हो पा रहा है. कई बार ऐसा भी देखने को मिला है कि ट्रेन आने की घोषणा किसी प्लेटफार्म पर हो रही है परन्तु ट्रेन दूसरे प्लेटफार्म पर आ जाती है. ये अधिकारीयों की लापरवाहियों के कारण ही तो होता है. ऐसा भी कहा जाता है कि यदि कोई ट्रेन लेट हो रही होती है तो अधिकारी ट्रेन को सही समय पर लाने की बजाए जगह-जगह ट्रेन को रोक देते है या यू कहे तो मैनेज नहीं कर पाते है. ये भी ट्रेन लेट होने का कारण हो सकता है.

5. ट्रेन के लेट होने का कारण इंजीनियरिंग से भी जुड़ा होता है

ट्रेन के लेट होने का कारण इंजीनियरिंग से भी जुड़ा होता है. ट्रैक पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य, सिग्नल का काम या ओएचई यानी ओवर हेड वायर के काम की वजह से भी ट्रेन लेट होती है. वहीं 21 फ़ीसदी ट्रेनें एसेट्स फ्लेयर यानी रेलवे का कोई सिस्टम फेल हो जाने से लेट होती हैं. इनमें सिग्नल का फेल होना, इंजन फेल होना, कैरिज और वेगन में गड़बड़ी या ओएचई का फेल होना शामिल है.

6. बाहरी वजहों से भी ट्रेन लेट हो सकती है

इन बाहरी वजहों में चेन पुलिंग, लेवल क्रासिंग गेट, ट्रैक पर किसी तरह के हादसे, ट्रैक पर किसी तरह का प्रदर्शन (आंदोलन) या मौसम की वजह से लेट होना शामिल है.

7. ट्रैक पर कंजेशन का होना भी ट्रेन के लेट होने का कारण है. क्या आप जानते हैं कि पूंचुएलिटी में सबसे बुरी हालत साउथ ईस्टर्न रेलवे की है. वेस्टर्न और सेंट्रल रेलवे पूंचुएलिटी के लिहाज से सबसे बेहतर हैं. यदि पूंचुएलिटी में रेलवे डिविजन की बात करे तो हावड़ा डिविजन की हालत खराब है. वहीं उत्तर रेलवे के तीन मंडल लखनऊ, मुरादाबाद और दिल्ली इसमें अंतिम पायदान की तरफ हैं.

तो ये कहना गलत नहीं होगा कि इंजीनियरिंग के साथ-साथ बाहरी वजहों पर भी ध्यान देना होगा. अधिकारियों और रेलवे के कर्मचारियों को भी एक साथ समाधान निकालना होगा. इन सब कारणों को बेहतर किया जा सकता है, ताकि ट्रेनें लेट ना हों और लोगों को ज्यादा मुशकिलों का सामना न करना पड़े.

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Shikha Goyal is a journalist and a content writer with 9+ years of experience. She is a Science Graduate with Post Graduate degrees in Mathematics and Mass Communication & Journalism. She has previously taught in an IAS coaching institute and was also an editor in the publishing industry. At jagranjosh.com, she creates digital content on General Knowledge. She can be reached at shikha.goyal@jagrannewmedia.com
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