7 ‘वंडर्स ऑफ वर्ल्ड पार्क’ या ‘वेस्ट टू वंडर पार्क’ के बारे में रोचक तथ्य

Apr 25, 2019, 12:47 IST

दिल्ली भारत का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र है और इसे देश का दिल माना जाता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि शहर अपनी समृद्ध संस्कृति और विरासत के लिए लोकप्रिय है. शहर में कई ऐतिहासिक स्मारक, खूबसूरत बगीचे इत्यादि हैं. हाल ही में, दिल्ली की सूची में एक नया थीम पार्क भी जोड़ा गया है जो काफी आश्चर्यजनक है, अलग है और एक अलग विषय पर आधारित है जिसका नाम है 'वेस्ट टू वंडर' या 'वंडर्स ऑफ वर्ल्ड पार्क’. इसका उद्घाटन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राजीव गांधी स्मृति वन में किया था.

7 ‘Waste to Wonder’ or ‘Wonders of World’ Park: Amazing facts
7 ‘Waste to Wonder’ or ‘Wonders of World’ Park: Amazing facts

इस पार्क के बारे में सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली तथ्य यह है कि आपको यहाँ पर दुनिया के 7 अजूबे दिखाई देंगे. वास्तव में, दुनिया के ये 7 अजूबे औद्योगिक वेस्ट और अन्य वेस्ट पदार्थों जैसे स्क्रैप मेटल, ऑटो पार्ट्स, शहर के लैंडफिल से बनाए गए हैं. इस तरह अपशिष्ट पदार्थ का उपयोग अच्छे रूप में किया गया है. यही कारण है कि यह पार्क हर किसी के लिए एक आकर्षण बिंदु बन जाता है और हाँ यह अपने आप में अनोखा भी है. पार्क सराय काले खान इंटर-स्टेट बस टर्मिनस और ओशन रिंग रोड के भीड़भाड़ वाले परिवेश में विकसित एक छोटे से द्वीप जैसा दिखता है. यह 'स्वच्छ भारत अभियान' को बढ़ावा देगा और पहली बार कचरे का इस्तेमाल धन कमाने के लिए किया जा रहा है.

दक्षिण दिल्ली नगर निगम (SDMC) ने सौर पेड़ और छत पर पैनल लगाए हैं जो 50 किलोवाट की पॉवर को उत्पन्न करेंगे और अधिशेष बिजली राजस्व अर्जित करने के लिए बिजली वितरण कंपनियों को बेची जाएगी. क्या आप जानते हैं कि पार्क का निर्माण छह महीने के भीतर किया गया है? पार्क के विकास में लगभग 150 टन स्क्रैप, 5 कलाकार, 7 सहायक कलाकार, 70 वेल्डर और हेल्पर्स का उपयोग किया गया है. SDMC के अनुसार यह पार्क 7.5 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है और सुबह 11 बजे से रात के 11 बजे तक संचालित होगा.

‘वेस्ट टू वंडर’ थीम पार्क के बारे में रोचक तथ्य

इस थीम पार्क में दुनिया के 7 अजूबे शामिल हैं इसमें ताजमहल, पीसा का लीनिंग टॉवर, गीजा का महान पिरामिड, पेरिस का एफिल टॉवर, क्राइस्ट द रिडीमर स्टैच्यू ऑफ रियो डी जनेरियो, न्यूयोर्क का स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी, रोम का कोलोजियम हैं.

1. यूएसए का स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का रेप्लिका


Source: www.trtworld.com
वेस्ट सामग्री का उपयोग: लगभग 7-8 टन
ऊंचाई: लगभग 35 फीट

पुरानी पाइल्स, धातु रेलिंग और एंगल्स का उपयोग करके पेडस्टल बनाया गया है जो ईंटों का लुक देता है. कार रिम्स का उपयोग करके गोलाकार छल्ले बनाए गए हैं. अपने बाएं हाथ में, रोमन लिबर्टी देवी एक एमसीडी बेंच और धातु शीट से बनी हुई नक्काशीदार एक टैबलेट लिए हुए हैं और उनके दाहिने हाथ में एक टार्च है जो पुरानी बाइक और उसकी चेन से बनाई गई है. साथ ही आपको बता दें कि उनके बालों को साइकिल चैन का उपयोग करके बनाया गया है.

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2. ब्राज़ील का क्राइस्ट द रिडीमर का रेप्लिका


Source: www.whatsuplife.in
वेस्ट सामग्री का उपयोग: लगभग 4-5 टन
ऊंचाई: लगभग 25 फीट
बेंच में से चौकोर पाइप का इस्तेमाल पैदल चलने के लिए किया गया है. मूर्ति के निचले हिस्से को बनाने के लिए बिजली के खंभे को लंबवत रखा गया है. मोटो बाइक की चेन और इंजन के पुर्ज़े का इस्तेमाल हाथों और बालों को बनाने के लिए किया गया है.

3. पेरिस एफिल टॉवर का रेप्लिका


Source: www.ndtv.com
वेस्ट पदार्थ का उपयोग: लगभग 40 टन
ऊँचाई: लगभग 60 फीट
यह 70 फीट लंबा है और गढ़ा-लोहे की जाली से बना है और कई और ऑटोमोबाइल कचरे जैसे ट्रक, क्लच प्लेट, सी चैनल इत्यादि से भी बनाया गया है. रेप्लिका की तीन मंजिलों को अलग से बनाया गया और फिर एक क्रेन की मदद से इकट्ठा किया गया है.

4. ताजमहल का रेप्लिका


Source: www.whatsuplife.in
वेस्ट पदार्थ का उपयोग: लगभग 30 टन
ऊँचाई: लगभग: 20 फीट
ताजमहल की इस खूबसूरत संरचना को 1600 साइकिल के छल्ले, बिजली के पोल पाइप, पुराने पैन, पार्क बेंच, झूले, ट्रक स्प्रिंग्स, शीट्स इत्यादि का उपयोग करके बनाया गया है. 2 पाइपों का उपयोग करके गुंबदों का निर्माण किया गया है. साथ ही जटिल डिजाइन जैसे खिड़की और चौखट को बनाने के लिए ट्रक की शीटों, बेंचों का उपयोग किया गया है.

5. रोम से विश्व का सबसे बड़े एम्फीथिएटर कोलोसियम का रेप्लिका


Source: amarujala.com

वेस्ट पदार्थ का उपयोग: लगभग 11 टन
ऊंचाई: लगभग 15 फीट
कोलोसियम नामक सबसे बड़ा पत्थर से बना एम्फीथिएटर, जिसे 70-72 A.D के आसपास विकसित किया गया था, जो फ्लेवियन राजवंश के सम्राट वेस्पासियन द्वारा बनाया गया था. इसे उत्पन्न करने के लिए जिन कचरे का उपयोग किया गया है, वे हैं बिजली के खंभे, धातु की रेलिंग, बेंच, ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स इत्यादि. कार के पहियों का उपयोग मेहराब बनाने के लिए भी किया गया है.

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6. पीसा के लीनिंग टॉवर का रेप्लिका


Source: www.surfacesreporter.com
वेस्ट पदार्थ का उपयोग: लगभग 10.5 टन
ऊंचाई: लगभग 25 फीट
इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में किया गया था. रेप्लिका में लगभग 211 मेहराबें हैं जो आठ मंजिला में फैली हुई हैं, जिन्हें साईकिल रिम से निर्मित किया गया है. मेहराबों के बीच में हीरे के डिज़ाइन जो धातु की शीट्स और पाइप से बनाए गए हैं जो स्तंभ की तरह दिख रहे हैं.

7. मिस्र के गीजा के पिरामिड का रेप्लिका


Source: www.whatsuplife.in
वेस्ट सामग्री का उपयोग: लगभग 10-12 टन
ऊंचाई: लगभग 18 फीट
क्या आप जानते हैं कि गीजा का महान पिरामिड प्राचीन विश्व के सात आश्चर्यों में सबसे पुराना है? 10-12 टन वजन वाले 10,800 फीट के स्क्रैप कोण का उपयोग करके लगभग 110 परत संरचना तैयार की गई है.

पार्क के बारे में कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य

- पार्क में मूर्तियों के विकास और निर्माण के लिए लगभग 150 टन स्क्रैप का उपयोग किया गया है. 150 टन में से, 90 टन औद्योगिक वेस्ट और जंक ऑटोमोबाइल पार्ट्स से बनाया गया है.

- 5 एकड़ भूमि क्षेत्र में यह पार्क बनाया गया है और पार्क के लिए निकटतम मेट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन पर हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन होगा.

- पार्क में प्रवेश शुल्क 3 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए नि: शुल्क है. 3 से 12 साल वालों के लिए प्रवेश शुल्क 25 रुपये और वयस्कों के लिए प्रवेश शुल्क 50 रुपये है. एमसीडी स्कूल के छात्रों के लिए प्रवेश निःशुल्क है.

- यह एक इको-फ्रेंडली पार्क है. इसमें 3 विंडमिल (1 किलोवाट), 3 सौर वृक्ष (5 किलोवाट) और 10KW के छत पर सौर पैनल शामिल हैं. इसलिए, SDMC ने अपनी अक्षय ऊर्जा पर चलने के लिए इस थीम पार्क को पर्याप्त रूप से आत्मनिर्भर बनाया है.

- इसमें प्रवेश के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग उपलब्ध नहीं है. साथ ही, पार्क में उन लोगों के लिए पार्किंग की सुविधा है जो अपने वाहन से आते हैं.

तो, अब आपको ‘वंडर्स ऑफ वर्ल्ड पार्क’ या ‘वेस्ट टू वंडर पार्क’ के बारे में पता चल गया होगा, जिसमें वेस्ट पदार्थों से बने विश्व के 7 अजूबों के रेप्लिका शामिल हैं.

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Shikha Goyal is a journalist and a content writer with 9+ years of experience. She is a Science Graduate with Post Graduate degrees in Mathematics and Mass Communication & Journalism. She has previously taught in an IAS coaching institute and was also an editor in the publishing industry. At jagranjosh.com, she creates digital content on General Knowledge. She can be reached at shikha.goyal@jagrannewmedia.com
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