भारतीय रेलवे के बेड़े में हाल ही में नया D-9 इंजन जैसा शक्तिशाली इंजन(लोकोमोटिव) को शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के दाहोद में पहुंच नए इंजन को हरी झंडी दिखाकर इंजन को देश को समर्पित किया है।
यह इंजन दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंजनों में शामिल किया गया है। ऐसे में इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर डी-9 इंजन बाकी रेल इंजन से कितना अलग है।
क्या है D-9 का मतलब
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि आखिर इस इंजन को D-9 नाम क्यों दिया गया है। आपको बता दें कि यहां डी-9 से मतलब दाहोद-9000 से है।
भारत में तैयार किया गया है इंजन
डी-9 इंजन को भारत में तैयार किया गया है। इसके करीब 90 फीसदी पार्ट्स भारत में बने हैं, जबकि 10 फीसदी भाग में विदेश से सहयोग लिया गया है। इंजन को बनाने में सीमेंस कंपनी ने सहयोग किया है।
कितना शक्तिशाली है इंजन
भारत में बना यह शक्तिशाली इंजन 9000 हॉर्सपावर का है। यह एक बार में 5800 टन तक वजन खींच सकता है, यानि कि यह दो मालगाड़ियों को एक साथ खींचने में सक्षम है। वहीं, डी-9 इंजन की अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रखी गई है।
35 वर्ष तक दे सकते हैं सेवाएं
दाहोद फैक्ट्री में बनाए गए इंजन इतनी मजबूती के साथ बनाए जाएंगे कि यह आगामी 35 वर्षों तक अपनी सेवाएं दे सकते हैं। वहीं, इनके रखरखाव पर भी कम खर्च होगा।
एडवांस डिजिटल ट्रैकिंग से है लैस
भारतीय रेलवे का डी-9 इंजन एडवांस डिजिटल ट्रैकिंग से लैस है। इंजन में ट्रैकिंग सिस्टम के साथ-साथ सुरक्षा के लिहाज से कवच सिस्टम भी दिया गया है, जिससे किसी दुर्घटना की स्थिति में जान-माल का कम से कम नुकसान हो। वहीं, लोकोमोटिव में एसी के साथ-साथ टॉयलेट की भी सुविधा दी गई है।
फैक्ट्री में तैयार होंगे 1200 इंजन
गुजरात के दाहोद में स्थित इस इंजन फैक्ट्री में कुल 1200 इंजन को तैयार किया जाएगा, जिसके बाद रेलवे में माल ढुलाई की क्षमता और बेहतर होगी और एक बार में अधिक माल को लाया और ले जाया जा सकेगा। हालांकि, 1200 इंजन को अगले 10 वर्षों में तैयार किया जाएगा।
क्या है दाहोद फैसिलिटी
दाहोद फैसिलिटी को विशेष रूप से नए इंजनों के लिए तैयार किया गया है। इस फैसिलिटी को बनने में करीब 2 वर्षों का समय लगा है, जिसके बाद अब इसमें इंजनों का निर्माण शुरू हो गया है। नए लोकोमोटिव फैक्ट्री से करीब 10 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
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