भारतीय रेलवे न केवल परिवहन का साधन है, बल्कि यह भारत की विविधता, संस्कृति और विकास का प्रतीक भी है। यह एक ऐसी प्रणाली है, जो हर भारतीय के दिल के करीब है। भारतीय रेलवे को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि यह देश की प्रगति में और अधिक योगदान दे सके।
आपने भारतीय रेलवे के अलग-अलग स्टेशनों के नामों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक रेलवे स्टेशन ऐसा भी है, जिसका इतना बड़ा नाम है कि इसे एक बार में बोलना थोड़ा मुश्किल होता है। कौन-सा है यह रेलवे स्टेशन और कहां पर है स्थित, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत में कुल रेलवे स्टेशन
भारत में कुल रेलवे स्टेशनों की बात करें, तो मार्च 2023 तक रेलवे स्टेशनों की संख्या 7,308 थी। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो वर्तमान में रेलवे स्टेशनों की संख्या 8800 तक पहुंच चुकी है। रेलवे में कुल 12 हजार से अधिक लोकोमोटिव, 80 हजार के करीब यात्री कोच और करीब 3 लाख वैगन हैं। रेलवे में प्रतिदिन 13 हजार से अधिक ट्रेनों का संचालन किया जाता है।
इस रेलवे स्टेशन का नाम है सबसे बड़ा
अब सवाल है कि भारत में ऐसा कौन-सा रेलवे स्टेशन है, जिसका एक बार में नाम लेना भी मुश्किल होता है। आपको बता दें कि तमिलनाडू में स्थित पुराट्ची थलाइवर डॉ. मारुदुर गोपालन रामचंद्रन सेंट्रल रेलवे स्टेशन है। एक बार में इसका नाम याद करना या बोलना थोड़ा मुश्किल है।
पहले इस नाम से जाना जाता था रेलवे स्टेशन
भारत का यह रेलवे स्टेशन पहले मद्रास सेंट्रल रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता था। हालांकि, साल 2019 में इसके नाम में परिवर्तन किया गया और इसका नाम पुराट्ची थलाइवर डॉ. एमजी रामचंद्रन रेलवे स्टेशन कर दिया गया।
कौन थे डॉ एम जी रामचंद्रन
डॉ. मारुदुर गोपालन रामचंद्रन, जिन्हें एम. जी. रामचंद्रन या एमजीआर के नाम से जाना जाता है, भारतीय राजनीति और फिल्म उद्योग से जुड़ी प्रतिभा थे। वे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री, लोकप्रिय अभिनेता, और जनता के चहेते नेता थे।
उनकी लोकप्रियता और जनता के प्रति समर्पण के लिए उन्हें याद किया जाता है। एमजीआर ने अपने करियर की शुरुआत तमिल फिल्मों में की। वे 1936 में फिल्म "सथी लीलावती" से सुर्खियों में आए। उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। साल 1987 में उनका निधन हो गया।
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