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गति से जरुरी दिशा | Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 15

“सफलता की राह पर” सीरीज़ के इस पंद्रहवें वीडियो में मोटिवेशनल स्पीकर और विश्वविख्यात लेखक शिव खेड़ा जी उन तरीकों के बारे में बात कर रहे हैं जिनसे कोई भी व्यक्ति अपने  जीवन में जरूरी और महत्वपूर्ण चीजों के बीच चयन कर सकता है और फिर अपने इस चयन के परिणाम भुगतता है. इसलिए, हमें अपने जीवन में प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए ताकि हम अपने निर्धारित लक्ष्य हासिल करके जीवन में एक सफल व्यक्ति बन सकें.

Jan 14, 2020 18:30 IST
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हम बहुत बार अपने जीवन में परेशान हो जाते हैं और समझ नहीं पाते हैं कि हमारे कौन-कौन से काम महत्वपूर्ण हैं और कौन से तात्कालिक? ऐसे में कई बार हम जब कोई गलत फैसला कर लेते हैं तो हमारे महत्वपूर्ण काम तुरंत तात्कालिक काम बन जाते हैं. इस वीडियो में विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक हमारी सेहत और रोज़ाना के व्यायाम के उदाहरण देकर हमें समझा रहे हैं कि कभी-कभार अपना व्यायाम न करने पर हमारी सेहत नहीं बिगड़ेगी लेकिन अगर हम लंबे समय तक व्यायाम न करें और अपनी सेहत को अनदेखा करें तो फिर कुछ समय के बाद हमें अस्पताल में ईलाज करवाना पड़ सकता है. इसी तरह, जब भी हम अपने जीवन में कोई फैसला लें तो अपने जीवन की दिशा अर्थात अपने लक्ष्य को अपना गाइड बना लें, न कि समय को. आसान शब्दों में, हमें अपने जीवन में अपनी प्राथमिकतायें जरुर निर्धारित करनी चाहिए ताकि हमें मनचाही सफलता मिल सके.

  • सटीक प्राथमिकतायें और सफल जीवन

इस वीडियो के शुरू में विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक शिव खेड़ा जी हमें समझा रहे हैं कि, ‘अगर हम अपनी जिंदगी में सफल होना चाहते हैं तो हमें अपनी प्राथमिकतायें ठीक से चुननी होंगी’. आज के दौर में जितने अधिक समय बचाने वाले उपकरण और साधन हैं, वे पहले दुनिया में कभी नहीं थे. लेकिन फिर भी, आजकल लोगों के पास समय की बड़ी कमी है. इतने ज्यादा समय बचाने वाले साधन होने के बावजूद आजकल लोगों के पास समय नहीं है. ऐसा क्यों हैं? इसके जवाब में शिव खेड़ा जी हमें समझाते हैं कि, ‘ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने अपनी प्राथमिकतायें निर्धारित करने में गड़बड़ कर दी है.’ शिव खेड़ा जी यहां खुद को भी इस बात के लिए दोषी मान रहे हैं और स्वीकार कर रहे हैं कि उनसे भी गलतियां हुई हैं और जब कोई व्यक्ति अपनी प्राथमिकतायें भूल जाता है तो वह तत्काल जरूरी और महत्वपूर्ण चीज़ों में फर्क नहीं कर पाता.

  • तात्कालिक चीज़ों और महत्वपूर्ण चीज़ों के बीच फर्क

शिव खेड़ा जी हमें आगे समझा रहे हैं कि, यह जरुरी नहीं है कि तात्कालिक अर्थात अर्जेंट चीज़ महत्वपूर्ण  भी हो और यह भी जरुरी नहीं है कि महत्वपूर्ण चीज़ अर्जेंट भी हो. लेकिन इसमें खास मज़े की बात यह है कि जब भी हम किसी महत्वपूर्ण चीज़ को नजरंदाज़ करते हैं तो वह चीज़ अर्जेंट बन जाती है जैसेकि, हमारी सेहत महत्वपूर्ण है लेकिन हमारे लिए यह तात्कालिक विषय नहीं है. हमारे लिए रोज़ाना कसरत या व्यायाम करना जरूरी या महत्वपूर्ण है, लेकिन अर्जेंट नहीं है. खेड़ा जी अपनी इस बात के लिए अपनी जिंदगी से हमारे सामने यह उदाहरण रख रहे हैं कि अगर आज शाम को उनकी कोई जरुरी मीटिंग है और वे अपना व्यायाम नहीं कर पाते तो इससे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. लेकिन अगर वे अपनी सेहत और व्यायाम को लंबे समय तक नजरंदाज़ कर दें तो क्या होगा?.....उन्हें अस्पताल में दाखिल होना पड़ेगा. इसलिए, अगर हम अपनी किसी महत्वपूर्ण चीज़ को नजरंदाज़ करेंगे तो वह हमारे लिए हमेशा तात्कालिक विषय में बदल जाती है.  

  • जीवन में रिश्तों की अहमियत

इस वीडियो में आगे शिव खेड़ा जी हमें समझा रहे हैं कि हमारी जिंदगी में रिश्ते काफी अहम या खास होते हैं. ये हमारी जिंदगी में अहमियत रखते हैं, जरुरी हैं पलेकिन ये रिश्ते एक तात्कालिक विषय नहीं हैं. फिर भी, अगर हम अपने इन रिश्तों को लगातार नजरंदाज़ करते रहें तो वह दिन दूर नहीं जब अपने रिश्तों को कायम रखने के लिए हमें किसी वकील के माध्यम से बातचीत करनी पड़ेगी.

  • प्राथमिकतायें भूलने पर पड़ जाता है समय भी कम

अब सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें आगे कह रहे हैं कि जब कोई व्यक्ति अपनी प्राथमिकतायें भूल जाता है तो वह यह कहना शुरू कर देता है कि उसके पास तो समय ही नहीं है. समय तो लगातार आता-जाता रहता है. फिर वे हमसे इस वीडियो में आगे पूछ रहे हैं कि, ‘कितने लोग इस बात से सहमत हैं कि हमारे जीवन में समय लगतार आता और जाता रहता है?. शिव खेड़ा जी हमें आगे कह रहे हैं कि यह जवाब बिलकुल गलत है कि समय लगातार आता और जाता रहता है. वे हमें समझा रहे हैं कि,’समय न कभी आता है और न कभी जाता है, ये हम लोग ही हैं जो लगातार आते और जाते रहते हैं.’ समय तो स्थिर है, वह कहीं जा ही नहीं रहा है. ये तो हम लोग ही हैं जो लगातार आते-जाते रहते हैं और जिस व्यक्ति को समय के महत्व का एहसास नहीं होता है, केवल वही व्यक्ति यह कहता है कि ‘समय तो उड़ रहा है.’ अब सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर हमसे पूछ रहे हैं कि अगर समय उड़ रहा है तो क्या समय हवाईजहाज है?. समय अगर वास्तव में एक हवाईजहाज भी है तो फिर, इसका पायलट कौन है? अगर हम अपनी प्राथमिकतायें पहले से निर्धारित नहीं करते हैं तो हम केवल उस हवाईजहाज के एक यात्री रह जाते हैं और पायलट कोई और व्यक्ति बन जाता है.

  • यात्री और पायलट का शानदार उदाहरण

फिर, शिव खेड़ा जी हमें आगे समझा रहे हैं कि, मान लीजिये हम लोग किसी हवाईजहाज के यात्री हैं और उस हवाईजहाज का पायलट हमें माइक पर कहता है कि, ‘आपको बताने के लिए हमारे पास एक अच्छी खबर है और एक बुरी खबर है. अच्छी खबर यह है कि तेज़ हवाएं हमारे हवाईजहाज से सहयोग कर रही हैं और हम अपनी मंजिल पर एक घंटा पहले पहुंच जायेंगे. यह हम सभी के लिए एक खुशखबरी है. लेकिन बुरी खबर यह है कि हमारा दिशा-सूचक सिस्टम टूट गया है. अब हमें यही मालूम नहीं है कि हम कहां जा रहे हैं?.....तभी कैप्टन आपके पास आकर यह कहता कि आप घबराएं नहीं और यह पैराशूट लेकर नीचे कूद जायें.

  • जंगल में मिलता है एक सेल्समैन

सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी इस वीडियो में अपने हवाईजहाज के यात्री वाले उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए यह कहते हैं कि, ‘जैसे ही आप जंगल के बीच में पैराशूट से उतरते हैं तो रात के नौ बज रहे होते हैं और चारों तरफ काफी खतरा और घना अंधेरा होता है. जंगल के अपने तौर-तरीके और उसूल होते हैं जिनके मुताबिक, ऐसा मान लीजिये कि दस बजे सब खूंखार जानवर शिकार की तलाश में निकलेंगे और आपको अपना निवाला बना लेंगे. उस जंगल से सुरक्षित निकलने का केवल एक ही रास्ता है और वह है कि आप दक्षिणी दिशा की तरफ भागें. लेकिन इतने अंधेरे में उस जंगल में आपको यह कैसे मालूम हो कि दक्षिणी दिशा किस तरफ है? लेकिन ऐसे हालात में अचानक कहीं से एक सेल्समैन वहां पर आ जाता है. ‘कहां से आता है वह?.....यह नहीं मालूम.’

वह सेल्समैन आपसे कहता है कि वह आपको एक घड़ी बेच सकता है. यह घड़ी आपको बताएगी कि आपके पास (रात के दस बजने में) कितना समय शेष बचा है कि जब तक आपको जानवर आकर खा जायेंगे. आप उसकी तरफ ऐसे देखते हैं कि मानो वह आपके साथ कोई खतरनाक मजाक कर रहा हो. लेकिन थोड़ी देर बाद, आपकी शक्ल को देखकर वह सेल्समैन आपसे कहता है कि आप बिलकुल घबरायें नहीं क्योंकि उसके पास आपको बेचने के लिए एक दिशा सूचक यंत्र (कम्पस) भी है. अब, सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमसे पूछते हैं कि ‘ऐसी किसी स्थिति में हम क्या खरीदेंगे?’.....फिर वे हमें आगे समझा रहे हैं कि, ‘इस प्रश्न का जवाब तो बिलकुल स्पष्ट है कि हम केवल कम्पस ही खरीदेंगे, ऐसी खतरनाक स्थिति में घड़ी तो खरीदेंगे नहीं.’

  • उक्त उदाहरण का सारांश

विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी अब हमें अपने इस सशक्त उदाहरण का सारांश कुछ यूं समझा रहे हैं कि, आखिर हम कम्पस ही क्यों खरीदेंगे?.....यकीनन ऐसा इसलिए है क्योंकि हमें यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारी जिंदगी में गति अर्थात रफ्तार से दिशा का महत्व कहीं ज्यादा होता है. इसलिए, जिंदगी में जब भी हमें फैसले लेने हों तो हमें कम्पस अर्थात अपनी दिशा को सामने रखकर सभी फैसले लेने चाहिए, घड़ी को सामने रखकर नहीं. दिशा को अपना गाइड बना लें, घड़ी अर्थात समय को नहीं. तभी हम अपनी जिंदगी में सही फैसले ले सकेंगे और एक कामयाब इंसान बन सकेंगे.

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