एक्सपर्ट स्पीक – नॉन वर्बल कम्युनिकेशन: आपके हाव-भाव बताते हैं बहुत कुछ
हम अपना मैसेज प्रभावी तरीके से भेजने के लिए काफी सचेत हो जाते हैं और यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि हम कॉन्फिडेंट और कॉम्पीटेंट लगें और इस बात की चिंता करते हैं कि हमारी प्रेजेंटेशन के भविष्य में क्या नतीजे निकलेंगे? आपकी बॉडी एक बहुत ही भौतिक या शारीरिक तरीके से बातचीत का जवाब देती है. अपने अगले कुछ कम्युनिकेशन सेशन्स में कुछ सुझावों का सचेत रहकर इस्तेमाल करें. जल्दी ही आप इन नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन टिप्स का इस्तेमाल सहजता से करने लगेंगे और फिर आपको इन गेस्चर्स का इस्तेमाल करते हुए जरूरत से ज्यादा सावधान नहीं रहना पड़ेगा.
| अधिकतर लोग जब अपने दोस्तों या को-वर्कर्स के साथ बातचीत कर रहे होते हैं तो अपने गेस्चर्स या हाव-भावों के बारे में चिंता नहीं करते हैं. लेकिन जब वे लोग अपने कलीग्स या सीनियर्स के सामने बातचीत करते हैं तो वे घबरा जाते हैं और अपने नॉन-वर्बल संकेतों या गेस्चर्स पर बिलकुल ध्यान नहीं देते हैं. हम किस लिए इतने घबरा जाते हैं? कई क्लाइंट्स यह कहते हैं कि, हम अपना मैसेज प्रभावी तरीके से भेजने के लिए काफी सचेत हो जाते हैं और यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि हम कॉन्फिडेंट और कॉम्पीटेंट लगें और इस बात की चिंता करते हैं कि हमारी प्रेजेंटेशन के भविष्य में क्या नतीजे निकलेंगे? क्या मुझे वह मिलेगा जो मुझे चाहिए? क्या मैं बेवकूफ लगूंगा? क्या सब कुछ मेरे इरादे के मुताबिक ही होगा? आपकी बॉडी एक बहुत ही भौतिक या शारीरिक तरीके से बातचीत का जवाब देती है: आपके दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, आपकी सांसें उखड़ने लगती हैं, आपकी टांगें कांपने लगती हैं, आपका मूंह सूखने लगता है और आपकी हथेलियों में पसीना आने लगता है. जब आप नर्वस होते हैं तो आपके हाथ और बाहें आपके सीने से लग जाते हैं. एक टाइट, असहज बॉडी पोजीशन न केवल आपकी रक्षात्मकता और घबराहट जाहिर करती है, बल्कि इससे आपके दर्शक भी असहज और तनाव महसूस करते हैं. ये प्राकृतिक प्रवृत्तियां आत्मविश्वास, काबिलियत और संबद्ध बातचीत के बीच में आ जाती हैं. अतः अपनी इन प्राकृतिक प्रवृत्तियों से मुकाबला करने के लिए आप क्या कर सकते हैं? शुरुआत में, आपकी बाजुओं को एक आधार की जरुरत होती है – एक ऐसी जगह जहां से आप अपनी शुरुआत कर सकें और फिर लौट सकें. अपनी बाजुओं को ऐसे लटकने दें जैसेकि एक टेलर एक नई जैकेट बनाने के लिए आपकी बॉडी का नाप ले रहा है. आप अपने थम्ब्स को अपनी लेग्स के साथ आराम से रख सकते हैं. यह स्थिति काफी अजीब लग सकती है, लेकिन बहुत आरामदायक और कमांडिंग होती है. जब आप किसी सीईओ या राजनेता को इंट्रोडक्शन के लिए प्रतीक्षा करते हुए देखते हैं, तो वे इसी तरह खड़े होते हैं. एक अन्य बेस पोजीशन है अपने दोनों हाथों को अपनी नाभि के लेवल पर जोड़कर रखना. अपने हाथों को बहुत कसकर न दबाएं या अपने हाथों को थोड़ा-सा ऊपर न रखें. इन दोनों तरीकों के कारण आपके कंधे ऊपर उठ जायेंगे और आपके बाजुओं की कोहनियां आपकी बॉडी को टच करने लगेंगी जिससे आप तनाव में लगेंगे. जब आप कोई गेस्चर या इशारा करें तो आपको अपने गेस्चर्स अपनी कमर के लेवल से ऊपर तक ही रखने चाहिए. कल्पना करो कि आप किसी स्विमिंग पूल में कमर तक पानी में डूबे हैं – ऐसी किसी स्थिति में आपके सभी गेस्चर्स पानी के ऊपर ही होने चाहिए. जब आप इस तरीके से कोई गेस्चर या इशारा करते हैं तो आपकी ऑडियंस कम्फ़र्टेबल महसूस करती है क्योंकि वे आपके चेहरे पर अपना ध्यान केंद्रित रख सकते हैं और इसके साथ ही आपके गेस्चर्स भी देख सकते हैं जोकि उनकी नजर के दायरे में आते हैं. अगर आप अपने गेस्चर्स का लेवल काफी नीचे रखते हैं तो ऑडियंस को आपके चेहरे के बजाए आपकी मूवमेंट्स पर ध्यान देना पड़ता है. इससे आपकी ऑडियंस अन कम्फ़र्टेबल महसूस करती है और उनका ध्यान भटक जाता है. इसके अलावा, जब आप कोई गेस्चर करते हैं तो अपनी बाजुओं को अपनी बॉडी से दूर रखें. यह दूरी अक्सर एक 45 डिग्री के कोण तक हो सकती है. इस दूरी से आप अपने गेस्चर्स का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और अपने लिस्नर्स के साथ भी अच्छी तरह कनेक्ट हो सकते हैं. कम्युनिकेशन स्कॉलर्स इस कनेक्शन को “स्पीकर इमीडेसी” कहते हैं. आप तुरंत प्रेजेंट हो जाते हैं और अपनी ऑडियंस के साथ अपना अच्छा संबंध कायम कर लेते हैं. जब गेस्चर्स का मुद्दा उठता है तो कुछ ऐसी आदतें हैं जिनसे हमें अवश्य बचना चाहिए –
इसलिए, आगे बढ़ें और अपने अगले कुछ कम्युनिकेशन सेशन्स में इन सुझावों का सचेत रहकर इस्तेमाल करें. जल्दी ही आप इन नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन टिप्स का इस्तेमाल सहजता से करने लगेंगे और फिर आपको इन गेस्चर्स का इस्तेमाल करते हुए जरूरत से ज्यादा सावधान नहीं रहना पड़ेगा.
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एक्सपर्ट के बारे में:
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Gaurav Kumar is an education industry professional with 10+ years of experience in teaching, aptitude training and test prep. He’s a graduate in Computer Science, postgraduate in Yoga Therapy and has previously worked with organizations like Galgotia College of Engineering and The Manya Group. At jagranjosh.com, he writes and manages content development for School and General Knowledge sections. He can be reached at gaurav.kumar@jagrannewmedia.com
सुश्री पीयूष महाजन एक सर्टिफाइड लाइफ कोच और सॉफ्ट स्किल्स फैसिलिटेटर हैं. उनके पास जियो स्पेशल इंडस्ट्री में काम करने का 11 वर्षों से ज्यादा अनुभव है. यहां इन्होंने सीनियर डाटा स्पेशलिस्ट के तौर पर काम किया है. अपने दिल की आवाज को सुनते हुए, उन्होंने डाटा स्पेशलिस्ट का प्रोमिसिंग करियर छोड़ दिया और लाइफ स्किल्स कोच बनने का फैसला किया.