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ग्रुप डिस्कशन में बेहतर प्रदर्शन के लिए शत-प्रतिशत प्रभावी टिप्स

Mar 21, 2018 17:28 IST
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How to do well in group discussions and leave a positive impression
How to do well in group discussions and leave a positive impression

किसी प्रोफेशनल डिग्री के लिए अपने पसंदीदा कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले आपको एडमिशन की कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं. जैसे कॉलेज का एंट्रेंस एग्जाम देने के बाद आपको ग्रुप डिस्कशन में भाग लेकर उसमें सफल होना पड़ता है.

ग्रुप डिस्कशन (जीडी) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें होस्ट या आयोजक आपको एक टॉपिक देते हैं और हरेक पार्टिसिपेंट को उस टॉपिक पर अपने विचार या राय पेश करने होते हैं. जिस पार्टिसिपेंट को सबसे ज्यादा मार्क्स मिलते हैं, उसे सफल घोषित किया जाता है. खासकर, एमबीए इंस्टिट्यूट्स और पेशेवर कोर्सेज करवाने वाले विभिन्न कॉलेजेज में ग्रुप डिस्कशन चयन प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है. अब, आपके लिए यह बहुत जरुरी है कि आपको विभिन्न प्रकार के ग्रुप डिस्कशन्स की जानकारी हो ताकि आप इन ग्रुप डिस्कशन्स के अनुसार ही अपनी तैयारी कर सकें.

आमतौर पर, अधिकांश इंस्टिट्यूट्स में सबसे ज्यादा उपयुक्त कैंडिडेट के चयन के लिए 2 प्रकार के ग्रुप डिस्कशन्स में से किसी एक जीडी का आयोजन किया जाता है. ये ग्रुप डिस्कशन्स हैं: टॉपिक-आधारित और केस स्टडी पर आधारित ग्रुप डिस्कशन.

पहले हम टॉपिक-आधारित जीडी की चर्चा करते हैं क्योंकि अधिकांश इंस्टिट्यूट्स अपनी चयन प्रक्रिया के लिये इसी जीडी का आयोजन करते हैं.

जानकारी पर आधारित टॉपिक्स

इस किस्म के ग्रुप डिस्कशन में आपको डिबेट में पेश किये गए अपने टॉपिक की बहुत अच्छी जानकारी होनी चाहिए. आप इस किस्म के जीडी में फैक्ट्स और डेटा आदि पेश करके अपना डिस्कशन ज्यादा प्रभावी बना सकते हैं. लेकिन, आप डिबेट में जो जानकारी पेश करें, वह उपयुक्त हो ताकि पैनल के सभी लोग आपके प्वाइंट्स से सहमत हों. इसके अलावा, बोलते समय आप पूरे आत्मविश्वास से अपनी बात पेश करें और अपने लॉजिक के समर्थन में जो प्वाइंट्स आप रखें उनकी पूरी जानकारी आपको होनी चाहिए.

जानकारी पर आधारित टॉपिक्स के तहत आपसे अक्सर "क्या भारत में एमबीए को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है" और “कॉरपोरेट बनाम सरकारी नौकरियां" जैसे टॉपिक्स पूछे जाते हैं.

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अवधारणा/ कांसेप्ट पर आधारित टॉपिक्स

अवधारणा/ कांसेप्ट पर आधारित टॉपिक्स आजकल अक्सर पेश किये जाते हैं क्योंकि अब हरेक इंस्टिट्यूट छात्रों के विश्लेषण और एप्टीट्यूड स्किल्स के साथ ही उनके संपूर्ण ज्ञान की जांच करना चाहता है. इस किस्म के ग्रुप डिस्कशन्स में टॉपिक का चयन उसी समय किया जाता है और बहुत से मामलों में यह टॉपिक काफी अस्पष्ट होता है. ऐसे डिस्कशन्स से पैनलिस्ट्स को छात्रों की सोचने की क्षमता और रचनात्मकता के आधार पर उन्हें जज करने का मौका मिलता है. इसलिये, आपके पास काफी किताबी और सैद्धांतिक ज्ञान होने के साथ-साथ अपने रचनात्मक कौशल द्वारा प्रत्येक स्थिति से निपटने का स्किल भी जरुर होना चाहिए.

उक्त जीडी में छात्रों को डिबेट में "जैसा लगता है, वैसा ही है" और "जीवन एक पहेली है" जैसे टॉपिक दिए जाते हैं. ऐसे टॉपिक्स में फैक्ट्स और डेटा की जरूरत नहीं होती है लेकिन, आपको अपनी कल्पना-शक्ति का बेहतरीन इस्तेमाल करना होता है. इसलिये, ऐसे ग्रुप डिस्कशन में भाग लेने के लिए आप अपने रचनात्मक कौशल को अवश्य निखारें.   

विवाद/ कंट्रोवर्सी पर आधारित टॉपिक्स

अच्छा, अब हम आपको यह बताते हैं कि ऐसे टॉपिक्स जान-बूझकर छात्रों के सामने पेश किये जाते हैं ताकि यह पता चल सके कि छात्र अपना संतुलन खोये बिना कैसे विवादपूर्ण स्थिति से अच्छी तरह निपटते हैं? असल में, इससे यह पता चलता है कि अन्य पार्टिसिपेंट्स द्वारा बनाये गए किसी विवादपूर्ण माहौल में कितनी अच्छी तरह से कोई पार्टिसिपेंट अपने विचार/ राय पेश कर सकता/ सकती है. 

इस ग्रुप डिस्कशन में "शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण" और "जाति व्यवस्था" जैसे टॉपिक्स छात्रों के सामने पेश किये जाते हैं. इसलिये, आप विनम्रता पूर्वक और उपयुक्त तर्कों के साथ ऐसे टॉपिक्स पर अपने प्वाइंट्स पेश करें.  

राय मांगने वाले टॉपिक्स

राय मांगने वाले टॉपिक्स वास्तव में उतने आसान नहीं होते हैं, जितने अपने नाम से लगते हैं. असल में, ऐसे डिस्कशन्स में छत्रों की प्रेजेंटेशन स्किल्स काफी असरदार होनी चाहिए तकि वे अपनी राय से पैनलिस्ट्स को प्रभावित कर सकें. ऐसे टॉपिक्स में छात्रों के नेतृत्व के गुणों पर भी ध्यान दिया जाता है तथा एडमिशन प्रोसेस में नेतृत्व के गुणों से संपन्न छात्रों को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है.

राय मांगने वाले टॉपिक्स के तहत अक्सर "भारत एक विकासशील राष्ट्र के तौर पर" और "हमारे समाज में महिलाओं का प्रभाव" जैसे टॉपिक्स छात्रों के सामने पेश किए जाते हैं.

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केस पर आधारित ग्रुप डिस्कशन

अब, टॉप एमबीए इंस्टिट्यूट्स जैसे आईआईएम और एमआईसीए में केस पर आधारित ग्रुप डिस्कशन का आयोजन किया जाता है. ऐसे ग्रुप डिस्कशन में सभी पार्टिसिपेंट्स के सामने कोई समस्या या स्थिति पेश की जाती है और फिर, छात्रों से उसका समाधान पूछा जाता है. इस ग्रुप डिस्कशन में छात्रों की निर्णय लेने और टीम को हैंडल करने की क्षमताओं की जांच करने के लिए "कर्मचारी और प्रबंधक के बीच चर्चा" जैसे टॉपिक डिबेट के लिए पेश किये जाते हैं.

इसलिये, अपने आस-पास की बातों और घटनाओं से अपडेटेड रहें. ग्रुप डिस्कशन में अच्छे प्रदर्शन के लिए उक्त जानकारी के आधार पर आप खूब बढ़िया तैयारी करें ताकि आप अपने ग्रुप डिस्कशन में सफलता प्राप्त कर सकें. हमारी शुभकामनायें आपके साथ हैं.

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