सच्चाई और ईमानदारी में फर्क | Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 8

Jan 7, 2020, 11:13 IST

“सफलता की राह पर” सीरीज़ के इस आठवें वीडियो में मोटिवेशनल स्पीकर और विश्वविख्यात लेखक शिव खेड़ा बता रहे हैं कि सफलता का राज़ क्या है और हमारे दैनिक जीवन के सटीक उदाहरण देकर वे हमें सच्चाई और ईमानदारी के बीच अंतर के बारे में समझा रहे हैं. शिव खेड़ा जी ने इस वीडियो में सच्चाई और ईमानदारी के माध्यम से सबका विश्वास जीतने पर जोर दिया है ताकि हम अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में सफलता हासिल कर सकें.

विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी इस वीडियो में हमें सच्चाई और ईमानदारी में फर्क के बारे में समझाते हुए कह रहे हैं कि, हमारे जीवन में ईमानदारी एक उसूल या सिद्धांत है जबकि सच बोलना हमारी एक आदत है. इस आर्टिकल में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक शिव खेड़ा जी एक बहुत प्रचलित कहावत ‘भेड़िया आया, भेड़िया आया’ के साथ हमारे दैनिक जीवन से कुछ अन्य उदाहरण देकर हमें अपने जीवन में सच्चाई और ईमानदारी के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतने की प्रेरणा दे रहे हैं ताकि हम एक भरोसेमंद और जिम्मेदार इंसान बनकर अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकें.

  • सच्चाई और ईमानदारी में है यह खास अंतर

शिव खेड़ा जी हमें इस वीडियो के शुरू में सच्चाई और ईमानदारी में बुनियादी फर्क समझा रहे हैं. वे कह रहे हैं कि, ईमानदारी हमारे जीवन का एक उसूल या सिद्धांत है जबकि सच्चाई या सच बोलना हमारी आदत होती है. कोई भी इंसान आदतन सच या झूठ बोलता है. जो इंसान हमेशा झूठ बोलता है, वह अगर पहली बार सच बोले तो पकड़ा जाता है. इसी तरह, जो इंसान हमेशा सच बोलता है, अगर वह किसी वजह से पहली बार अपने जीवन में झूठ बोले तो वह भी तुरंत पकड़ा जाता है.

  • कहावत ‘भेड़िया आया, भेड़िया आया’ और झूठ बोलने के घातक परिणाम

शिव खेड़ा जी हमें आगे कह रहे हैं कि तकरीबन 25 – 30 देशों में वे अपने विभिन्न मोटिवेशनल प्रोग्राम करते हैं और अक्सर हमारे देश में प्रचलित एक पुरानी कहावत भेड़िया आया, भेड़िया आया’ सुनाते हैं जो भारत के अधिकतर लोगों ने अपने बचपन में ही सुनी होगी. उनके मुताबिक, शायद दुनिया की हर मां ने अपने बच्चों को यह कहानी सुनाई होगी. अब यह कहानी कितनी सच्ची है....यह तो भगवान जानें लेकिन, उक्त कहावत से जुड़ी हुई कहानी में जीवन की एक सच्चाई जरुर निहित है. इस कहानी के मुताबिक, एक बार किसी गांव में एक छोटा बच्चा जोर से चिल्लाया, भेड़िया आया, भेड़िया आया’. उसकी आवाज़ सुनकर गांव वाले मदद करने के लिए तुरंत आ गये. वहां पर कोई भेड़िया तो था नहीं, बच्चे ने गांव वालों का मजाक उड़ाया और वे चले गये. अगले दिन फिर बच्चा जोर से चिल्लाया भेड़िया आया, भेड़िया आया’, गांव वाले फिर आये. बच्चे ने दुबारा मजाक उड़ाया और गांव वाले वापिस चले गये. तीसरे दिन, सच में बच्चे के पास भेड़िया आ गया. अब बच्चा फिर बड़े जोर से मदद के लिए चिल्लाया लेकिन इस बार कोई भी उसकी मदद के लिए नहीं आया. शिव खेड़ा जी हमें आगे समझा रहे हैं कि, इस छोटी-सी कहानी का महत्व या निचोड़ यह है कि जब किसी इंसान पर झूठा होने की छाप लग जाए, फिर चाहे वह इंसान सच भी बोले तो भी उसका कोई यकीन नहीं करता क्योंकि उस पर से लोगों का भरोसा खत्म हो जाता है. 

  • भरोसा बड़ा है प्यार से भी: शिव खेड़ा

इस वीडियो में शिव खेड़ा जी हमें आगे समझा रहे हैं कि, अगर हम लोगों से पूछें या फिर किसी भगवा वेश-धारी गुरु से पूछें कि, दुनिया में सबसे महान चीज़ क्या है? तो वे जवाब देंगे .....’प्रीत करो, प्रीत करो’. प्यार सबसे महान वस्तु है. लेकिन यहां शिव खेड़ा जी हमें अपनी सोच के बारे में बता रहे हैं. उनके मुताबिक, भरोसा कई मायने में प्यार से कहीं बड़ा होता है. हमारी जिंदगी में कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें हम प्यार तो करते हैं लेकिन उन पर भरोसा नहीं कर पाते.

  • विश्वास जांचने के लिए एक स्कूल के अध्यापक ने ली छात्र की परीक्षा

अपनी बात को आगे जारी रखते हुए शिव खेड़ा जी इस वीडियो में आगे कह रहे हैं कि, एक बार किसी स्कूल के अध्यापक ने अपनी कक्षा के एक बच्चे को एक बड़ा डिब्बा दिया और कहा, “बेटा यह डिब्बा अपने पिताजी को दे देना और इसे तू नहीं खोलना, इसे सिर्फ आपके पिता ही खोलें.” उस डिब्बे के अंदर कुछ था. बच्चा जब अपने घर वापिस जा रहा था और एक जंगल से गुजर रहा था तो उसने यह महसूस किया कि डिब्बे के अंदर कुछ जोर से हिल रहा है. बच्चे के मन में उत्सुकता जगी कि, ‘देखें इस डिब्बे के अंदर ऐसा क्या है?’ लेकिन उस बच्चे को तुरंत अपने अध्यापक की बात याद आ गई कि, ‘बेटा तू मत खोलना इस डिब्बे को.’ बच्चे ने फिर सोचा कि उसका टीचर तो वहां नहीं है जो उसे डिब्बा खोलते हुए देख ले. बच्चे ने सोचा कि अगर वह यह डिब्बा खोल लेगा तो उसके टीचर को कैसे पता लगेगा? बच्चे के मन की उत्सुकता अधिक थी इसलिए उस बच्चे ने आखिरकार वह डिब्बा खोल ही दिया. डिब्बे के अंदर एक चूहा थो जो डिब्बे से तुरंत निकल कर भाग गया. बच्चा वह चूहा फिर नहीं पकड़ पाया और डिब्बा बंद करके अपने घर पहुंचा. अपने पिता को डिब्बा देकर उस बच्चे ने कहा कि, “पापा यह डिब्बा मुझे टीचर ने देकर यह कहा था कि मैं यह डिब्बा आपको ही दूं और सिर्फ आप ही इस डिब्बे को खोलें...कोई दूसरा नहीं. लेकिन मैंने यह डिब्बा खोला था, इसमें एक चूहा था जो निकलकर भाग गया.” बच्चा फिर अपने पिता से कुछ सवाल करता है कि, “यह कैसा टीचर है जिसे और कोई काम नहीं है और यह सिर्फ चूहे भेजता है पेरेंट्स को?.....और यह स्कूल कैसा है जो ऐसे टीचर रखता है जो पेरेंट्स को चूहे भेजते हैं?.....मैं आपसे भी पूछता हूं कि आप कैसे पिता हो? आपको एक ऐसा ही स्कूल मिला था जहां पर वे ऐसे टीचर रखते हैं चूहे भेजने के लिए? खैर, मैं आपको सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि हमने कुछ खोया नहीं है. एक चूहा ही तो था उस डिब्बे के अंदर.” तब उस बच्चे के पिता ने उसे बड़ा ही सटीक जवाब दिया और कहा कि, “बेटा यह एक इम्तेहान था और तू उसमें फेल हो गया है. तूने चूहा नहीं खोया, तूने अपने टीचर का भरोसा सारी जिंदगी के लिए खो दिया है.” इस तरह, हमारी एक छोटी-सी गलती भी हम पर से लोगों का भरोसा सारी जिंदगी के लिए तोड़ सकती है.  

  • विश्वास जीतने का हमारे जीवन और पेशेवर सफलता हासिल करने में है अत्यधिक महत्व

अब सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी इस वीडियो में हमसे पूछ रहे हैं कि, हम एक डॉक्टर के पास ही क्यों बार-बार अपना ईलाज करवाने के लिए जाते हैं? क्या दुनिया में वही डॉक्टर सबसे अच्छा, पढ़ा-लिखा और काबिल है? हम उस डॉक्टर के पास बार-बार इसलिए जाते हैं क्योंकि हमारे मन में कुछ चीज़ है जो कहती है कि यह डॉक्टर बढ़िया है. यह चीज़ ही वास्तव में उस डॉक्टर के प्रति हमारा भरोसा है. हम 10 मैकेनिकों को छोड़कर 10 मील दूर अपनी गाड़ी रिपेयर करवाने के लिए जाते हैं.....क्यों? क्या वही मैकेनिक दुनिया में सबसे ज्यादा क्वालिफाइड है? लेकिन नहीं......कोई चीज़ है हमारे दिल के अंदर जो यह कहती है कि यह आदमी ठीक है और यही चीज़ है उस मैकेनिक के प्रति हमारा भरोसा.....तो इस तरह एक बार लोगों का भरोसा अर्जित करने के बाद हम अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में एक सफल और जिम्मेदार इंसान बन सकते हैं.  

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Education Desk

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