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भारत के बहादुर IPS Officers की प्रेरणादायक कहानियाँ

यहां भारत के उन शीर्ष पुलिस अधिकारियों की सूची है, जिनके काम और त्याग के तरीके ने लोगों की आंखों में उन्हें मशहूर बनाया। IAS/IPS अधिकारी बनने के रास्ते में IAS उम्मीदवारों के लिए सेवाएं प्रदान करने की उनके अद्वितीय शैली प्रेरणादायक हो सकती है।

 

Nov 23, 2018 10:49 IST
Inspiring Stories of Brave IPS Officers

भारतीय पुलिस की भ्रष्ट प्रथाओं की खबर आए-दिन टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में मिलती है, लेकिन देश में बहुत सारे पुलिस अधिकारी हैं, जिनके समर्पण माफियाओं, राजनेताओं, सिविल सेवकों, सरकारी अधिकारियों के भ्रष्ट प्रथाओं के उन्मूलन के तरीके आदि ने हमें देश की पुलिस प्रणाली पर विश्वास दिलाया है।

1. विनोद कुमार चौबे

Indian Police Service 1998 Batchविनोद कुमार चौबे 1998 बैच के एक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी थे, जो 12 जुलाई 2009 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में मारे गए। चौबे को मौत के बाद मौलिकता वीरता कीर्ती चक्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

छत्तीसगढ़ में काम करते समय, विनोद कुमार चौबे के टीम के दो पुलिस अफसरों की नक्सलियों द्वारा हत्या के बाद उन्होंने अपनी टीम को नक्सलियों पर हो रही जवाबी कार्रवाई मे नेतृत्व किया था। उनकी टीम को बुलेट और ग्रेनेडों से बड़े हीं क्रूरता से मारा गया था। वह खाइयों में अकेले हीं नक्सलियों की तरफ 10 मीटर आगे जाकर फायरिंग करते रहे और आखिर में उन्हें वापस धकेलने में सफल हुए। उनका जीवन-यात्रा यहीं पर समाप्त हो गई और अंत में वह वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन नक्सलियों के साथ इस मुठभेड़ में उन्होंने न केवल अपने साथी पुलिसकर्मियों की ही जान बचाई बल्कि इस मुठभेड़ के बीच फंसे जन-नागरिकों से भरी एक बस को भी बचाया।

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2. मोहन चंद शर्माDelhi Police Special Cell

मोहन चंद शर्मा दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के सुसज्जित अधिकारियों में से एक थे जिन्होंने 2008 में बाटला हाउस में 2008 में दिल्ली हुए विस्फोटों से जुड़े आतंकवादियों के साथ एंकाउन्टर में अपना जीवन गंवा दिया था।

एम सी शर्मा जो नई दिल्ली के जामिया नगर में बटला हाउस एंकाउन्टर में अपनी टीम का नेतृत्व कर रहे थे, जहां 2008 में हुए विस्फोटों से जुड़े आतंकवादियों के छिपने का संदेह था। मुठभेड़ के दौरान, शर्मा को पेट, जांघों और दाहिने हाथ मे गोलियां लगी थीं और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनका देहांत हो गया पर उनका यह एंकाउन्टर पुलिस बहादुरी का एक अच्छा उदाहरण माना जाता है। उनकी बहादुरी के लिए उनको 2009 में अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।

3. हेमंत करकरे

Former ATS Chiefहेमंत करकरे मुंबई एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) के प्रमुख थे जिन्होंने 26 नवंबर 2008 को अजमल कसाब और उसके साथी आतंकवादियों को खिलाफ अपनी जवाबी मुहीम के लिए उस खतरनाक रात मे शिवाजी टर्मिनस की तरफ दौड़ पड़े थे।

AK-47 और ग्रेनेड जैसे खतरनाक सशस्त्र से लैस आतंकवादी गोलीबारी कर रहे थे लेकिन करकरे ने कसाब और उसके साथी आतंकवादियों को रोकने सिर्फ एक हेलमेट और बुलेटप्रूफ जैकेट पहन कर कार्रवाई में कूद गए थे। उसी मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी। 26 जनवरी 2009 को उनकी बहादुरी के लिए उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।

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4. अशोक कामटेFormer Additional Commissioner Mumbai

26/11 के मुंबई हमले के समय; अशोक कामटे पूर्वी क्षेत्र की देखरेख में मुंबई पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त पद पर कार्यरत थे। 26/11 के उस भयानक रात में कामटे एकमात्र अधिकारी थे जिन्होंने सफलतापूर्वक अजमल कसाब के हाथ पर गोली मारी थी लेकिन उसी रात आतंकवादियों की गोलियों ने उनकी जान ले ली।

कामटे और अन्य बहादुर अधिकारियों के साथ विजय साल्स्कर और हेमंत करकरे की 26/11 की उसी रात आतंकवादियों द्वारा गोली मार दी गई थी। 26 जनवरी 2009 को कामटे की बहादुरी के लिए को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।

5. विजय साल्स्कर

Former Encounter Specialistविजय सालस्कर को मुंबई पुलिस के सबसे खतरनाक एंकाउन्टर स्पेशलिस्ट में से एक माना जाता था। 26/11 के मुंबई हमले की रात में साल्स्कर कामटे और करकरे के साथ थे जब उन्होंने आतंकवादियों पर जवाबी कार्रवाई की थी लेकिन सालेस्कर भी हमले के शिकार हो गए थे। उनकी बहादुरी एंव देशभक्ति उन युवाऔं के लिए एक प्रेरणा है जो अपने देश के लिए मरने को तैयार हैं। 26 जनवरी 2009 को उन्हें भी अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।

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6. के प्रसाद बाबूGreyhounds special operations group

लीला वेंकट श्रीहरि नागा वरप्रसाद बाबू आंध्र प्रदेश पुलिस के ग्रेहाउंड स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप से संबंधित एक भारतीय पुलिस अधिकारी थे।

16 अप्रैल 2013 को 70 माओवादियों के एक समूह को घेर कर ग्रेहाउंड यूनिट पर हमला कर दिया। प्रसाद बाबू ने पुलिसकर्मियों के प्रतिपक्ष टीम का नेतृत्व करते हुए दो मुख्य नक्सल हमलावरों की हत्या एंव दो नक्सलियों को घायल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

घटना-स्थल से पुलिसकर्मियों को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित जगह ले जाया जा रहा था लेकिन तभी करीब 100 माओवादियों ने हेलीकॉप्टर पर भी हमला शुरू कर दिया था। हेलिकॉप्टर ने पहले ही 5 उड़ानों को अंजाम दिया था और केवल 19 पुलिसकर्मियों को बाहर निकालना रह गया था लेकिन उनमें से 14 हेलीकॉप्टर में चढ़े थे जबकि बाबू सहित 5 कवर प्रदान कर रहे थे। अंत मे माओवादियों से लड़ते-लड़ते बाबू की मौत हो गई।

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7. अजित कुमार डोवाल

National Security Advisorअजीत कुमार डोवाल एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में भारत के प्रधान मंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। अपनी सेवाओं के दौरान, उन्होंने 7 वर्षों के लिए पाकिस्तान में एक अंडरकवर एजेंट के रूप में अपनी सेवा दीं और यहां तक कि 1980 के दशक में स्वर्ण मंदिर की घेराबंदी के दौरान एक आईएसआई एजेंट के रूप में प्रच्छन्न और भारतीय सेना को रणनीतिक रूप से सहायता प्रदान की।

वह पहले आईबी के आपरेश्नल विंग के प्रमुख के रूप में एक दशक तक सेवा देने के बाद 2004-05 में खुफिया ब्यूरो (आईबी) के निदेशक के रूप में कार्यरत थे।

8. शिवदीप वामन लांडेIPS 2006-Batch

शिवदीप वामन लांडे जो कि 'दबंग' पुलिस अधिकारी के रूप में लोकप्रिय हैं, वह 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत महाराष्ट्र राज्य मे हस्तांतरित कर दिये गए हैं। इससे पहले उन्होंने बिहार के अररिया, पूर्णिया और मुंगेर जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।

लांडे बदमाशों, अपराधियों, नकली कॉस्मेटिक विक्रेताओं, दवा माफियों से लोहा लेने के बाद काफी लोकप्रिय हो गये। लांडे ईव-टीज़िंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के पश्चात युवा लड़कियों के नज़र में एक नायक बन गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक वह अपने 60% वेतन को एक सामाजिक संगठन में दान करते हैं जो गरीब छात्राऔं की शादी करने और उनके लिए छात्रावास की व्यवस्था करता है।

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