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UP Board Class 10 Mathematics Notes : Rational Expressions (Chapter First), Part-I

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May 19, 2017 17:39 IST
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first derivation for rational expressions

second derivation for rational num

third derivation for rational num

fourth derivation for rational num

हम देखते है कि ऊपर दिये गये गुधाधर्मों में पूर्णांकों के गुणधर्म तथा बहुपदों के संगत गुणधर्म बिल्कुल समान हैं। अत: हम यह कह सकते है कि बहुपद भी 'पूर्णांकों की तरह व्यवहार' करते हैं। अत: अब हम संख्याओं की बीजगणित से सम्बन्धित संकल्पनाओं को बहुपदों की बीजगणित से सम्बन्धित संकल्पनाओं में लागू करने का प्रयास कर सकते हैं।
यदि m और n नही है समान 0 पूर्णांक हों, तो यह आवश्यक नहीं है कि m/n भी पूर्णाक को। अत: हमें अपनी संख्या प्रणाली को विस्तृत करना पड़ा था और उसमें परिमेय संख्याओं की संकल्पना का समावेश करना पड़ा था। हम परिमेय संख्या की परिभाषा दो पूर्णाकों m और n  जहाँ n0 के भागफल m/n के रूप देते हैं। इसी प्रकार यदि p(x) और q(x) दो बहुपद हों [q(x) शून्येतर बहुपद है ] तो यह आवश्यक नहीं है कि p(x)/q(x) भी एक बहुपद हो। अत: हमें परिमेय व्यंजक (rational expression) की संकल्पना का समावेश करना होता है।
परिमेय व्यंजक को परिभाषा : हम परिमेय व्यंजक की परिभाषा दो बहुपदों p(x) और q(x), जहाँ q(x) शून्य बहुपद नहीं है, के भागफल p(x)/q(x) रूप में देते हैं।
परिमेय व्यंजक p(x)/q(x) p(x) को अंश और q(x) को हर कहते है।
हम जानते हैं कि प्रत्येक पूर्णांक m को भी एक परिमेय संख्या माना जा सकता है, क्योंकि हम m को m/1 के रूप में लिख सकते हैं। इसी प्रकार प्रत्येक बहुपद p(x) को एक परिमेय व्यंजक माना जा सकता है, क्योंकि हम p(x) को p(x)/1 के रूप में लिख सकते है। उदाहरणार्थ,

chapter first rational num

UP Board Class 10 Mathematics Notes : Quadratic Equations (Chapter Third)

2. निम्नलिखित व्यंजकों में से कौन-कौन से व्यंजक परिमेय व्यंजक हैं ?

question for practice

some short questions for practice

4. एक परिमेय व्यंजक लिखिए जिसका अंश एक रैखिक बहुपद हो और हर एक द्विघात बहुपद हो ।
5. एक परिमेय व्यंजक लिखिए जिसका अंश एक एकपदीय हो और हर एक द्विपदीय (Binomial) हो ।
6. एक ऐसा परिमेय व्यंजक लिखिए जिसका अंश 3 तथा 1/2 द्धगूव्यों वाला द्विधात यगुपद है तथा जिसका हर – 3 / 4 तथा 4 मूलों वाला द्विघात बहुपद है ।
7. एक परिमेय व्यंजक लिखिए जिसमें अंश एक द्विघात बहुपद जिसके शून्य 1 और … 1 हैं तथा हर एक त्रिघात बहुपद है, जिसके शून्य 2, 3 तथा 4 हैं ।

UP Board Class 10 Science Notes : Sulphur dioxide and Ammonia gases

पूर्णांकों (Integers)

बहुपद (Polynomails)

(i) योग का संवृत गुण (Closure Porperty of Addition) : दो पूर्णांकों का योग एक पूर्णांक होता है|

अर्थात्

                Jagranjosha, b JagranjoshJagranjoshJagranjosha + b Jagranjosh.

(ii) योग का क्रमविनिमेय नियम (Commutative Law of Addition):

               Jagranjosh 

Jagranjosh        a + b = b + a.

(iii) योग साहचर्य नियम (Associative Law of Addition):

                  Jagranjosh 

Jagranjosh          (a + b) + c = a + (b + c).

(iv) योग का तत्समक अवयव (Additive Identity): पूर्णांक शून्य ‘0’ ऐसा पूर्णांक है कि किसी भी पूर्णांक ‘a’ के लिए

          a + 0 = a = 0 + a

पूर्णांकों ‘0’ के योग को तत्समक अवयव कहते हैं|

(v) योज्य प्रतिलोम (Additive Inverse): किसी भी पूर्णांक ‘a’ के संगत एक ऐसा पूर्णांक ‘- a’ होता है जिससे कि

          a + (- a) = 0 = (- a) + a

पूर्णांक (-a) को पूर्णांक ‘a’ का योज्य प्रतिलोम कहते हैं|

(vi) गुणा का संवृत गुणा (Closure Porperty of Multiplication) : किन्हीं भी दो पूर्णांकों का गुणनफल एक पूर्णांक होता हैं|

            Jagranjosh 

(vii) गुणा का क्रमविनिमेय नियम (Commutative Law of Multiplication):

           Jagranjosh 

(viii) गुणा का साहचर्य नियम (Associative Law of Multiplication):

         Jagranjosh(a.b).c = a.(b.c).

(ix) वितरणात्मक गुण (Distributive Law) :

          Jagranjosh 

Jagranjosh   a(b + c) = (a.b) + (a.c)

या       (a + b).c = (a.c) + (b.c).

(x) गुणा का तत्समक अवयव (Multiplicative Identity):  पूर्णांक ‘1’ ऐसा होता है कि किसी पूर्णांक ‘a’ के लिए

                   a X 1 = a 1 X a

पूर्णांक ‘1’ को गुणा का तत्समक अवयव कहते हैं|

(i) योग का संवृत गुण (Closure Property ऑफ Addition) : दो बहुपदों का योग एक बहुपद होता है| अर्थात्

Jagranjosh 

ii) योग का क्रमविनिमेय नियम (Commutative Law of Addition):

               Jagranjosh 

Jagranjosh        p(x) + q(x) = q(x) + p(x).

(iii) योग साहचर्य नियम (Associative Law of Addition):

      Jagranjosh 

Jagranjosh    [p(x) + q(x)] + r(x) = p(x) + [q(x) + r(x)].

(iv) योग का तत्समक अवयव (Additive Identity): शून्य बहुपद ‘0’ ऐसा होता है कि किसी भी बहुपद p(x) के लिए

           p(x) + 0 = p(x) = 0 + p(x)

शून्य बहुपद ‘0’ के योग को तत्समक अवयव कहते हैं|

(v) योज्य प्रतिलोम (Additive Inverse): किसी भी बहुपद p(x) के संगत एक ऐसा बहुपद [-p(x)] होता है जिससे कि

               p(x) + [-p(x)] = 0 = [ -p(x)] + p(x)

बहुपद [-p(x)] को p(x) का योज्य प्रतिलोम कहते हैं|

(vi) गुणा का संवृत गुणा (Closure Porperty of Multiplication) : किन्हीं भी दो बहुपदों का गुणनफल एक बहुपद होता हैं|

                 Jagranjosh 

Jagranjosh 

(vii) गुणा का क्रमविनिमेय नियम (Commutative Law of Multiplication):

                  Jagranjosh

 Jagranjosh       p(x).q(x) = q(x).p(x).

(viii) गुणा का साहचर्य नियम (Associative Law of Multiplication):

            Jagranjosh 

Jagranjosh [p(x).q(x)] r(x) = p(x).r(x)].

(ix) वितरणात्मक गुण (Distributive Law) :

             Jagranjosh 

Jagranjoshp(x) [q(x) + r(x)] = p(x).q(x) + p(x).r(x)

या    [p(x)+q(x)]. r(x)] = p(x).r(x) + q(x).r(x).

(x) गुणा का तत्समक अवयव (Multiplicative Identity):  अचर बहुपद ‘1’ ऐसा होता है कि किसी बहुपद p(x) के लिए

       p(x).1 = p(x) = 1.p(x)

बहुपद ‘1’ को गुणा का तत्समक अवयव कहते हैं|

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