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भारत में स्टार्ट–अप कंपनियां और उनका भविष्य

तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग और निजी उपभोग व्यय के साथ भारत  सबसे तेजी से बढ़ने वाला और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट–अप इको सिस्टम बन गया है.

Jan 2, 2016 09:07 IST
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भारत 1.2 अरब लोगों का घर है. तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग और निजी उपभोग व्यय के साथ यह सबसे तेजी से बढ़ने वाला और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट– अप इको सिस्टम बन गया है. अनुमान के अनुसार साल 2014 के 3100 स्टार्टअप्स की तुलना में साल 2020 तक 11500 स्टार्टअप होंगे.यह निश्चित रूप से एक क्रांति है. यह भारत में आज की तारीख में काम कर रहे बाजार के तरीके को बदलने जा रहा है.

स्टार्टअप्स का विकास

युवा एवं विविध उद्यमियों द्वारा संचालित भारतीय स्टार्टअप इको सिस्टम तेजी से विकास कर रहा है. इसका समर्थन करने वाले अन्य महत्वपूर्ण कारक हैं वित्त पोषण, समेकन गतिविधियां, उभरती हुईं प्रौद्योगिकियां और तेजी से बढ़ता घरेलू बाजार. कई सारे स्टार्ट– अप्स ने बाजार में बिल्कुल नए बाजार के माध्यम से या मौजूदा बाजारों या उत्पाद लाइनों में मौजूद खाईयों के माध्यम से प्रवेश किया है.

वित्त पोषण

साल 2010 और 2014 के बीच, वीसी और पीई में 13 मिलियन डॉलर से 1818 मिलियन डॉलर तक बढ़ोतरी हुई है. एंजेल निवेश में भी 8 गुना बढ़ोतरी हुई और यह 4.2 मिलियन डॉलर से बढ़कर 32.2 मिलियन डॉलर का हो गया. उदाहरण के लिए हाउसिंग डॉट कॉम (housing.com) ने 2014 में जापान के दूरसंचार और इंटरनेट दिग्गज सॉफ्टबैंक से 90 मिलियन डॉलर की राशि जुटाई. ओला ( Ola) ने अप्रैल 2015 में डीएसटी ग्लोबल के नेतृत्व में 400 मिलियन डॉलर जुटाने की घोषणा की थी.
भारतीय स्टेट बैंक के साथ भागीदारी में "ओला प्रगति" के माध्यम से चालक अब रोजाना ऋण पुनर्भुतान और अपनी पसंद की कार खरीदने के लिए कम डाउनपेमेंट की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं.
इसके अलावा न्यूयॉर्क की टीजीएम, रूस की डीएसटी ग्लोबल और जापान की सॉफ्टबैंक आदि जैसे विदेशी निवेशकों ने भारत को बहुत आवश्यक पूंजी दिया है. इसके लिए मुख्य रूप से उभोक्ता विकास और मोबाइल क्रांति को जिम्मेदार बताया गया है.
जब बात उन शहरों की आती है जहां वित्त पोषित स्टार्टअप्स स्थापित थे, सूची में बैंगलोर पहले स्थान पर था. इसके बाद दिल्ली और मुंबई का स्थान है .

समेकन गतिविधियां

भारतीय स्टार्ट–अप्स के एम एंड ए में बढ़ोतरी के मुख्य कारण हैं प्रौद्योगिकी का अधिग्रहण, बाजार समेकन और उपभोक्ता अधिग्रहण. पिछले 3 वर्षों में 1 बिलियन डॉलर के 20 से भी अधिक एमएंडए ने अपनी जगह बनाई है.
साल 2014 में 43 स्टार्ट– अप्स का अधिग्रहण किया गया था. साल 2015 में यह संख्या 41 थी. उदाहरण हैं–  हाउसिंग डॉट कॉम (housing.com) ने रिएलिटी बीएल, प्रैक्टो का अधिग्रहण किया, एशिया का सबसे बड़ा डॉक्टर सर्च इंजन ने फीथो ( डिजिटल फिटनेस सॉल्यूशन) का अधिग्रहण किया, स्नैपडील ने फ्रीचार्ज का अधिग्रहण किया ताकि भारत का सबसे प्रभावशाली डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम बना सके.
साल 2015 के शुरुआती दिनों में ट्विटर ने– मिस कॉल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म जिपडायल का अधिग्रहण किया था. भारत जैसे देश में जहां पश्चिमी  देशों की तुलना में आज भी इंटरनेट की पहुंच बहुत कम है, ट्विटर की योजना एसएमएस के जरिए इंटरनेट का उपयोग नहीं करने वाले उपयोगकर्ताओं तक सामग्री पहुंचाना है.

घरेलू बाजार

ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं के ईकॉमर्स सेवाओं के तेजी से सक्रिए उपभोक्ता बनने के साथ विभिन्न स्टार्ट– अप्स बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सामने आए हैं. उदाहरण के लिए पेटीएम ( Paytm)– इसने 80 करोड़ मोबाइल पर्स और 15 लाख ऑर्डर प्रति माह से अधिक के साथ भारत के मोबाइल कॉमर्स में क्रांति ला दी है. अन्य उदाहरण रेडबस ( redbus) हो सकता है जिसका अब आईबीआईबीओ समूह (ibibo) ने अधिग्रहण कर लिया है, उपभोक्ताओं को बस की टिकटें ऑनलाइन बुक करने की सुविधा प्रदान की है.

सरकार के प्रयास

• जैसा की बजट 2015-16 में कल्पना की गई है, केंद्र सरकार ने देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए सिडबी के अधीन 2000 करोड़ रुपयों के प्रारंभिक पूंजी के साथ इंडिया एस्पिरेशन फंड (भारत महत्वाकांक्षा कोष– आईएएफ) की घोषणा की थी.

. एक नई योजना जिसे सिडबी मेक इन इंडिया लोन फॉर स्मॉल इंटरप्राइजेज (एसएमआईएलई) कहते हैं, की शुरुआत 10,000 करोड़ रुपयों के साथ की गई. ऋण योजना में फोकस केंद्र सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत 25 क्षेत्रों पर होगा. इसमें एमएसएमई क्षेत्र में आने वाले छोटे उद्यमों के वित्त पोषण पर जोर दिया जाएगा.
• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में नई पहल – स्टार्ट– अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया की घोषणा की थी. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को विनिर्माण क्षेत्र के लिए विकास, रोजगार के अवसर और समग्र अर्थव्यवस्था के विकास का साधन बनाना है. इस पहल के साथ स्टार्टअप्स को भारत के उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा देने हेतु कर में छूट, उष्मायन केंद्र और आसानी से मंजूरी मिल सकती है.
• इसके अलावा बाजार नियामक सेबी ने 'वैकल्पिक पूंजी उगाही मंच' की घोषणा की है,जो ऐसी कंपनियों को संस्थानों और पूंजी बाजार के उच्च निवल मूल्य वाले लोगों से पैसे जुटाने की अनुमति देगा. सेबी के अनुसार साल 2014 में देश में वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी के तौर पर 15 बिलियन डॉलर आए और साल 2013 में यह आकंडा 13 बिलियन डॉलर रहा.
• नैसकॉम '10000 स्टार्टअप्स' के महत्वाकांक्षी पहल के साथ आया है जिसका उद्देश्य भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम में दस गुना बढ़ोतरी करना है. इस कार्यक्रम को माइक्रोसॉफ्ट, गुगल, इंटेल, वेरिसाइन और कोटक समर्थन दे रहे हैं. 10000 स्टार्टअप्स का उद्देश्य आगामी दस वर्षों में भारत में 10000 स्टार्टअप्स के लिए उष्मायन, वित्त पोषण और समर्थन जुटाना है.

स्टार्टअप्स का भाविष्य

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम आज काफी लंबा सफर तय कर चुका है. 73 फीसदी से अधिक स्टार्टअप के संस्थापक 36 वर्ष से कम आयु वर्ग के हैं और देश का प्रतिनिधित्व करने वाली युवा आबादी का स्टार्टअप के क्षेत्र में दबदबा है. इसने लाखों लोगों के लिए रोजगार के बहुत अवसर प्रदान किए हैं.
नवाचार अर्थव्यवस्था में महिला उद्यमी अधिक सक्रिय और प्रमुख होती जा रही हैं. भारत के साथ– साथ विदेशों में निवेशकों ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में विश्वास दिखाया है. हालांकि वित्त पोषण, व्यापार करने के लिए अनुकूल सरकारी नीतियां, कर प्रोत्साहन आदि जैस कुछ मामले हैं जो अभी भी स्टार्टअप इकोसिस्टम की सफलता की राह में बाधा बन रहे हैं.

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