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अंग्रेज़ों के शासन के दौरान गैर-आदिवासी, आदिवासी और किसान आंदोलनों की सूची

अंग्रेज भारत में व्यापर करने के लिए आये थे परन्तु यहाँ की राजनैतिक फूट की वजह से वो शासक बन गए और यहाँ की प्रशासनिक, कानूनी और सामाजिक ढांचा ही बदल कर रख दी | इस नए स्वरूप से स्थानीय लोगों के गौरव को चोट पहुंची और क्रांतिकारियों के विद्रोह ने अपनी मातृभूमि से अंग्रेजी नियमों को निष्कासित करवा दिया| इस आर्टिकल में  अंग्रेजी शासकों के दौरान गैर आदिवासी, आदिवासी और किसान आंदोलनों की सूची है जो यूपीएससी, एसएससी, स्टेट सर्विसेज, सीडीएस, NDA, रेलवेज जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों की मदद करेगी|
Jul 14, 2016 09:56 IST
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अंग्रेज भारत में व्यापर करने के लिए आये थे परन्तु यहाँ की राजनैतिक फूट की वजह से वो शासक बन गए और यहाँ की प्रशासनिक, कानूनी और सामाजिक ढांचा ही बदल कर रख दी | इस नए स्वरूप से स्थानीय लोगों के गौरव को चोट पहुंची और क्रांतिकारियों के विद्रोह ने अपनी मातृभूमि से अंग्रेजी नियमों को निष्कासित करवा दिया| इस आर्टिकल में  अंग्रेजी शासकों के दौरान गैर आदिवासी, आदिवासी और किसान आंदोलनों की सूची है जो यूपीएससी, एसएससी, स्टेट सर्विसेज, सीडीएस, NDA, रेलवेज जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों की मदद करेगी|

Jagranjosh

अंग्रेज़ों के शासन के दौरान गैर आदिवासी, आदिवासी और किसान आंदोलनों की सूची

आंदोलनों के नाम

प्रभावित क्षेत्र

साल

नेता

प्रमुख पाठ्यक्रम

आंदोलन का दौर और उसके नतीजे

सन्यासी विद्रोह

बंगाल

1763-1800

 

विस्‍थापित किसान, बिखरी हुई सेना, जुझारू जमींदार, सन्‍यासियों के नेतृत्‍व में भागीदारी

यह आंदोलन बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा लिखे उपन्यास आनंदमठ

से प्रसिद्ध हो गया.  

कट्टमबम्‍मन

की बगावत

तिरुनेलवेली, तमिलनाडु

1792-99

वीरपांड्या कट्टमबम्‍मन (पञ्चलकुरीची का शासक)

अंग्रेज़ों के प्रयास से कट्टमबम्‍मन को बल से उसके प्रतिशोध को रोकना और  उनके अधिपति के शासन को स्वीकार करना

7 साल के लिए कट्टमबम्‍मन द्वारा ब्रिटिश की अवज्ञा; अंग्रेजों द्वारा अंतिम कब्जा और निष्पादन (1779); ब्रिटिश से अपने क्षेत्र का कब्‍जा (1779).

पैक्स के बागी

उड़ीसा

1804-06

पहले खुदरा के राजा का शासन रहा, बाद में जगबंधु का

अंग्रेज़ों का उड़ीसा पर कब्ज़ा (1803); पैक्स की नाराज़गी (एक मिलिशिया वर्ग द्वारा जमींदार की किराया मुक्त भूमि पर कब्जा) अंग्रेज़ों के भूमि और भूमि के राजस्व नीतियों के विरूद्ध

एक विद्रोह को संगठित करने के लिए खुर्द के राजा का पैक्‍स की मदद से असफल प्रयास, और अंग्रेजों द्वारा अपने क्षेत्र की जब्ती (1804) पैक्‍स के बीच 1804 और 1806 के बीच निरंतर अशांति; ब्रिटिश बल को हराने के बाद जगबंधू के तहत पुरी पर कब्‍जा और पैक्‍स का उदय (1807); बल और बातचीत के जरिए समाधान के उपायों द्वारा आंदोलन अंग्रेजों द्वारा की अंतिम दमन.

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