Search

तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-1966)

तृतीय पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य कृषि मे वृद्धि के साथ गेहूँ के उत्पादन में वृद्धि करना था.
Aug 6, 2014 17:50 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon

संक्षिप्त विवरण

- तृतीय पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य कृषि मे वृद्धि के साथ गेहूँ के उत्पादन में वृद्धि करना था किंतु 1962 में हुए भारत- चीन युद्ध ने अर्थव्यवस्था में कमी ला दी तथा सारा ध्यान रक्षा क्षेत्र में लगा दिया.
- 31 मई व 1 जून 1961 को आर्थिक विकास परिषद ने इस तृतीय योजना को अपनी मंज़ूरी प्रदान की थी.

तृतीय पंचवर्षीय योजना की परिभाषा

इस तृतीय योजना का लक्ष्य व्यवस्था के प्रथम चरण में ऐसे कार्य थे जो की अगले 15 वर्ष या उससे ज़्यादा तक चलने वाले हों. इस काल में भारतीय अर्थव्यवस्था को ना सिर्फ़ तेज़ी से वृद्धि करना था बल्कि उसे स्वतंत्र व स्वनिर्मित बनने के साथ ही सामंजस्य भी बनाना भी था. इस दूर दृष्टि के कार्यक्रम की माँग थी देश के संसाधनों में वृद्धि, तकनीकी उन्नति के साथ ही सामाजिक संरचना मे कृषि में परिवर्तन तथा इन सभी को क्षेत्रीय व राष्ट्रीय विकास में संलग्नता.

विचार

तृतीय योजना का लक्ष्य संविधान के सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति करना तथा उसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की पहुँच में बनाना था. इसे प्रथम व द्वितीय योजनाओं की सफलता व असफलता से सीख  लेते हुए आगे बढ़ना था तथा ऐसे लक्ष्य निर्धारित करने थे जिसे की आगामी 15 वर्ष मे प्राप्त कर विकास किया जा सके.

उत्पत्ति

ज़मीनी रूप से कार्य करते हुए तृतीय योजना की शुरुआत 1958 में हुई जिसके मुख्य्तया 3 चरण थे. प्रारंभिक चरण में इसमे जुलाई 1960 में इसके ड्राफ्ट रूपरेखा के साथ  ही केंद्र व राज्य के सामूहिक कार्य के लिए प्रयास किए गये. इसके प्रारूप प्रस्ताव को अगस्त 1960 में संसद द्वारा स्वीकृति दी गयी. अंततः 31 मई व 1 जून को राष्ट्रीय विकास परिषद ने इसे स्वीकृति दी तथा तृतीय पंचवर्षीय योजना प्रारंभ हुई.

उपलब्धि

- ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यालयों की स्थापना की गयी.
- लोकतंत्र को सही अर्थ में त्रीन मूल स्तर तक पहुँचाते हुए इस काल मे ही पंचायत चुनाव की शुरुआत हुई तथा राज्यों के उत्तरदायित्व में वृद्धि की गयी.
-  राज्य विद्युत बोर्ड तथा राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की स्थापना हुई.
-  माध्यमिक व उच्च शिक्षा के लिए राज्यों को उत्तरदायी बनाया गया.

तृतीय योजना का उपागम

- राष्ट्रीय आय को प्रति वर्ष 5 प्रतिशत की दर से बढ़ाना, निवेश के क्षेत्र में भी इस दर को अन्य योजनाओं के साथ बनाए रखना.
- खाद्यान के क्षेत्र में स्वावलंबी बनना, तथा उद्योगो की माँगों को पूरा करने के लिए कृषि उत्पादन में वृद्धि करना.
- मूलभूत उद्योगों को बढ़ावा देना जैसे रसायन उद्योग, स्टील, ऊर्जा व ईंधन के साथ मशीन निर्माण उद्योग को बढ़ाना जिससे की उद्योगो के क्षेत्र के लक्ष्य को आगामी 10 वर्ष में पूरा किया जा सके.
- मानव संसाधन का अधिकतम सीमा तक उपयोग किया जा सके, तथा इसके साथ ही सेवा मे वृद्धि की गारंटी भी दी जा सके.