क्या आपने कभी सोचा है क्यों किसी उत्पाद के साथ किसी विशिष्ट क्षेत्र का नाम क्यों लिखा जाता है.. जैसे कि कांचीपुरम की रेशमी साड़ी, अल्फांसो मैंगो, नागपुर ऑरेंज, कोल्हापुरी चप्पल, बीकानेरी भुजिया, आगरा का पेठा, मुजफ्फरपूरी लीची, बंगाली रोसोगुल्ला आदि। हम आपको बताते हैं इसका कारण...ऐसे इसलिए होता है क्योंकि इन उत्पादित वस्तुओं की विशेष गुणवत्ता या प्रतिष्ठा या अन्य विशेषताओं की मानकता किसी खास विशिष्ट क्षेत्र के नाम से संदर्भित की जाती है जिसको भौगोलिक चिन्ह या संकेत (जीआई) टैग के नाम से जाना जाना है।
भौगोलिक चिन्ह (जीआई) क्या है?
भौगोलिक चिन्ह या संकेत (जीआई) का शाब्दिक अर्थ है एक ऐसा चिन्ह, जो वस्तुओं की पहचान, जैसे कृषि उत्पाद, प्राकृतिक वस्तुएं या विनिर्मित वस्तुएं, एक देश के राज्य क्षेत्र में उत्पन्न होने के आधार पर करता है, जहां उक्त वस्तुओं की दी गई गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या अन्य कोई विशेषताएं इसके भौगोलिक उद्भव में अनिवार्यत: योगदान देती हैं। यह दो प्रकार के होते हैं- (1) पहले प्रकार में वे भौगोलिक नाम हैं जो उत्पाद के उद्भव के स्थान का नाम बताते हैं जैसे शैम्पेन, दार्जीलिंग आदि। (2) दूसरे हैं गैर-भौगोलिक पारम्परिक नाम, जो यह बताते हैं कि एक उत्पाद किसी एक क्षेत्र विशेष से संबद्ध है जैसे अल्फांसो, बासमती, रोसोगुल्ला आदि।
भौगोलिक चिन्ह (संकेत) के लिए शासकीय निकाय
1. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर: भौगोलिक चिन्ह या संकेत (जीआई) विश्व व्यापार संगठन के समझौते व्यापार से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकारों (ट्रिप्स) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। औद्योगिक संपत्ति के संरक्षण के लिए पेरिस कन्वेंशन के आर्टिकल 1 (2) और 10 के तहत भौगोलिक चिन्ह (संकेत) आईपीआर के एक तत्व के रूप में शामिल किए गए हैं। Agreement on the Trade related aspect of intellectual property rights (TRIPS) या ट्रिप्स के आर्टिकल 22 से 24 में भी इसका प्रावधान है जो उरुग्वे के जीएटीटी (GATT) वार्ता सम्मलेन के समझौते का हिस्सा था।
2. भारत में: भौगोलिक चिन्हों (संकेतों) को “वस्तुओं के भौगोलिक चिन्ह (पंजीकरण और सुरक्षा) अधिनियम, 1999” अधिशासित करता है। इस अधिनियम के अंतर्गत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, औद्योगिक नीति एवं प्रवर्तन विभाग के अंतर्गत महानियंत्रक, पेटेंट, डिज़ाइन तथा ट्रेड मार्ग, ''भौगोलिक संकेतों के पंजीयक'' हैं। महानियंत्रक, पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेड मार्ग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री (जीआईआर) की कार्यशैली का निर्देशन और पर्यवेक्षण करता है।
भारत में विश्व स्तरीय महत्वपूर्ण कृषि विरासत प्रणाली (GIAHS) स्थलों की सूची
भौगोलिक चिन्ह (संकेत) के लिए प्रावधान
1. औद्योगिक संपत्ति के संरक्षण के लिए पेरिस कन्वेंशन के अंतर्गत बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) को एक तत्व के रूप में शामिल किया गया है।
2. भौगोलिक चिन्ह या संकेत का पंजीकरण, पंजीकृत स्वामित्व और अधिकृत उपयोगकर्ताओं का अधिकार प्रदान करता है।
3. भौगोलिक चिन्ह या संकेत के उल्लंघन के संबंध में राहत प्राप्त करने का अधिकार।
4. भौगोलिक चिन्ह या संकेत के पंजीकरण के बाद, उपयोग के लिए विशेष अधिकार प्रदान करता है।
5. एक पंजीकृत भौगोलिक चिन्ह या संकेत के दो या अधिक अधिकृत उपयोगकर्ता के पास सह-समान अधिकार हो सकते हैं।
भौगोलिक चिन्ह या संकेत और ट्रेडमार्क में अंतर
भौगोलिक चिन्ह या संकेत (जीआई) | ट्रेडमार्क |
यह दर्शाता है कि उत्पाद किसी विशेष स्थान / क्षेत्र से आता है। | यह दर्शाता है कि उत्पाद एक विशेष उद्यम / कंपनी से आता है। |
अधिकार का लाभ समुदाय/समुदाय सामुदायिक संघ को मिलता है = सामुदायिक अधिकार | अधिकार केवल एक व्यक्ति / कंपनी = व्यक्तिगत अधिकार |
"सामान" (भौतिक सामग्री) के लिए दिया जाता है। | सामान (मोबाइल, पीसी आदि) या सेवा (जैसे संगीत, स्पा आदि) का होता है। |
भौगोलिक चिन्ह या संकेत बाजार के दायरे को बढ़ाने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे निर्यात और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह अप्रत्यक्ष रूप से सतत विकास की ओर ले जाता है।
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