ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस रैंकिंग क्या होती है और इसकी गणना कैसे की जाती है?
ईज ऑफ डूईंग बिजनेस का अर्थ है कि देश में कारोबार करने में कारोबारियों को कितनी आसानी होती है. अर्थात किसी देश में कारोबार शुरू करने और उसे चलाने के लिए माहौल कितना अनुकूल है. विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग (या व्यापार की सुगमता सूची) 2018-19 की लिस्ट में भारत 77वीं रैंक पर आ गया है. वर्ष 2018 में भारत की रैंकिंग में 23 स्थानों का सुधार हुआ है. वर्ष 2017-18 की लिस्ट में भारत की 100वीं रैंक थी.
विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग (या व्यापार की सुगमता सूची) 2018-19 की लिस्ट में भारत 77वीं रैंक पर आ गया है. वर्ष 2018 में भारत की रैंकिंग में 23 स्थानों का सुधार हुआ है. वर्ष 2017-18 की लिस्ट में भारत की 100वीं रैंक थी.
भारत सरकार की लगातार जारी कोशिशों के बीच देश ने 2 सालों में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में 53 स्थानों का सुधार हुआ है. भारत सरकार का लक्ष्य अगले साल तक भारत की रैंकिंग को टॉप 50 देशों में लाना है. दक्षिण एशियाई देशों में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में भारत सबसे आगे है पिछले साल भारत दक्षिण एशिया में 6 वें स्थान पर था.
इस साल की रैंकिंग में 190 देशों को शामिल किया गया है. वर्ष 2018-19 की रैंकिंग में न्यूज़ीलैण्ड पहले स्थान पर है सिंगापुर दूसरे और डेनमार्क तीसरे स्थान पर है. इस साल की रैंकिंग के लिए 2 जून, 2017, और 1 मई, 2018 के बीच के आंकड़ों को शामिल किया गया है.
ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस रैंकिंग क्या होती है?
ईज ऑफ डूईंग बिजनेस का अर्थ है कि देश में कारोबार करने में कारोबारियों को कितनी आसानी होती है. अर्थात किसी देश में कारोबार शुरू करने और उसे चलाने के लिए माहौल कितना अनुकूल है.
यदि कोई कंपनी भारत में कोई कारोबार शुरू करना चाहती है और उसे बहुत कठिन कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, उसे सम्बंधित विभागों से अप्रूवल लेने के लिए बहुत चक्कर कटने पड़ते हैं, बिना रिश्वत दिए आसानी से कारोबार करने की मंजूरी नहीं मिलती है और बहुत से दस्तावेजों को सौंपना पड़ता है तो सीधे तौर पर यह कहा जा सकता हैं कि भारत में बिजनेस शुरू करना आसान नहीं है और ऐसे माहौल में भारत की रैंकिंग बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती है.
ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस रैंकिंग को कैसे तैयार किया जाता है?
इस रैंकिंग को 10 मापदंडों के आधार पर बनाया जाता है और देशों को 1 से लेकर 190 (जितने देश रैंकिंग में शामिल हैं) की रैंकिंग में रखा जाता है. डूईंग बिजनेस रैंकिंग डिस्टेंस टू फ्रंटियर (डीटीएफ) के आधार पर तय किया जाता है और ये स्कोर दिखाता है कि वैश्विक मानकों पर अर्थव्यवस्था कारोबार के मामले में कितना अच्छा प्रदर्शन कर रही है. इस साल भारत का डीटीएफ स्कोर पिछले साल के 60.76 से बढ़कर 67.23 पर आ गया है.

आइये जानते हैं कि रैंकिंग की गणना कैसे की जाती है?
1. बिजनेस की शुरुआत (starting a business)- इस पैरामीटर के अंदर इस बात का अध्ययन किया जाता है कि किसी देश में नया बिजनेस शुरू करने के लिए कितना समय, कागजी कार्यवाही, और कितने विभागों की अनुमति लेनी पड़ती है. जिस देश में ये सब चीजें कम लगती हैं उसे अच्छी रैंकिंग दी जाती है.
2. बिजली कनेक्शन (Getting Electricity) - किसी भी बिजनेस को शुरू करने के लिए बिजली कनेक्शन अति आवश्यक है. इस पैरामीटर के लिए इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन में लगने वाला समय, पैसा और डॉक्यूमेंटेशन से जुड़े आंकड़े जुटाये जाते हैं.
3. निर्माण कार्य के लिए परमिट (Dealing with construction Permit): इस पैरामीटर के अंतर्गत इन तथ्यों का अध्ययन किया जाता है कि कोई गोदाम बनाने के लिए कितना समय और पैसा लगता है इसके अलावा इसमें बिल्डिंग गुणवत्ता नियंत्रण सूचकांक, बिल्डिंग के लिए बीमा और उसके सर्टिफिकेट के लिए कितना समय, पैसा इत्यादि लगता है.
4. संपत्ति पंजीकरण (Registering property):- इसके अंतर्गत किसी उद्योग घराने के द्वारा किसी प्रॉपर्टी को खरीदने, बेचने किसी और व्यक्ति को लीज कर देने या इस प्रॉपर्टी पर ऋण लेने मे कितना समय, कागजी कार्यवाही और पैसा लगता है. साथ ही यह प्रत्येक अर्थव्यवस्था में भूमि अधिग्रहण और भूमि प्रशासन प्रणाली (land administration system) की गुणवत्ता को भी मापता है.
5. ऋण प्राप्त करना (Getting Credit): डूइंग बिजनेस रिपोर्ट के अंतर्गत इस बात का भी अध्ययन किया जाता है कि किसी उद्यमी को कितनी आसानी से व्यापार बढ़ाने के लिए कितनी आसान या कठिन शर्तों पर ऋण मिलता है, कितनी मात्रा में मिलता है, कितनी कोलैटरल सिक्यूरिटी जमा करनी पड़ती है और दिवालियापन का कानून कैसा है.
6. छोटे निवेशकों की रक्षा (Protecting Minority Investors): देश में निवेश करने वाले कारोबारियों के पैसे की सुरक्षा गारंटी कितनी है. इस बात के आंकड़े जुटाये जाते हैं. साथ ही इस बात का भी अध्ययन किया जाता है कि यदि एक निवेशक के साथ कुछ गैर कानूनी घटित होता है तो उसको किस प्रकार की सहायता सरकार से मिलती है और उसको मिलने वाली कानूनी सहायता और क्षतिपूर्ति कितनी होगी.
7. करों का भुगतान (Paying Taxes): टैक्स की संरचना, कितने तरह के टैक्स लिये जाते हैं, कितनी दर से लिए जाते हैं और उसे भरने में कारोबारियों को कितना वक्त गुजारना पड़ता है.
8. सीमा पार व्यापार (Trading Across Borders): इसके अंतर्गत सामानों के निर्यात और आयात की लोजिस्टिक प्रक्रिया से जुड़े समय, डाक्यूमेंट्स और लागत का अध्ययन किया जाता है. इसके अंतर्गत मुख्य रूप से तीन चीजों का अध्ययन किया जाता हैः 1. डाक्यूमेंट्स, 2. बॉर्डर नियम 3. घरेलू परिवहन में लगी लागत और समय.
9. कॉन्ट्रैक्ट के नियम (Enforcing Contracts): दो कंपनियों व कारोबार में आमतौर पर होने वाले कॉन्ट्रैक्ट को लेकर क्या नियम है. इन अनुबंधों में होने वाली प्रक्रिया और खर्च होने वाले रकम को भी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में आधार बनाया जाता है. इसके अंतर्गत यह भी देखा जाता है कि देश में कानूनी प्रक्रिया कितनी जटिल और खर्चीली है.
10. दिवालिएपन का समाधान करना (Resolving Insolvency): डूइंग बिजनेस रिपोर्ट; इस बात का अध्ययन करती है कि यदि कोई कंपनी दिवालियापन के लिए अप्लाई करती है तो इस प्रक्रिया में कितना समय, लागत और परिणाम किस प्रकार कंपनी को प्रभावित करेगा.
पिछले कुछ सालों में भारत की रैंकिंग ये रही है;
साल 2018 - 77वां रैंक
साल 2017 - 100वां रैंक
साल 2016 - 130वां रैंक
साल 2015 - 130वां रैंक
साल 2014 - 142वां रैंक
ऊपर दी गयी रैंकिंग के अधर पर यह कहा जा सकता है कि भारत की ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में हर साल सुधार होता जा रहा है. देश में बिज़नेस करना अब पहले ही तुलना में आसान हो रहा है और लाल फीताशाही का बर्चस्व लगातार घटता जा रहा है. उम्मीद है कि भारत सरकार द्वारा उठाये गए कदम से देश की रैंकिंग जल्दी ही टॉप 50 में आ जाएगी.
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