नोट पर क्यों लिखा होता है कि “मैं धारक को 100 रुपये अदा करने का वचन देता हूँ.”

Jun 21, 2018 17:02 IST
     

    भारत का केन्द्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक है जो कि एक रुपये के नोटों को छोड़कर सभी मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई करता है. ज्ञातव्य है कि एक रुपये के नोट पर भारत के वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं जबकि अन्य नोटों पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं.

    सन 1935 से पहले, मुद्रा छपाई की जिम्मेदारी भारत सरकार के पास थी. भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 के तहत की गई थी. इसका मुख्यालय मुम्बई में है. भारतीय रिजर्व बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के आधार पर मुद्रा प्रबंधन की भूमिका प्रदान की गई थी. भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 22; रिज़र्व बैंक को नोट जारी करने का अधिकार देती है.

    भारत की करेंसी नोटों का इतिहास और उसका विकास

    भारत में नोटों की छपाई का काम न्यूनतम आरक्षित प्रणाली (Minimum Reserve System) के आधार पर किया जाता है.  यह प्रणाली भारत में 1957 से लागू है.  इसके अनुसार रिज़र्व बैंक को यह अधिकार है कि वह RBI फंड में कम से कम 200 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति अपने पास हर समय रखे. इस 200 करोड़ में 115 करोड़ का सोना और शेष 85 करोड़ की विदेशी संपत्ति रखना जरूरी होता है.  इतनी संपत्ति रखने के बाद RBI देश की जरुरत के हिसाब से कितनी भी बड़ी मात्रा में नोट छाप सकती है हालांकि उसे सरकार की अनुमति लेनी होती है.

    "मै धारक को 10/20/100/500 रुपये अदा करने का वचन देता हूँ का क्या मतलब है?

    RBI governor promise
    किसी भी नोट पर रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया यह कथन इसलिए प्रिंट करती है क्योंकि वो जितने रुपये की नोट छापती है उतने रुपये का सोना वह अपने पास रिज़र्व कर लेती है. वह धारक को ये विश्वास दिलाने के लिए यह कथन लिखती है कि यदि आपके पास सौ रुपये का नोट है तो इसका मतलब यह है कि रिज़र्व बैंक के पास आपके सौ रुपये का सोना रिज़र्व है. इसी तरह से अन्य नोटों पर भी यह लिखा होने का मतलब है कि जो नोट आपके पास है आप उस नोट के धारक है और उसके मूल्य के बराबर आपका सोना रिजर्व बैंक के पास सुरक्षित रखा है और रिजर्व बैंक वो सोना उस नोट के बदले आपको देने के लिए वचनबद्ध है.

    भारत में रुपया कैसे, कहां बनता है और उसको कैसे नष्ट किया जाता है?

    RBI 200 करोड़ की यह संपत्ति इसलिए रखता है ताकि नोट पर रिज़र्व बैंक के गवर्नर की शपथ "मै धारक को ..... रुपये अदा करने का वचन देता हूँ" को निभाया जा सके.
    किसी भी विशेष परिस्थिति (जैसे गृह युद्ध, विश्व युद्ध या कोई भयानक प्राकृतिक आपदा, मंदी या अत्यधिक महंगाई इत्यादि) में भी RBI को डिफाल्टर घोषित नही किया जा सकता है. अर्थात

    जिसके हाथ में भी यह शपथ वाला नोट होगा उसको उतना भुगतान करने का दायित्व RBI का है. इसी कारण यदि कोई व्यक्ति किसी सही नोट को लेने से इंकार करता है तो इसका सीधा यह मतलब है कि वह RBI के गवर्नर अर्थात सरकार के प्रतिनिधि की आज्ञा को नहीं मान रहा है अर्थात कानून तोड़ रहा है इसलिए उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी.

    हम उम्मीद करते हैं कि इस लेख को पढ़ने के बाद आपको समझ आ गया होगा कि नोट पर गवर्नर के वचन “मैं धारक को 10, 100 इत्यादि रूपये देने का वचन देता हूँ” का क्या मतलब होता है.

    भारत में नये नोटों को छापे जाने की क्या प्रक्रिया होती है?

    जानें भारत में एक नोट और सिक्के को छापने में कितनी लागत आती है?

     

    Latest Videos

    Register to get FREE updates

      All Fields Mandatory
    • (Ex:9123456789)
    • Please Select Your Interest
    • Please specify

    • ajax-loader
    • A verifcation code has been sent to
      your mobile number

      Please enter the verification code below