जानें ऐसे कानूनों के बारे में जो महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करते हैं

माहिलाओं पर आजकल अपराध बढ़ रहा है परन्तु कुछ महिलाओं को देश में कानूनों के बारे में आज भी जानकारी नहीं है जिससे वह खुद के अधिकारों के लिए लड़ सकती हैं और अपराधी को सजा भी दिलवा सकती हैं. आइये इस लेख के माध्यम से ऐसे कानूनों के बारे में अध्ययन करते हैं जो महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करते हैं.
Oct 24, 2018 18:40 IST
    7 Laws that protect Women Rights

    आजकल महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. परन्तु उन पर होने वाली अपराधिक घटनाएं हर मिनट में सुनने को मिल जाती हैं. घर में हो या सार्वजनिक स्थल पर या कार्यस्थल पर, महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. जिस प्रकार से अपराध बढ़ रहे हैं, ये जरुरी है की महिलाओं को उनकी और उनके अधिकारों की रक्षा करने वाले कानूनों के बारे में पता होना चाहिए. ऐसा भी देखा गया है कि कुछ महिलाओं को कानूनी जानकारी नहीं होती है जिनके कारण उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. आइये इस लेख के माध्यम से IPC की धाराओं के बारे में अध्ययन करते हैं जो महिलाओं को अन्याय के प्रति लड़ने में मदद करती हैं.

    1. IPC धारा 228 A

    IPC धारा 228 A के अनुसार पीड़ित महिला को अधिकार है कि वो अपनी पहचान और खुद से जुड़ी जानकारियों को गुप्त रख सके. अगर कोई इसका उल्लंघन करता है तो उसको जुर्माना देना पड़ सकता है या फिर उसको 2 साल तक की कारावास की सजा हो सकती है.

    2. IPC धारा 294

    यदि कोई, किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई अश्लील हरकत करेगा, गाना गायेगा या कोई भी ऐसा कार्य करेगा जिसमें अश्लीलता हो तो वह इस धरा के तहत आरोपी बनाया जा सकता है. शिकायत होने पर पुलिस इसका मामला दर्ज कर सकती है. हम आपको बटा दें की ये जमानती धरा है. दोष सिद्ध होने पर आरोपी को तीन माह का कारावास या जुर्माना या दोनों दंड के रूप में भुगतने पड़ सकते हैं.

    यानी अगर कोई महिला के लिए अभ्रद या गलत भाषा, गाने या आपत्तिजनक इशारा करता है तो महिला को पुलिस में शिकायत करने का अधिकार है और दोषी को सजा दिलवाने का प्रावधान है.

    3. IPC धारा 306

    आत्महत्या का दुष्प्रेरण: यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है और जो भी इस तरह की आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करता या उकसाता है तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और साथ ही वह आर्थिक दंड की लिए भी उत्तरदायी होगा.

    यानी किसी महिला को प्रताड़ित करना और आत्महत्या के लिए उकसाना एक गंभीर अपराध है और इसके लिए धारा 306 के तहत दोषी व्यक्ति को सजा देने का प्रावधान है.

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    4. IPC धारा 312-315

    IPC की धारा 312 से लेकर 315 में बताया गया है कि यदि किसी भी गर्भवती महिला का उसकी मर्जी के बिना गर्भपात किया जाता है तो यह अपराध होगा और इसमें सजा देने का प्रावधान है. यदि ऐसा गर्भपात माँ की जान को बचाने के आशय से किया जाता है तो यह कार्य अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा.

    धारा 312 गर्भपात कारित करना: किसी गर्भवती महिला का यदि कोई उसकी मर्जी से गर्भपात कारित करेगा और उसके जीवन को बचाने के प्रयोजन से नहीं किया जाता है तो यह एक अपराध माना जायेगा, जिसकी सजा का प्रावधान इस धारा के तहत दिया गया है. जो व्यक्ति ऐसा करता है उसको तीन साल तक की जेल की सजा या जुर्माना या फिर दोनों सजा से दंडित किया जायेगा. यदि गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहा बच्चा भूर्ण है और ऐसे में उसका गर्भपात हो तो अपराधी को सात साल की जेल की सजा और जुर्माना से दण्डित किया जायेगा.

    धारा 313 के तहत स्त्री की सहमति के बिना गर्भपात कारित करना : यदि कोई भी व्यक्ति गर्भवती महिला की सहमति के बिना उसका गर्भपात करवाता है चाहे वह महिला सस्पन्दनगर्भा हो या नहीं तो ऐसे में यह अपराध माना जायेगा जो की दण्डनीय होगा. दोषी पाए गए व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा होगी या फिर 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. इस अपराध को संज्ञेय माना गया है और यह एक गैर जमानती अपराध भी है.

    धारा 314 गर्भपात कारित करने के आशय से किये गए कार्यों द्वारा कारित मृत्यु : किसी गर्भवती महिला का यदि कोई व्यक्ति गर्भपात कारित करने की आशय से कोई ऐसा कार्य करता है या करवाता है जिससे उस महिला की मृत्यु हहो जाती है तो इस प्रकार का अपराध करने वाली व्यक्ति को दस साल तक का कारावास की सजा और जुर्माने से दंडित किया जाएगा.

    धारा 315 शिशु का जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के पश्चात उसकी मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य: यदि कोई व्यक्ति शिशु के पैदा होने से पहले कोई ऐसा कार्य इस आशा से करता है कि शिशु जीवित पैदा न हो सके या फिर उसके जन्म होने के बाद ऐसा कोई कार्य करता है जिसके कारण शिशु की मृत्यु हो जाती है या यह कार्य माता पिता की जान बचाने के प्रयोजन से नहीं है तो इसे अपराध माना जाएगा और दस साल की सजा और जुर्माना होगा.

    5. IPC धारा 406

    यदि कोई भी महिला किसी को अपना सामान, गहने अगर रखने के लिए देती है और उसे वापस नहीं मिलता है तो इसके लिए कानून में प्रावधान है. IPC की सहारा के तहत महिला अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है. इसमें अपराधी पाए गए व्यक्ति को तीन साल तक का कारावास या जुर्माना या दोनों भुगतने पड़ सकते है.

    6. IPC धारा 493

    यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक और मानसिक शोषण करता है तो इस IPC धारा के तहत पीड़ित महिला अपना केस दर्ज करा सकती है. अगर आरोप साबित हो जाता है तो उसे दस वर्ष तक का कारावास से दंडित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा. यह एक गैर-जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के न्यायधीश विचारणीय है. यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है.

    7. IPC धारा 498A

    इसे दहेज कानून भी कहा जाता है. जब किसी महिला का पति या उसका कोई रिश्तेदार उस औरत के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता करता है तो वह इस धारा के अंतर्गत आता है. अपराध साबित होने पर अपराधी को 3 वर्ष की अवधि तक का कारावास दिया जायेगा और वो जुर्माने का भी पात्र होगा. जुर्माने में पत्नी से लिए दहेज का मूल्य व शादी में लिए गये उपहार जो कि ना लोटाये गये हो उनका मूल्य भी सम्मलित होता है.

    तो ये थे वो कानून जिसे महिला जरुरत पड़ने पर अपने अधिकारों के लिए इस्तेमाल कर सकती है.

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