भूमंडलीय आदर्श वायुदाब वाले क्षेत्रो की सूची
पृथ्वी के वायुमंडल में किसी सतह की एक इकाई पर उससे ऊपर की हवा के वजन द्वारा लगाया गया बल को वायुमंडलीय दबाव कहते हैं। वायुमंडल के निचले परतों पर हवा और वायुमंडलीय दबाव का घनत्व उच्च होता है। बढ़ती ऊंचाई के साथ वायुमंडलीय दबाव कम हो जाता है। इस लेख में हमने भूमंडलीय आदर्श वायुदाब वाले क्षेत्रो की सूची दिया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
पृथ्वी के वायुमंडल में किसी सतह की एक इकाई पर उससे ऊपर की हवा के वजन द्वारा लगाया गया बल को वायुमंडलीय दबाव कहते हैं। वायुमंडल के निचले परतों पर हवा और वायुमंडलीय दबाव का घनत्व उच्च होता है। बढ़ती ऊंचाई के साथ वायुमंडलीय दबाव कम हो जाता है। यद्यपि बढ़ती ऊंचाई और वायुमंडलीय दबाव में कमी की दर के बीच कोई सीधा संबंध नहीं होता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से सतह की हवा को ऊपरी हवा संपीड़ित कर देती है।
प्रत्येक परिस्थितियों में वायुमंडलीय दबाव का लगभग सही अनुमान मापन बिंदु पर उसके ऊपर वाली हवा के वजन द्वारा लगाए गए द्रवस्थैतिक दबाव (hydrostatic pressure) द्वारा लगाया जाता है। कम दबाव वाले क्षेत्रों में उन स्थानों के ऊपर वायुमंडलीय द्रव्यमान कम होता है, जबकि अधिक दबाव वाले क्षेत्रों में उन स्थानों के ऊपर अधिक वायुमंडलीय द्रव्यमान होता है। इसी प्रकार, जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती जाती है उस स्तर के ऊपर वायुमंडलीय द्रव्यमान कम होता जाता है, इसलिए बढ़ती ऊंचाई के साथ दबाव घट जाता है।
भूमंडलीय आदर्श वायुदाब वाले क्षेत्र

पृथ्वी पर चार आदर्श वायुदाब वाले क्षेत्र हैं जिसकी चर्चा नीचे की गयी हैं:
1. भूमध्यरेखीय (विषुवत्त) न्यून दाब पेटी (Equatorial low-pressure trough)
यह 50 उत्तर और 50 दक्षिण अक्षांश के बीच भूमध्य रेखा के आसपास वाला क्षेत्र इसके अंतर्गत आता है। इसी क्षेत्र को व्यापारिक पवन अभिसरण क्षेत्र भी कहते हैं क्योकि व्यापारिक पवन जो भूमध्य रेखा से होते हुये उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी (Subtropical high-pressure cell) तक जाती है।
यह निम्न वायुदाब वाला क्षेत्र है तो गरम भूमि के सम्पर्क से वायु भी गरम हो जाती है और हल्की होकर ऊपर उठती है तथा वायुमण्डल के ऊपरी स्तरों से ठण्डी वायु पृथ्वी के धरातल पर नीचे उतरती है। जिसके कारण वायुमंडल में संवहन धाराएँ ( convectional currents) उत्पन्न हो जाती हैं। इसलिए इस क्षेत्र को शान्त खण्ड (Doldrums) भी बोला जाता है।
इस क्षेत्र को उष्णकटिबन्धीय अभिसरण क्षेत्र (Inter-tropical Convergence zone) भी बोला जाता है क्योकि यहाँ बाहर से आने वाली पवनो का स्थायी पवनों से मिलन या अभिसरण (convergence) होता है। इस क्षेत्र में तापमान सालो भर उच्च होता है, इसलिए वायु दाब हमेशा कम होता है। यह उष्मा उत्पादित क्षेत्र है। इसलिए, पृथ्वी के अन्य हिस्सों के अपेक्षा इस क्षेत्र में दबाव अधिक समान रहता है।
2. उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी (Subtropical high-pressure cell)
उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध के 30° और 35° अक्षांशों के बीच में स्थित हैं। वायुदाब का यह क्षेत्र पृथ्वी की गति के कारण उत्पन्न होती हैं। इन क्षेत्रो में वायु सदा ऊपर से नीचे उतरती है जिसके कारण हवा का दबाव बढ़ जाता है। इस वायुदाब पेटी को अश्व अक्षांश (Horse Latitudes) भी कहा जाता है, क्योंकि मध्ययुग में घोड़ो के व्यापारी जलयानों से यात्रा करते समय अपने साथ लाये घोड़े समुद्र में फेक दिया करते थे ताकि उनका जहाज़ हल्का हो सके और आगे जा सके।
भूमध्य रेखा पर उत्पन्न पवन ध्रुव की ओर बढती है लेकिन पृथ्वी की घूर्णन के कारण इन हवाएं पूर्व की तरफ निकल जाती है। इस घटना को पहली बार फ्रांसीसी वैज्ञानिक कोरियोलिस द्वारा दृष्टिगत गया था; इसलिए पृथ्वी के घूर्णन द्वारा लगाए गए इस बल को कोरियोलिस बल कहा जाता है।
3. उप-ध्रुवीय कम दबाव वाली पेटी (Subpolar low-pressure cells)
उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध के 60° और 70° अक्षांशों के बीच में स्थित हैं। ध्रुवों की ओर शीत पवन ,भूमध्यरेखीय (विषुवत्त) रेखा की ओर मध्य अक्षांशों के समीप और पृथ्वी की गति के कारण इन क्षेत्र को अधिक वायुदाब मिलता है। यह कम दबाव वाले क्षेत्र होने के कारण फ्रंटोजेनेसिस या तापमान चक्रवात के उत्पन्न होने में गतिशील रूप से प्रेरित करता है। इन क्षेत्रो में स्थित सागरों में गरम जलधाराएँ चला करती हैं जिनसे यहाँ तापमान बढ़ जाता है और वायुदाव कम हो जाता है। इसके ही प्रभाव के कारण महाद्वीपों के पश्चिमी तट पर रेगिस्तान की उत्पति होती है।
4. ध्रुवीय उच्च दबाव पेटी (Polar high-pressure cells)
उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध के 800 और 900 अक्षांशों के बीच में स्थित हैं। इस क्षेत्र में सालो भर बहुत कम तापमान रहता है जिसकी वजह सेपूरे साल ध्रुवों पर उच्च दबाव बनी रहती है। तीव्र शीतलन के कारण हवा इस क्षेत्र में कम हो जाती है और परिणामस्वरूप उच्च घनत्व का निर्माण हो जाता है।
पृथ्वी के धरातल पर वायुदाब की विविधता के कारण ही वायु में गति उत्पन्न होती है। इस गतिशील वायु को पवन (wind) कहते हैं। सतह के पवनों का सीधा सम्बन्ध वायुदाब के अन्तर के कारण होता है क्योकि हवा उच्च दाब से न्युन दाब वाले क्षेत्र की तरफ बहती है।
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