भारत में प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए सुरक्षा श्रेणियां

देश में VIP सुरक्षा को ध्यान में रखकर उन्हें बहुत सी सुरक्षा प्रदान की जाती है। किस प्रकार की सुरक्षा बड़े नेताओं और अधिकारियों को दी जाएगी इसका निर्धारण सरकार करती है। इसमें कोई संदेह नहीं हैं कि भारत में पुलिस और स्थानीय सरकार द्वारा प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान की जाती है| खुफिया विभागों द्वारा दी गई सूचना के आधार पर विभिन्न व्यक्तियों को अलग-अलग श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है| भारत में सुरक्षा व्यवस्था को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है: जेड प्लस (Z+) (उच्चतम स्तर); जेड (Z), वाई (Y) और एक्स (X)|
May 20, 2019 17:49 IST
    Security of VIPs in India

    भारत के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए इस प्रकार कि सुरक्षा दी जाती है। किसी भी प्रकार का VIP को खतरा ना हो इसलिए उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाती है। जिसमें से कुछ को Z plus की सुरक्षा मिलती है Z श्रेणी कि इत्यादि। यहीं आपको बता दें कि किसी राजनीतिक या विशिष्ट व्यक्ति को वीआईपी सुरक्षा देने का फैसला खतरे के आकलन के बाद होता है| खुफिया विभागों द्वारा खतरे के आकलन के बाद यह निर्णय लिया जाता है कि किस व्यक्ति को किस प्रकार की सुरक्षा प्रदान की जाएगी| भारत में सुरक्षा व्यवस्था को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है: जेड प्लस (Z+) (उच्चतम स्तर), जेड (Z), वाई (Y) और एक्स (X)| खतरे के आधार पर वीआईपी सुरक्षा पाने वालों में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद, नौकरशाह, पूर्व नौकरशाह, जज, पूर्व जज, बिजनेसमैन, क्रिकेटर, फिल्मी कलाकार, साधु-संत या आम नागरिक कोई भी हो सकता है।

    आइये सबसे पहले देखते हैं कि वीआईपी (VIPs) को किस प्रकार सुरक्षा मुहैया कराई जाती है?

    जब वीआईपी (VIPs) पर कोई खतरा होता है तो सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होती हैं| दूसरी तरफ सुरक्षा हासिल करने के लिए सुरक्षा की मांग करने वाले को संभावित खतरा बता कर सरकार के समक्ष आवेदन करना होता है। यह आवेदन उसे अपने निवास स्थान के नजदीक करना पड़ता है| फिर राज्य सरकार उस व्यक्ति के बताए खतरे का पता लगाने के लिए खुफिया एजेंसियों को केस सौंपती है और रिपोर्ट मांगती है| जब खतरे की पुष्टि हो जाती है तब राज्य में गृह सचिव, महानिदेशक और मुख्य सचिव की एक समिति यह तय करती है कि उस व्यक्ति को किस श्रेणी की सुरक्षा दी जाए| इसके बाद औपचारिक मंजूरी के लिए इस व्यक्ति का ब्यौरा केंद्रीय गृह मंत्रलय को भी दिया जाता है| गृह सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति खुफिया रिपोर्ट तय करती है कि किस व्यक्ति को कितना खतरा है तथा उसे किस श्रेणी की सुरक्षा दी जाए।

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    क्या आपको पता हैं कि कौन-सी एजेंसियां वीआईपी (VIPs) को सुरक्षा प्रदान करती है?

    सबसे उच्चतम स्तर की श्रेणी जेड प्लस है। इसका जिम्मा एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप), एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड), आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) जैसी एजेंसियों पर होता है| अति विशिष्ट व्यक्तियों/नेताओं/ खिलाड़ियों और फिल्मी सितारों को 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है| एनएसजी बड़े पैमाने पर 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा वीआईपी और वीवीआईपी को देती है | कई एनएसजी जवान स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) के तहत प्रधानमंत्री की सुरक्षा करते हैं|

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    एनएसजी देश का सबसे अत्याधुनिक सुरक्षा बल है  जो  विशिष्ट व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करता है| लेकिन पिछले कई वर्षों से जेड प्लस श्रेणी की सुविधा लेने वालों की संख्या में जिस प्रकार बढ़ोतरी हो रही है, उसे देखते हुए एनएसजी के बोझ को कम करने के लिए यह जिम्मा सीआईएसएफ को भी सौंपा गया है| अभी 15 लोगों से ज्यादा लोगों को जेड प्लस श्रेणी की सुविधा एनएसजी द्वारा दी जा रही है और कुछ व्यक्तियों को सीआईएसएफ की जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है| इससे ऐसा कहा जा सकता है कि सीआईएसएफ पर सुरक्षा की जिम्मेदारी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है| अतः एक विशेष सुरक्षा समूह का गठन किया है और वीआईपी को सुरक्षा देने के लिए राजस्थान के देवली क्षेत्र में एक विशेष ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना भी की गई है|

    अब सवाल यह उठता है कि ये सुरक्षा होती कैसे है?

    क्या आप जानते है कि अगर किसी व्यक्ति को जेड प्लस श्रेणी की सुविधा दी गई है तो उसे पूरे देश में यह सुविधा मिलेगी। इसके लिए एक मैकेनिज्म होता है| जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि जेड प्लस श्रेणी कि सुरक्षा में एनएसजी या सीआईएसएफ के जवान तैनात रहते है, परन्तु जब वह व्यक्ति राज्य से बाहर जाता है तो कुछ ही जवान उसके साथ रहते हैं, बाकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उस राज्य की होती है, जहाँ वह व्यक्ति जा रहा होता है| इसके लिए वीआईपी को अपने दौरे की पूर्व सूचना राज्य को देनी होती है| सुरक्षा इंतजामों की इस प्रक्रिया को कतई उजागर नहीं किया जाता है।

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    सुरक्षा की विभिन्न श्रेणियों का विस्तारपूर्वक विवरण:

    - जेड प्लस श्रेणी: यह 55 जवानों का एक सुरक्षा कवच है, जिसमें 10 से अधिक कमांडो और पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं|

    - जेड श्रेणी: यह 22 जवानों का एक सुरक्षा कवच है, जिसमें 4 या 5 एनएसजी कमांडो और पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं|

    - वाई श्रेणी: यह 11 जवानों का एक सुरक्षा कवच है, जिसमें 1 या 2  कमांडो और पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं|

    - एक्स श्रेणी: यह 5 या 2 जवानों का एक सुरक्षा कवच है, जिसमें केवल सशस्त्र पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं|

    एसपीजी (SPG) सुरक्षा

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    स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) की सुरक्षा सिर्फ प्रधानमंत्री, भूतपूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिजनों को मिलती है। परन्तु भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों के लिए यह सुरक्षा केवल छह महीने तक रहती है| लेकिन कुछ विशेष कानूनी प्रावधान के जरिये यह सुविधा अनिश्चितकाल के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी एवं उनके परिजनों को दी गई है।

    जेड प्लस (Z+) श्रेणी

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    जैसा कि हम जानतें हैं कि यह उच्चतम श्रेणी की सुरक्षा है और इसमें 55 जवान सुरक्षा प्रदान करते हैं। क्या आप जानतें है कि ये जवान मार्शल आर्ट में प्रशिक्षित होते है और बिना किसी हथियार के भी दुश्मन से लड़ने में सक्षम होते हैं। वे अत्याधुनिक एमपी-5 बंदूकों एवं संचार के साधनों से भी लैस होते हैं। जैमर, रोड ओपनिंग वाहन आदि भी जेड प्लस श्रेणी के सुरक्षा काफिले में दिए जाते हैं।

    जेड (Z) श्रेणी

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    जिन लोगों को थोड़ा कम खतरा होता है उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है और यह दूसरे स्तर की सुरक्षा सुविधा है | इसमें 22 जवान सुरक्षा प्रदान करते हैं। वर्तमान में तकरीबन 38 लोगों को यह सुविधा दी जा रही है, जिसमें योग गुरु रामदेव, कई अभिनेता जैसे कि आमिर खान आदि भी शामिल हैं| इसमें सीआईएसएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ या दिल्ली पुलिस के जवान तैनात रहते हैं।

    वाई (Y) श्रेणी

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    यह तीसरे स्तर की सुरक्षा सुविधा है, जिसमें 11 जवान सुरक्षा प्रदान करते हैं। इनमें पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों के जवान होते हैं | ऐसी सुरक्षा प्राप्त लोगों की संख्या काफी है।

    एक्स (X) श्रेणी

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    यह चौथे स्तर की सुरक्षा सुविधा है, जिसमें दो या 5 जवान रहतें हैं और आमतौर पर राज्य पुलिस बलों से ही लिए जाते हैं। ये पीएसओ के नाम से जानें जाते हैं | ऐसी सुरक्षा प्राप्त लोगों की संख्या हजारों में है।

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