फ्लोटिंग रेट बॉन्‍ड क्या होता है?

भारत सरकार ने 01 जुलाई, 2020 से फ्लोटिंग रेट बॉन्ड 2020 योजना शुरू कर दी है. इस बांड का कार्यकाल 7 वर्ष का होगा. फ्लोटिंग बांड पर हर 6 महीने में 1 जनवरी और 1 जुलाई को ब्याज की दर बदलती रहेगी. बांड में निवेश करने के लिए न्यूनतम राशि 1000 (डिजिटल) रुपये और नकद में अधिकतम 20 हजार रूपये होगी.
Created On: Jul 6, 2020 17:03 IST
Modified On: Jul 6, 2020 17:03 IST
What is Floating Rate Bond?
What is Floating Rate Bond?

भारत में लोगों में बचत की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पहले से ही कई योजनायें चला रखीं हैं. इसी दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सरकार ने 1 जुलाई 2020 से फ्लोटिंग रेट बांड योजना शुरू की है.

आइये इस लेख में इस योजना के बारे में जानते हैं.

दरअसल मोदी सरकार इस योजना को इसलिए लेकर आई है क्योंकि बैंकों और पोस्ट ऑफिस में डिपाजिट राशि पर ब्याज बहुत घट गया है और लोगों को बचत करने के लिए प्रेरित करने के लिए ज्यादा ब्याज वाली डिपॉजिट स्कीम की जरूरत महसूस हो रही थी. इस स्कीम के तहत 7.15 फीसदी का ब्याज दिया जायेगा जो कि बैंकों और पोस्ट ऑफिस से काफी ज्यादा है.

इस बांड को कौन-कौन खरीद सकता है?

निम्न व्यक्ति बांड खरीद सकते हैं;

(i) भारत में निवास करने वाला एक व्यक्ति

(a) अपनी व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर,  या

(b) संयुक्त आधार पर व्यक्तिगत क्षमता में, या

(c) पिता / माता / कानूनी अभिभावक के रूप में नाबालिग की ओर से

(ii) एक हिंदू अविभाजित परिवार

बांड का मेच्युरिटी पीरियड 

इस स्कीम में भारत का कोई भी नागरिक निवेश कर सकता है. इन बांड्स के जारी होने के बाद से इनकी अवधि 7 साल की होगी हालाँकि ब्याज का भुगतान हर 6 माह पर किया जायेगा. 1 जुलाई को खरीदे गए बांड पर ब्याज 1 जनवरी को दिया जायेगा अर्थात पहला बदलाव 1 जनवरी, 2021 को होगा. खास श्रेणी के वरिष्‍ठ नागरिकों को प्रीमैच्‍योर रिडेम्‍पशन की अनुमति है.

बांड्स में निवेश की सीमा 

फ्लोटिंग रेट सेविंग बॉन्ड कितने भी रुपये का खरीदा जा सकता है. लेकिन न्यूनतम 1000 रुपये का बॉन्ड खरीदना होगा. इसके बाद 1000 रुपये के गुणांक में कितने भी बांड्स खरीदे जा सकते हैं. अर्थात इस बांड्स में निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं होगी.लेकिन कैश में केवल 20 हजार तक के बांड्स खरीदे जा सकते हैं.

ध्यान रहे कि इस बांड को रखने वाले व्यक्ति को टैक्स देना होगा क्योंकि यह टैक्स सेविंग बॉन्‍ड नहीं है, इसलिए इस बॉन्‍ड पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्‍स लगेगा. आप जिस इनकम टैक्‍स स्‍लैब में आएंगे, उसी के अनुसार टैक्‍स लगेगा. साथ ही ब्‍याज आय (Interest income) पर टीडीएस लागू होगा.

यदि ये बांड्स ज्यादा रिटर्न दे रहे हैं तो इनके साथ कुछ प्रतिबन्ध भी हैं जैसे;

1. इन बॉन्‍डों की ट्रेडिंग शेयर बाजार में नहीं की जा सकती है.

2. इन बांड्स से वित्‍तीय संस्‍थान, बैंक और एनबीएफसी इत्‍यादि से लोन नहीं लिया जा सकता है.

इन बांड्स की अच्छी बात ये है कि बॉन्‍ धारक किसी को इन बांड्स का नॉमिनी बना सकता है और बॉन्‍डधारक की मौत होने पर बांड्स को नॉमिनी को ट्रांसफर कर दिया जाएगा.

फ्लोटिंग रेट बॉन्‍डों में निवेश करने का तरीका:-

ये बॉन्‍ड किसी भी सरकारी बैंक और कुछ निजी बैंकों से खरीदे जा सकते हैं. निजी बैंकों में शामिल हैं;एक्सिस बैंक,आईडीबीआई बैंक,आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक.

पारदर्शिता के लिए सरकार ने इन बांड्स को केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप में खरीदने की इजाजत दी है. फ्लोटिंग बॉन्ड खरीदते ही ये निवेशक के बॉन्ड लेजर अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएंगे. निवेशक चाहें तो अधिकतम 20 हजार रुपये की नकदी से भी इन्हें खरीद सकता है. इसके अलावा चेक, ड्रॉफ्ट, और इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड से भी इन फ्लोटिंग रेट बॉन्‍डों को खरीदा जा सकता है.

इस प्रकार फ्लोटिंग बांड्स को जारी करने का बेसिक उद्येश्य लोगों को बचत के लिए प्रेरित करना और देश में पूँजी निर्माण को बढ़ावा देना है.

SOURCE:PIB

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