प्रादेशिक सेना क्या है, कैसे बनी यहां जानें इस सेना से जुड़े काम

May 10, 2025, 22:13 IST

प्रादेशिक सेना (Territorial Army) इसे सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस भी कहा जाता है। यह एक वालंटियर सर्विस होती है। देश का आम आदमी भी इसे अपनी जॉब या बिजनेस के साथ ज्वाइन कर सकता है। यहां विस्तार से पढ़ें प्रादेशिक सेना से जुड़ी अहम जानकारी।  

What is Territorial Army
What is Territorial Army

प्रादेशिक सेना या टेरिटोरियल आर्मी (Territorial Army) इसे सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस भी कहा जाता है। यह एक वॉलंटियर सर्विस मानी जाती है, जिसे देश का आम आदमी भी जॉब या बिजनेस के साथ ज्वाइन कर सकता है। यह किसी परमानेंट नौकरी के भीतर नहीं आती। लेकिन, जब ड्यूटी या ट्रेनिंग में रहते हैं तो रेगुलर आर्मी जैसी सैलरी व भत्ते मिलते हैं। इस भर्ती के लिए न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 42 वर्ष तक की आयु सीमा मांगी जाती है। इसकी भर्ती प्रादेशिक आर्मी समय - समय पर अपनी वेबसाइट और स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के तहत निकालती रहती है। 

चलिए आज हम इस लेख में जानते हैं प्रादेशिक सेना की शुरुआत कब हुई और इसके क्या काम हैं? 

प्रादेशिक सेना क्या होती है?

प्रादेशिक सेना या टेरिटोरियल आर्मी (TA) परमानेंट नौकरी में शामिल नहीं है। लेकिन, फिर भी लोगों के अंदर इस सेना को लेकर काफी क्रेज रहता है। यह एक पार्ट टाइम कॉन्सेप्ट है, जिसमें साल में दो महीने की अनिवार्य ट्रेनिंग होती है। ऐसे बहुत से लोग होते हैं, जो कई कारणों से सेना में शामिल नहीं हो पाते। ऐसे युवाओं को प्रादेशिक सेना भर्ती के जरिए देश सेवा का एक मौका देती है। यह एक स्वैच्छिक संगठन है, जो नियमित रोजगार की गारंटी नहीं देता। 

अपनी वर्तमान भूमिका में प्रादेशिक सेना अनिवार्य रूप से नियमित सेना का हिस्सा है। देश को खतरा होने पर टेरिटोरियल आर्मी नियमित सेना के लिए यूनिट प्रदान कर सकता है।

प्रादेशिक सेना की शुरुआत 

 प्रादेशिक सेना की शुरुआत भारत के प्रथम गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी ने 9 अक्टूबर,1949 में की थी। इस दिन को 'नागरिक सेना' के सम्मान में हर साल 'प्रादेशिक सेना दिवस' के रूप में मनाया जाता है और पहला टीए सप्ताह 8 से 15 नवंबर, 1952 तक मनाया गया था।

इसकी शुरुआत विभिन्न प्रकार की यूनिट जैसे इन्फैंट्री बटालियन (TA), एयर डिफेंस (TA), मेडिकल रेजिमेंट (TA), इंजीनियर्स फील्ड पार्क कंपनी (TA), सिग्नल रेजिमेंट (TA), आदि के साथ हुई थी। 

हालांकि, इन्फैंट्री बटालियन (टीए) को छोड़कर, इन यूनिट को 1972 तक भंग कर दिया गया या नियमित सेना में बदल दिया गया।

कई ऑपरेशनों का हिस्सा रही प्रादेशिक सेना 

टेरिटोरियल आर्मी यूनिट साल 1962, 1965 और साल 1971 में ऑपरेशनों का हिस्सा रही हैं। 'टेरियर्स' ऑपरेशन पवन(Operation Pawan) के दौरान श्रीलंका, ऑपरेशन रक्षक (Operation Rakshak) के दौरान पंजाब और जम्मू-कश्मीर, तथा ऑपरेशन राइनो (Operation Rhino) और ऑपरेशन बजरंग (Operation Bajrang) के दौरान उत्तर-पूर्व क्षेत्र में भी गए थे।

युद्ध की स्थिति में कार्य

प्रादेशिक सेना नियमित सेना को कई कर्तव्यों से मुक्त कर सकती है जैसे प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में नागरिक प्रशासन की सहायता कर सकती है, राष्ट्रीय आपातकालीन स्थितियों, जैसे कि किसी दुश्मन राष्ट्र के साथ युद्ध छिड़ने की स्थिति में आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने में सहायता कर सकती है। अपने कार्य और भूमिका के आधार पर, प्रादेशिक सेना की यूनिट आपदा न्यूनीकरण की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और भारतीय सेना के राष्ट्र निर्माण प्रयासों का भी हिस्सा बन रही हैं।

TA का हिस्सा रहीं कई बड़ी हस्तियां

प्रादेशिक सेना का हिस्सा

इंडियन क्रिकेट टीम के दो महान पूर्व कप्तान कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी। शूटर अभिनव बिंद्रा, राजनेता अनुराग ठाकुर व सचिन पायलट, मलयालम फिल्म स्टार मोहनलाल, बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर सहित अन्य लोग भी प्रादेशिक सेना का हिस्सा रहे हैं।

Priyanka Pal
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Content Writer

Priyanka Pal is a passionate writer with 2.5 years of experience in creative storytelling and research writing. She is a graduate with a BJMC from Ramlal Anand College, Delhi University. With a strong background in social media handling and education beat coverage, she brings both creativity and insight to her work. Her interests also include general knowledge and current affairs, allowing her to engage a wide range of audiences with compelling and informative content.

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