वित्त वर्ष 2025-26 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किया जाएगा. इस बजट से विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों और प्रोत्साहनों की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था को गति देने और आम जनता को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं. यह 8वां मौका है जब वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी. इससे पहले उन्होंने लगातार सात बार बजट पेश किया है जिसमें एक अंतरिम बजट भी शामिल है.
बजट में कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. इसके अलावा, डिजिटल और हरित अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भी विशेष प्रावधान किए जाने की संभावना है, जिससे समग्र आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकेगा. आज हम यहां केन्द्रीय बजट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य के बारें में चर्चा करने जा रहे है.
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क्या है बजट?
बजट एक विशिष्ट वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के अनुमानित राजस्व और व्यय का एक विस्तृत विवरण है. "बजट" शब्द का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, लेकिन भारतीय संविधान में 'बजट' शब्द का कोई जिक्र नहीं है. इसके बजाय, अनुच्छेद 112 (भाग V) में इसे वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में परिभाषित किया गया है. बता दें कि केंद्रीय बजट की तैयारी का प्रबंधन वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग के तहत बजट प्रभाग द्वारा किया जाता है.
क्यों हिंदी में बजट छपना हुआ शुरू:
स्वतंत्रता के बाद, भारत में विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का समावेश बढ़ा था. भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए, यह आवश्यक था कि सरकारी दस्तावेज़ों, जैसे कि बजट, को विभिन्न भाषाओं में प्रस्तुत किया जाए , जिसके बाद यह पहल की गयी. हिंदी में बजट छापने से लोगों को सरकार की वित्तीय नीतियों और योजनाओं के बारे में बेहतर जानकारी मिलनी शुरू हुई.
पहली बार हिंदी में कब प्रिंट हुआ था बजट:
भारत का केंद्रीय बजट पहली बार वित्तीय वर्ष 1955-56 के बजट के दौरान हिंदी में प्रिंट किया गया था. इस महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत वित्त मंत्री सी.डी. ने की थी. देशमुख, जिन्होंने बजट दस्तावेजों को अंग्रेजी और हिंदी दोनों में प्रिंट करने का निर्णय लिया, यह पिछली प्रथा से हटकर है जहां बजट केवल अंग्रेजी में प्रकाशित किए जाते थे.
किस PM के कार्यकाल में हिंदी में छपा था बजट:
भारत के वित्त मंत्री 1955 में चिंतामणि द्वारकानाथ देशमुख थे, जिन्होंने 1955-56 के बजट को हिंदी में छापने का निर्णय लिया था. उस समय देश ने पीएम जवाहरलाल नेहरू थे, जो 15 अगस्त 1947 से इस पद पर कार्यरत थे.
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