भारत के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले कौन-कौन से हैं?

Jul 10, 2018, 19:01 IST

किसी भी देश की बैंकिंग व्यवस्था में लोगों की छोटी छोटी बचतों का पैसा जमा होता है. यह जमा राशि जब बड़ी रकम का रूप ले लेती है तो बैंक इस जमा को व्यक्तियों, व्यापारियों, संस्थाओं को उधार दे देते हैं. कई बार देश के बड़े उद्योग घराने जनता की इन छोटी बचतों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उधार ले लेते हैं लेकिन समय पर लौटाते नही हैं जिससे देश की बैंकिंग व्यवस्था चरमरा जाती है.

Bank Scams in India
Bank Scams in India

किसी भी देश की बैंकिंग व्यवस्था में लोगों की छोटी छोटी बचतों का पैसा जमा होता है. यह जमा राशि जब बड़ी रकम का रूप ले लेती है तो बैंक इस जमा को सामान्य व्यक्तियों, व्यापारियों, संस्थाओं को उधार दे देते हैं. कई बार देश के बड़े उद्योग घराने जनता की इन छोटी बचतों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उधार ले लेते हैं लेकिन समय पर लौटाते नहीं हैं जिससे देश की बैंकिंग व्यवस्था चरमरा जाती है.

भारतीय बैंकिंग की स्थिति पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, बेंगलुरु ने एक स्टडी रिपोर्ट तैयार की थी जिसमें बताया गया कि सार्वजनकि क्षेत्र के बैंकों को साल 2013 से 2016 के बीच धोखा देकर 22,743 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया. इसका परिणाम यह हुआ है कि बैंकों द्वारा दिया गया लोन उन्हें वापस नही मिला है और यह लोन “बुरे लोन” में बदल गया है.

जून 2018 में भारत के 42 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों का कुल NPA; 10.25 लाख करोड़ रुपये हो गया था जिसमे 21 सरकारी बैंकों के हिस्सा 7.3 लाख करोड़ रुपये का था.

आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि भारत के बैंकिंग इतिहास में कौन-कौन से बड़े-बड़े घोटाले हुए हैं;

RBI के नये नियम से बैंक फ्रॉड की कितनी राशि ग्राहकों को वापस मिलेगी

IIM-B की रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 के पहले नौ महीने में ICICI बैंक में धोखाधड़ी के करीब 455, SBI में 429, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक में 244 और HDFC बैंक में 237 मामले पकड़े गए. रिपोर्ट कहती है कि धोखाधड़ी के ज़्यादातर मामलों में बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत थी.

आंकड़े बताते हैं कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के 60 से ज्यादा कर्मचारी, एचडीएफसी बैंक के 49, एक्सिस बैंक के 35 कर्मचारियों की इस जालसाजी में भूमिका पायी गयी है. नीरव मोदी कांड के बाद पंजाब नेशनल बैंक ने भी 11,400 करोड़ रुपये के घोटाले के सिलसिले में अपने 20 कर्मचारियों को निलंबित किया है.

आइये अब नजर डालते हैं भारत में सबसे बड़े बैंक घोटालों पर;

1. नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक घोटाला:-

इस बैंक घोटाले को भारत के बैंकिंग क्षेत्र का सबसे बड़ा घोटाला (11,400 करोड़ रुपये) कहा जा रहा है. इस घोटाले के मुख्य आरोपी अरबपति ज्वैलर नीरव मोदी और उनके चाचा मेहुल चौकसी (गीतांजलि जेम्स के मालिक) हैं. इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने पीएनबी की ब्रैड हाऊस शाखा (मुंबई) से पीएनबी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से “लेटर ऑफ अंडरटेकिंग” प्राप्त किया और विदेशी बैंकों से पंजाब नेशनल बैंक की गारंटी पर रुपयों की निकासी की थी. इस घोटाले में नीरव के भाई निशाल, पत्नी अमी भी आरोपी हैं. नीरव मोदी विदेश भाग चुका है और बैंकों का बकाया रुपया चुकाने से मना का रहा है. हालाँकि प्रवर्तन निदेशालय ने उसकी 5870 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कर ली है.

2. विजय माल्या द्वारा बैंक घोटाला:-

माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस पर देश के 13 बैंकों का इस साल फरवरी तक 9,432 करोड़ रुपए का कर्ज था जिनमे सबसे अधिक लोन 1600 करोड़; स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का है, इसके बाद PNB और IDBI प्रत्येक का 800 करोड़ , बैंक ऑफ़ इंडिया का 650 करोड़, बैंक ऑफ़ बड़ौदा का 550 करोड़ शामिल है. माल्या 2 मार्च 2016 को देश छोड़कर चला गया था अभी लन्दन में रह रहा है और भारत उसके प्रत्यर्पण के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहा है.

MALYA BANK SCAM

3. इलाहाबाद बैंक घोटाला:-

कोलकाता स्थित इलाहाबाद बैंक ने कहा है कि पीएनबी धोखाधड़ी मामले में इसका 366.87 मिलियन डॉलर (लगभग 2,363 करोड़ रुपये) फंसा है.

हालांकि, बैंक ने कहा कि उसे यह भुगतान प्राप्त होने का पूरा भरोसा था क्योंकि यह लेनदेन एलओयू दस्तावेजों द्वारा पूरी तरह से सुरक्षित था. बैंक ने कहा है है कि यह लेनदेन उसकी हांगकांग स्थित ब्रांच के जरिए हुआ था जिसमे "स्विफ्ट" प्लैटफॉर्म के जरिये कई “Letters of Undertakings (LOU)” भी जारी किये गए थे.

यह घोटाला कैसे हुआ?

सोसाइटी फॉर वर्ल्ड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन (स्विफ्ट) प्लैटफॉर्म का दुरुपयोग किया गया और खाता प्रविष्टियों को अधूरा छोड़ दिया गया था. कई विशेषज्ञों का कहना है कि देश की सार्वजनिक बैंकिंग प्रणाली में लेखता देयता (Accounting liability) और मानकों की कमी के कारण ऐसे घोटालों की घटनाएं हो रही हैं. बैंक की तकनीकी प्रणाली का दुरुपयोग किया गया था. बैंक के आंतरिक सॉफ्टवेयर सिस्टम को स्विफ्ट से लिंक नहीं किया गया था. ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को मैन्युअल रूप से स्विफ्ट गतिविधि को लॉग इन करने की आवश्यकता होती है, अन्यथा लेन-देन बैंक की पुस्तकों में नहीं दिखाई देंगे. यह गतिविधि कर्मचारी द्वारा नहीं की गई थी इसलिए बैंक और नीरव मोदी के बीच लेन-देन का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था.

4. रोटोमैक बैंक घोटाला-

रोटोमैक ब्रांड नाम से कलम बनाने वाली कंपनी के प्रोमोटर विक्रम कोठारी ने कथित रूप से सात बैंकों के साथ 3,695 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है. इसने 7 बैंकों से 2,919 करोड़ रुपये के लोन की हेराफेरी की है और इस पर ब्याज समेत कुल बकाया राशि 3,695 करोड़ रुपये है.

इस घोटाले में इन बैंकों के रुपये फंसे हैं;

बैंक ऑफ़ इंडिया (754.77 करोड़ रुपये), इंडियन ओवरसीज बैंक (771.07 करोड़ रुपये), यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (458.95 करोड़ रुपये), बैंक ऑफ़ बड़ौदा (456.53 करोड़ रुपये), इलाहबाद बैंक (330.68 करोड़ रुपये), ओरिएंटल बैंक ऑफ़ कामर्स (97.47 करोड़ रुपये) और बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र (49.82 करोड़ रुपये) ने कर्ज दे रखे हैं.

5. कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड लोन घोटाला:-

यह घोटाला देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित देश के 14 बैंकों के एक संघ का है जिसमें 824 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. इसमें मुख्य आरोपी कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड है. इस कंपनी ने 824 करोड़ रुपये का लोन नही चुकाया जो कि बाद में “NPA” में बदल गया है. सीबीआई ने चेन्नई की कंपनी कनिष्क गोल्ड के खिलाफ मामला दर्ज किया है और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धोखाधड़ी की जांच शुरू कर दी है. इस कंपनी के निदेशक भूपेंद्र कुमार जैन और उनकी पत्नी नीता जैन देश छोड़कर भाग चुके हैं.

कनिष्क लिमिटेड को एसबीआई ने 240 करोड़ रुपए, पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने 128 करोड़ रुपए, बैंक ऑफ इंडिया ने 46 करोड़ रुपए, आईडीबीआई ने 49 करोड़ रुपए, सिंडीकेट बैंक ने 54 करोड़ रुपए, युनियन बैंक ने 53 करोड़ रुपए, यूको बैंक ने 45 करोड़ रुपए, सेंट्रल बैंक ने 22 करोड़ रुपए का कर्ज दिया है.

6. आर. पी. इन्फो सिस्टम्स बैंक घोटाला:- सीबीआई ने 515.15 करोड़ रुपये के घोटाले को अंजाम देने के लिए कंप्यूटर निर्माता आर. पी. इन्फो सिस्टम्स और इसके निदेशकों (शिवाजी पांजा, कौस्तव रे और विनय बाफना) पर 9 बैंकों के संघ से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी से लोन लेने का आरोपी बनाया है.

सीबीआई ने 28 फरवरी 2018 को कम्पनी के कोलकाता स्थित दफ्तर और अन्य आरोपियों के घरों पर छापेमारी की थी. जिन बैंकों के साथ इन्होंने घोटाला किया है उनके नाम हैं; स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर और जयपुर और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (अब SBI का हिस्सा), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और फेडरल बैंक.

7. सिम्भावली शुगर्स लोन घोटाला:- ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने सिम्भावली शुगर्स (Simbhaoli Sugars Limited) पर 200 करोड़ के लोन डिफॉल्ट का आरोप लगाया है. इस मामले में सीबीआई ने कंपनी के चेयरमैन, सीईओ और एमडी, सीएफओ और डायरेक्टर्स के खिलाफ केस दर्ज किया है. इस मामले में कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने कुल 8 ठिकानों पर छापेमारे की है. इन 8 जगहों पर छापेमारी की गई है उनमें एक उत्तर प्रदेश के हापुड, एक नोएडा और 6 ठिकाने दिल्ली के हैं.

simbhaoli sugars

एक अनुमान के मुताबिक देश में पिछले तीन सालों में 23000 करोड़ रुपये की संपत्ति के घोटाले सामने आये हैं जिससे देश की बैंकिंग व्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचा है इसी कारण देश के बैंकों का कुल NPA 10.25 लाख करोड़ रुपये हो गया है, इसके साथ ही देश की बैंकिंग व्यवस्था में लोगों का विश्वास भी कमजोर हुआ है.

अब जरुरत इस बात की है कि सरकार देश की बैंकिंग व्यवस्था में राजनीतिक दखल और क्रोनी कैपिटलिज्म से निपटने के लिए जरूरी नियम बनाये और उनका सख्ती से पालन कराये तभी देश में बैंकिंग घोटालों पर रोक लगाना संभव होगा.

Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
... Read More

आप जागरण जोश पर भारत, विश्व समाचार, खेल के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समसामयिक सामान्य ज्ञान, सूची, जीके हिंदी और क्विज प्राप्त कर सकते है. आप यहां से कर्रेंट अफेयर्स ऐप डाउनलोड करें.

Trending

Latest Education News