भारत में “गाय कर” क्या है और किन-किन राज्यों में लगाया जाता है?

भारत में आवारा पशुओं की देखभाल के लिए देश में कुछ राज्यों ने ‘काऊ सेस’ लगाने का फैसला किया है. इस कर की दर 2% से लेकर 20% तक है. यह कर मुख्य रूप से लक्ज़री वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाता है ताकि गरीब व्यक्तियों पर इसका प्रभाव कम पड़े. इस लेख में हम आपको इस कर से सम्बंधित कुछ तथ्यों के बारे में बता रहे हैं.
Jan 4, 2019 15:28 IST
    Cow Shelter

    दुनिया के बहुत से देशों में अजीब-गरीब कर लगाये जाते हैं. जैसे स्विट्ज़रलैंड में पालतू कुत्ते रखने पर टैक्स लगाया है, आयरलैंड में गायों के पादने से निकनले वाली मीथेन गैस पर कर लगाया जाता है और स्वीडन में बच्चों के ‘अजीब नाम’ रखने पर टैक्स लगाया जाता है. इसी प्रकार का एक टैक्स भारत में गायों के ऊपर लगाया जाता है जिसे 'गाय कल्याण टैक्स' या काऊ सेस कहा जाता है. आइये इस लेख में जानते हैं कि भारत के किन राज्यों में काऊ सेस लगाया जाता है और इसकी दर क्या होती है?

    1. पंजाब

    ज्ञातव्य है कि पंजाब में हर साल लगभग 1000 हजार लोगों की मौंत इन आवारा पशुओं से जुडी घटनाओं में हो जाती है इसके अलावा ये पशु फसल का भी बड़ी मात्रा में नुकसान करते हैं. इस समस्या का समाधान निकालने के लिए सरकार इनकी देखभाल के लिए काऊ सेस का कांसेप्ट लायी है.

    cow on road up

    भारत में गाय कर या काऊ सेस की शुरुआत इसी प्रदेश से शुरू की गयी थी. पंजाब के भटिंडा में गाय उपकर पहली बार 2009 में प्रायोगिक आधार पर लगाया गया था, जबकि इसे लगभग तीन महीने बाद मोहाली में लगाया गया था. पंजाब सरकार ने इस कर को पूरे राज्य में लगाने के लिए वर्ष 2014 में आदेश जारी कर दिया था. पंजाब की 154 नगरपालिका परिषदों में से 33 ने इस सम्बन्ध में प्रस्ताव पास कर दिया है. वर्ष 2016 तक इसे पंजाब की अन्य नगरपालिका परिषदों ने लागू कर दिया था.

    पंजाब के स्थानीय निकाय विभाग ने फोर व्हीलर की खरीद पर 1,000 रुपये, टू व्हीलर की खरीद पर 500 रुपये, वातानुकूलित मैरिज हॉल बुक करने पर 1000 रुपये, नॉन-एसी हॉल की बुकिंग पर 500 रुपये, तेल टैंकर पर 100 रुपये, बिजली की खपत पर 2 पैसे प्रति यूनिट, भारत के बनी शराब की हर बोतल और बीयर की बोतल पर 5 रुपये, भारत में बनी विदेशी शराब की हर बोतल पर 10 रुपये और सीमेंट की हर बोरी की खरीद पर 1 रुपये प्रति बैग के हिसाब से काऊ सेस लगाया है.

    पंजाब सरकार को काऊ सेस से हर साल 90 से 100 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है जिसे गायों के कल्याण जैसे उनके रहने, खाने और पीने और अन्य सुविधाओं पर खर्च किया जायेगा. हालाँकि काऊ सेस से सरकार को 23 जनवरी 2018 तक केवल 15 करोड़ रुपये मिले थे. ज्ञातव्य है कि पंजाब में 512 गौशालाएं हैं.

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    2. चंडीगढ़

    इस केंद्र शासित प्रदेश में गाय कर लगाने की शुरुआत पंजाब की तर्ज पर शुरू की गयी थी. चंडीगढ नगर निगम ने 29 जून 2018 से काऊ सेस लगाने की अनुमति दी थी.

    चंडीगढ़ निवासियों को चार-पहिया वाहनों की खरीद के लिए 500 रुपये गाय उपकर का भुगतान करना होगा, जबकि दुपहिया वाहनों की खरीद पर 200 रुपये गाय के उपकर के रूप में लिए जाते हैं. बिजली उपभोक्ताओं को गाय उपकर के रूप में प्रति यूनिट 2 पैसे का भुगतान करना होगा और ध्यान रहे कि चंडीगढ़ में लगभग 2 लाख बिजली उपभोक्ता हैं.

    इसके अलावा यहाँ पर देश में बनी शराब की हर बोतल पर 5 रुपये जबकि देश में बनी विदेशी शराब की हर बोतल पर 10 रुपये और बीयर की बोतल पर 5 रूपए का काऊ सेस लगाया जाता है.

    COW CESS punjab

    ज्ञातव्य है कि चंडीगढ नगर निगम के पास पशुओं के लिए 3 बाड़े (cattle pounds) हैं जिनमें लगभग 1000 पशुओं को रखा जा सकता है.

    चंडीगढ नगर निगम; भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत काऊ कर लगाकर वसूलता है, जबकि वाहनों पर काऊ सेस, वाहन कराधान अधिनियम, 1924 के तहत और बिजली पर काऊ सेस को पंजाब इलेक्ट्रिसिटी (ड्यूटी) अधिनियम, 1958 के आधार पर वसूला जा रहा है.

    3. राजस्थान

    राजस्थान सरकार ने जून 2018 में आदेश जारी किया था कि प्रदेश में 20% की दर से काऊ सेस लगाया जायेगा. इस उपकर को राजस्थान मूल्य वर्धित कर अधिनियम 2003 के प्रावधानों के तहत पंजीकृत उन डीलरों से वसूला जायेगा जो कि विदेशी शराब, देश में बनी विदेशी शराब, देश की व्हिस्की और बीयर को बेचते हैं. यह कर राजस्थान में जुलाई 23, 2018 से वसूला भी जा रहा है.

    पिछले साल के अपने बजट भाषण में, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विकास और गायों के संरक्षण और प्रसार के लिए काऊ अधिभार का प्रस्ताव दिया था.

    4. उत्तर प्रदेश:

    उत्तर प्रदेश में पशुओं के द्वारा बड़ी मात्रा में हरी फसल बर्बाद करने की समस्या के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में काऊ सेस लगाने का फैसला लिया है.

    cow in the fields

    उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 2 जनवरी 2018 को 2% 'गाय कल्याण उपकर' लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इस कदम का उद्देश्य राज्य के भीतर सभी जिलों, ग्राम पंचायतों, नगर पालिकाओं, नगर निगमों और अन्य स्थानीय निकायों में गायों के लिए आश्रयों के निर्माण के लिए धन की व्यवस्था करना है.

    स्थानीय निकायों को मनरेगा के तहत काम करवाकर गौशालाओं के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है.

    प्रत्येक जिले में, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में, न्यूनतम 1,000 पशुओं की क्षमता वाली एक गौशाला का निर्माण किया जाएगा और इसके लिए उत्पाद शुल्क, मंडी परिषद, लाभदायक निगमों और अन्य पर कुल 2% गौ कल्याण उपकर लगाया जाएगा. इसके अलावा कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को राज्य भर में गौशालाओं के निर्माण, रखरखाव के लिए वित्तीय मदद देनी होगी.

    सरकारी एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए टोल पर 0.5% की दर से उपकर लगाया जाएगा. उदाहरण के लिए, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे सड़क का टोल एक राज्य सरकार की एजेंसी द्वारा वसूला जाता है इस पर भी 0.5% की दर से उपकर लगाया जाएगा. सरकार ने राज्य भर में मंडी परिषदों पर लगाए गए एक प्रतिशत उपकर को भी दोगुना कर दिया है.

    इस लेख में सारांश में यह कहना ठीक होगा कि सरकार को वोट बैंक की राजनीति से दूर रहकर ही किसी समस्या के लिए समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए. कई राज्यों ने आवारा पशुओं के वध पर बिना सोचे समझे प्रतिबन्ध लगा दिया था जिसका परिणाम यह हुआ कि प्रदेशों में आवारा पशुओं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो गयी थी जिस कारण किसानों की फसलों का बहुत बड़ी मात्रा में नुकसान हुआ था साथ ही सड़क पर खड़े आवारा पशुओं के कारण भी हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है. जहाँ तक काऊ सेस के महत्व का प्रश्न है तो इससे बहुत ज्यादा कर नहीं मिलता है साथ ही लोगों पर करों का अतिरिक्त भार भी बढ़ता है.

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