विदेशी दौरे पर भारतीय प्रधानमंत्री के लिए कौन अनुवाद करता है?

Oct 11, 2018, 13:48 IST

ये हम सब जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी देश की ताकत को बढ़ाने के लिए विश्वभर में यात्रा करते रहते हैं. क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब प्रधानमंत्री विदेशी दौरे पार जाते हैं तो वहां की भाषा को समझने और अंग्रेजी में विदेशी नेताओं के साथ संवाद करने के लिए किसको लेके जाते हैं. कौन उनके लिए अनुवाद करता है और किस तकनीक की मदद से वो आसानी से अंग्रेजी में भाषण दे पाते हैं. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

Who translates for Indian Prime Minister in his foreign visit?
Who translates for Indian Prime Minister in his foreign visit?

श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं. वह 5 साल के कार्यकाल के लिए 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में चुने गए थे. मोदी, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सदस्य हैं, एक हिंदू राष्ट्रवादी और राइट विंग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के भी सदस्य हैं.

ये हम सब जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की ताकत को बढ़ाने के लिए विश्वभर में यात्रा करते रहते हैं. इसके अलावा पीएम मोदी विश्वभर के बड़े उद्योगपतियों को हिंदुस्तान में अपना व्यापार और उद्योग लगाने के लिए भी न्यौता देते हैं जो कि देश के लिए लाभकारी होता है. क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि प्रधानमंत्री जब विदेश यात्रा करते हैं तो वहां पर, उस देश की भाषा, संस्कृति को समझने के लिए, अंग्रेजी में विदेशी नेताओं के साथ संवाद करने के लिए इंटरप्रेटर को साथ में ले जाते हैं. उनके द्वारा दिए गए भाषण का भी अंग्रेजी और प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जाता है ताकि विषभर में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनकी बातें पहुंचाई जा सके.

साथ ही टैलिप्राम्प्टर तकनीक की मदद से भी अंग्रेजी भाषा में भाषण देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं कि प्रधानमंत्री के लिए ट्रांसलेटर कैसे चुना जाता है, कौन उनका भाषण का अनुवाद करता है, कैसे भारत में इंटरप्रेटर की जरुरत महसूस हुई, टैलिप्राम्प्टर तकनीक क्या है, इत्यादि.

विदेशी दौरे पर भारत के प्रधानमंत्री के लिए कौन अनुवाद करता है?

व्याख्या और अनुवाद के बीच का अंतर अभिव्यक्ति का तरीका है. दुभाषिया (इंटरप्रेटर) बोली जाने वाली भाषा को मौखिक रूप से अनुवाद करता है, जबकि अनुवादक (ट्रांसलेटर) लिखित पाठ से निपटते हैं, स्रोत टेक्स्ट को एक समझने योग्य और समकक्ष लक्ष्य पाठ में बदलते हैं. जैसे प्रधानमंत्री जी के भाषण को हिन्दी से इंग्लिश में ट्रांसलेट करके लिखना.

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हम आपको बता दें कि अंग्रेजी-से-हिंदी में अनुवाद करने के लिए दुभाषियों की कमी पहली बार विदेश मंत्रालय के सामने आई थी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जून के मध्य में अपनी पहली विदेश यात्रा पर भूटान गए थे. कई बार लोकसभा सचिवालय से दुभाषियों को प्रधानमंत्री के साथ विदेश में इन्टरप्रेट करने के लिए भेजा गया है. विदेश मंत्रालय संसाधनों के अनुसार भारतीय विदेश सेवा अधिकारी को भी पीएम की बैठक के दौरान दुभाषिया के रूप में अंग्रेजी में पिचिंग करने के लिए भेजा गया है.

Interpreter of Prime Minister Narendra Modi

उदाहरण के लिए: जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना पहला भाषण दिया था तब लोगों ने पिचिंग के रूप में गुरदीप चावला की आवाज़ सुनी थी. चावला ने मोदी जी के भाषण को बिना पहले देखे हुए उसी समय हिंदी से अंग्रेजी में व्याख्या किया था. ऐसे कई बार वे प्रधानमंत्री जी के साथ इन्टरप्रेटर के रूप में गई हैं. उन्होंने 1990 में भारतीय संसद में 21 वर्ष की उम्र में एक इंटरप्रेटर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी. 1996 में उनके पति के अमेरिका आने के कारण उनका करियर भारत में खत्म हो गया था. उन्होंने बताया कि संसद में उन्हें जो प्रशिक्षण मिला था वे सबसे अलग था.

इसी प्रकार बीजिंग में भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव (राजनीतिक) आर. मधु सुदान, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दुभाषिया के रूप में कार्य किए. हम आपको बता दें कि मधु सुदान भारतीय विदेश सेवा के 2007 बैच से हैं और चीन में ही इन्होंने अपने अधिकांश पेशेवर करियर को बिताया है. 2009 से 2011 तक चीन में भारतीय दूतावास के रूप में प्रशिक्षण के बाद विदेश में उनकी पहली पोस्टिंग थी. सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास में दो साल की सेवा करने के बाद, उन्हें बीजिंग में भारतीय दूतावास के दूसरे सचिव के रूप में 2013 में चीन में वापस पोस्टिंग की गई.

प्रधानमंत्री मोदी जी अपने अधिकांश विदेशी कार्यक्रमों के दौरान हिंदी में बात करना पसंद करते हैं और ट्रांसलेटर / इंटरप्रेटर की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है. विदेश मंत्रालय की निदेशक निलाक्षी साहा सिन्हा, जो हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली और फ्रेंच भाषा में परिचित हैं, प्रधानमंत्री जी की पसंदीदा दुभाषियों में से एक हैं.

तो अब आपको ज्ञात हो गया होगा कि विदेश मंत्रालय या भारतीय विदेश सेवा का अधिकारी जो कि दूसरे देश की भाषा और संस्कृति से परचित होता है, प्रधानमंत्री अपने ट्रांसलेटर या इंटरप्रेटर के रूप में अपनी सुविधा के अनुसार चुनते हैं. इसलिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विदेश मंत्रालय के दुभाषियों के कैडर में संयुक्त सचिव स्तर के बराबर दो पदों के निर्माण की मंजूरी दे दी है. यह निर्णय दुभाषियों के कैडर की विशेषज्ञता बढ़ाने और दुभाषियों के प्रशिक्षण के लिए विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा. वैश्विक स्तर पर भारत सरकार के महत्वपूर्ण स्तर पर उच्चस्तरीय द्विपक्षीय और बहुपक्षीय भागीदारी की पृष्ठभूमि में व्याख्या के लिए बढ़ती आवश्यकताओं को संबोधित करने में यह उपाय महत्वपूर्ण होगा.

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अब टैलिप्राम्प्टर तकनीक के बारे में अध्ययन करते हैं

What is Teleprompter Technique

टैलिप्राम्प्टर को आमतौर पर एक प्रोम्प्टर या ऑटोक्यू भी कहते है. यह एक ऐसा उपकरण है जो किसी वक्ता को दर्शकों के साथ आँखों का संपर्क बनाए रखते हुए स्क्रिप्ट पढ़ने या भाषण देने में सहायता करता है. इससे वक्ता को कागज़ पर नोट्स बनाने की आवश्यकता नहीं होती है और जब वह भाषण देता है तो ऐसा प्रतीत होता है कि वह भाषण बिना कहीं से देखे और रुके हुए बोल रहा है. इस तकनीक का इस्तेमाल अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी अपने भाषण के दौरान करते थे. PSLV के लांच के वक्त भी मोदी जी ने इसी तकनीक की मदद से अंग्रेजी और हिन्दी दोनों भाषाओं में इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी थी. इसके अलावा कई देशों में भी उन्होंने इस अद्भुत तकनीक का इस्तेमाल कर लंबी-लंबी भाषणें दी हैं जैसे कि एक बार गुजरात में उन्होंने अंग्रेजी भाषा में 11 पन्ने का भाषण दिया था, जो इस तकनीक के कारण ही संभव हो पाया था.

टैलिप्रोम्प्टर का उपयोग परंपरागत रूप से दो मुख्य कार्यों के लिए किया जाता है - टीवी प्रस्तुतकर्ता कैमरे में देखते हुए स्क्रिप्ट पढ़ते समय इस तकनीक का उपयोग करते हैं. इसके अलावा राजनेता और सार्वजनिक सभाओं में बोलने के लिए भी टैलिप्रोम्प्टर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है जैसे कि पटकथा वाले वीडियो के निर्माण में, पावरपॉइंट प्रस्तुतियों में एवं मंच पर गायकों द्वारा अपनी लाइनों को याद रखने में इत्यादि.

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टैलिप्रोम्प्टर तकनीक कैसे काम करती है?

How Teleprompter technique works

टैलिप्रोम्प्टर में आमतौर पर दो दर्पण होते हैं जो अर्ध-पारदर्शी होते हैं, प्रत्येक दर्पण को 45 डिग्री कोण पर एक छोटे एवं पतले स्टैंड पर रखा जाता है. वक्ता को पढ़ने में सुविधा हो इसके लिए टेक्स्ट को मॉनिटर की मदद से दर्पण पर दिखाया जाता है.

दर्पण के निचले हिस्से पर एक फ्लैट एलसीडी मॉनिटर होती है, जिसे कमरे में  ऊपर यानी छत की तरफ मुंह करके रखा जाता है. यह मॉनिटर आमतौर पर 56 पीटी से 72 पीटी, फ़ॉन्ट में भाषण के शब्दों को प्रदर्शित करता है. आमतौर पर एक ऑपरेटर वक्ता की गति को नियंत्रित करता है, जो वक्ता की बातों को सुनता है और उसी के अनुसार मॉनिटर को नियंत्रित करता है.

अगर वक्ता बोलते समय किसी शब्द को भूल जाता है या फिर किसी वाक्य का मतलब गलत हो जाता है तो उसको वापस से अपने वाक्य या शब्द को सही करने का मौका भी यह डिवाइस देता है. यहां तक कि जब वक्ता अपने भाषण के दौरान दर्शकों की ओर या फिर कैमरा की ओर देखता है तो डिस्प्ले स्क्रीन पर स्थित एक क्यू-मार्कर स्क्रिप्ट की वर्तमान स्थिति का एक त्वरित संकेत देता है और बताता है कि स्क्रिप्ट को बोलते वक्त कहां पर छोड़ा गया था.

इस प्रकार वक्ता आसानी से दर्पण की मदद से अपना भाषण पढ़ पाता हैं, जबकि दर्शकों को यह दर्पण शीशे का एक टुकड़ा जैसा दिखता है क्योंकि उस दर्पण पर अपारदर्शी पदार्थ की कोटिंग होती है. अपने भाषण के दौरान, वक्ता बस एक टैलिप्रोम्प्टर से दूसरे में देखता है और ऐसा लगता है कि वह भाषण देते समय दर्शकों को देख रहा हैं.

तो अब आप जान गए होंगे कि इंटरप्रेटर या ट्रांसलेटर कौन होते हैं, इनकी कब आवश्यकता पड़ती है, प्रधानमंत्री विदेशी दौरे में अपने साथ अनुवाद करने के लिए किसको ले जाते हैं, किस प्रकार वे अंग्रेजी में उनके भाषण का अनुवाद किया जाता है, अंग्रेजी में भाषण देते वक्त वे किस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं इत्यादि.

Shikha Goyal is a journalist and a content writer with 9+ years of experience. She is a Science Graduate with Post Graduate degrees in Mathematics and Mass Communication & Journalism. She has previously taught in an IAS coaching institute and was also an editor in the publishing industry. At jagranjosh.com, she creates digital content on General Knowledge. She can be reached at shikha.goyal@jagrannewmedia.com
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