योग वह क्रिया है, जिसके माध्यम से तन का मिलन मन से कराया जाता है। इसके माध्यम से तन में नई ऊर्जा का संचार किया जा सकता है। भारत शुरू से ही योग में विश्व गुरु रहा है।
यही वजह है कि भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को योग दिवस मनाए जाने का प्रस्ताव रखने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाई और अब हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया जाता है। ऐसे में भारत में एक शहर ऐसा भी है, जिसे योग की राजधानी भी कहा जाता है। कौन-सा है यह शहर, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस शहर को कहा जाता है योग की राजधानी
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि आखिर भारत में किस शहर को विश्व में योग की राजधानी के रूप में पहचान मिली हुई है। आपको बता दें कि उत्तराखंड में स्थित ऋषिकेश शहर को योग की राजधानी भी कहा जाता है।
क्यों कहा जाता है योग की राजधानी
ऋषिकेश को "योग की राजधानी" कहने के कई महत्वपूर्ण और ठोस कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
ऋषि-मुनियों की तपस्थली
ऐसा मान्यता है कि यह स्थान कई ऋषि-मुनियों तप स्थली रहा है। इनके द्वारा यहां ध्यान और योग का अभ्यास करने के साथ-साथ ज्ञान प्राप्त किया गया।
गंगा नदी का पवित्र सान्निध्य और हिमालय की तलहटी
ऋषिकेश शहर पवित्र गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है। ऐसे में यहां गंगा का प्रवाह और हिमालय की पृष्ठभूमि इसे योग और ध्यान के लिए एक उपयुक्त जगह बनाती है। यहां का शुद्ध वातावरण योगियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
आश्रमों और योग विद्यालयों का केंद्र
ऋषिकेश में बड़ी संख्या में योग आश्रम, ध्यान केंद्र व योग शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र मौजूद हैं। इन संस्थानों में योग की विभिन्न परंपराओं और शैलियों में शिक्षा प्रदान की जाती है।
बीटल्स का आगमन और अंतर्राष्ट्रीय पहचान (1968)
साल 1968 में यहां प्रसिद्ध ब्रिटिश रॉक बैंड 'द बीटल्स' ने महर्षि महेश योगी के आश्रम में योग और पारलौकिक ध्यान का अभ्यास किया था। इससे ऋषिकेश को वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने में मदद मिली और पश्चिमी सभ्यता का ध्यान भारत में योग की ओर गया। आज इस आश्रम को बीटल्स आश्रम के नाम से जाना जाता है।
शांत और आध्यात्मिक वातावरण
ऋषिकेश का शांत और आध्यात्मिक वातावरण यहां आने वाले सैलानियों को आकर्षित करता है। ऐसे में शहरों में तनाव भरी जीवनशैली जी रहे कई लोग यहां मौजूद केंद्रों में मन की शांति के लिए योगाभ्यास के लिए पहुंचते हैं। वहीं, यहां के आश्रम में होने वाले गंगा आरती और ध्यान एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
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