सच्चाई का सामना| Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 10

Jan 7, 2020, 11:20 IST

“सफलता की राह पर” सीरीज़ के इस दसवें वीडियो में मोटिवेशनल स्पीकर और विश्वविख्यात लेखक शिव खेड़ा जी हमें अपने जीवन में सच्चाई का सामना करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. हमें अपने दिन-प्रतिदिन के व्यवहार में स्वेच्छा से वैधता अर्थात कानून के बजाय सच्चाई और ईमानदारी या नैतिकता को प्राथमिकता देनी चाहिए. इससे हमें मन की शांति और सफल जीवन के लिए मजबूत आधार मिलेगा.

इस वीडियो में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें कह रहे हैं कि हम लोगों के पास सच का सामना करने की ताकत होनी चाहिए. हमारे बीच कुछ लोग ऐसे होते हैं जो झूठी तारीफ सुनकर अपने जीवन में नुकसान उठाना ज्यादा पसंद करते हैं बजाय इसके कि, अपनी सच्ची निंदा सुनकर उससे लाभ उठा लें. हम लोगों को अपने जीवन में सच्चाई का सामना जरुर करना ही चाहिए तभी हम अपने जीवन में आने वाली सभी किस्म की चुनौतियों का सामना कर सकेंगे और अंततः अपने कार्यक्षेत्र में सफलता हासिल कर लेंगे. लेकिन अगर हम सच्चाई का सामना करने से कतराएंगे तो देर-सवेर न सिर्फ हमारे सामने वही सच्चाई दुबारा आ जायेगी बल्कि हम अपनी जिम्मेदारियां भी ठीक तरीके से नहीं निभा सकेंगे और अंततः निराशा, तनाव और परेशानी ही हमारे हाथ लगेगी. इस वीडियो में शिव खेड़ा जी हमारे सामने सच्चाई और ईमानदारी के कुछ खास उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं. 

  • सिंगापुर के टैक्सी ड्राईवर की दिल को छू लेने वाली ईमानदारी

शिव खेड़ा जी हमारे साथ अपना एक 20 साल पहले का उदाहरण साझा कर रहे हैं. वे कह रहे हैं कि 20 साल पहले उन्होंने सिंगापुर में अपना एक दफ्तर खोला था. हवाईअड्डे से निकलते ही उन्होंने एक बिजनेस कार्ड टैक्सी ड्राईवर को दिया ताकि वह उन्हें उनके गंतव्य स्थान तक छोड़ सके. खेड़ा जी आगे कहते हैं कि ‘किसी भी देश में हवाईअड्डे से निकलने के बाद हमें जो पहला आदमी मिलता है वह तकरीबन टैक्सी ड्राईवर ही होता है.’ उस टैक्सी ड्राईवर ने उन्हें एक भवन के पास ले जाकर, भवन के 2-3 चक्कर काटकर आखिर अपनी टैक्सी उस भवन के प्रवेश-द्वार पर रोक दी. उस टैक्सी के मीटर पर 11 डॉलर दिख रहे थे. जब खेड़ा जी ने उस टैक्सी ड्राईवर को 11 डॉलर दिए तो उसने सिर्फ 10 डॉलर ही लिए. तब शिव खेड़ा जी ने उस टैक्सी के ड्राईवर हेनरी से इसका कारण पूछा तो उसने बड़ा अच्छा जवाब दिया.

ड्राईवर ने कहा कि, एक टैक्सी ड्राईवर होने के नाते आपको अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचाना मेरा फर्ज़ है. लेकिन क्योंकि यह भवन मैंने पहले कभी देखा नहीं था, इसलिए मुझे इस भवन के 2-3 अतिरिक्त चक्कर लगाने पड़े. अगर मैं आपको सीधा इस भवन में ले आता तो टैक्सी के मीटर पर 10 डॉलर ही आते. लेकिन अब कुछ ज्यादा टैक्सी चलने की वजह से टैक्सी के मीटर पर 11 डॉलर दिख रहे हैं. हालांकि कानूनी तौर पर मैं आपसे 11 डॉलर ले सकता हूं पर ईमानदारी के तौर पर मुझे सिर्फ 10 डॉलर ही लेने चाहिए. अब शिव खेड़ा जी हमें समझा रहे हैं कि वह 8वीं पास ड्राईवर कानून और ईमानदारी में फर्क समझता है और ईमानदारी से अपना काम करता है. हमारे वकीलों और जजों को उससे कानून और ईमानदारी का फर्क समझना चाहिए. जब तक हम सच्चाई का सामना करने के लिए तैयार नहीं होंगे, तब तक हमारे देश का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता. शिव खेड़ा जी अपनी यह बात फिर दोहरा रहे हैं कि कई लोग झूठी तारीफ़ सुनकर बर्बाद होना ज्यादा पसंद करेंगे बजाए सच्ची निंदा से लाभ उठाने के और यह काफी महत्वपूर्ण मुद्दा है. 

  • ज्यादा पैसे के लेन-देन के संबंध में शिव खेड़ा जी का व्यक्तिगत अनुभव

इस वीडियो में आगे विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें साल 2012 के अपने एक व्यक्तिगत अनुभव के बारे में बता रहे हैं. उनके एक ग्राहक (क्लाइंट) ने खेड़ा जी को लीडरशिप प्रोग्राम के लिए बुलाया. उस क्लाइंट ने शिव खेड़ा जी को 79 हजार रुपये भेजने थे. गलती से खेड़ा जी के खाते में उस क्लाइंट ने 11 मिलियन रुपये अर्थात सवा-करोड़ रुपये भेज दिए. यहां शिव खेड़ा जी कह रहे हैं कि उनके साथ 40 साल में सिर्फ एक बार ही ऐसा हुआ है. शिव खेड़ा जी के अकाउंटेंट ने जब बैलेंस चेक किया तो वह बहुत ज्यादा था, फिर अच्छी तरह जांच करने पर अकाउंटेंट को पता चला कि यह पैसा मिडल-ईस्ट में स्थित मस्कट से आया है. उस कंपनी का नाम शिव खेड़ा जी ने अपनी नई किताब ‘और सफल बनें’ में दिया है. जब अकाउंटेंट ने देखा कि काफी पैसा गलती से आ गया है तो वह शिव खेड़ा जी से दफ्तर में मिलकर पूछता है कि, ‘क्या किया जाए इन पैसों का?’ अब शिव खेड़ा जी हमसे पूछ रहे हैं कि ‘क्या अकाउंटेंट को मालूम नहीं है कि उस पैसे का क्या करना चाहिए?’ उसने शिव खेड़ा जी से क्यों पूछा यह प्रश्न?....शिव खेड़ा जी के मुताबिक, वह अकाउंटेंट उनकी नीयत परख रहा था. तब शिव खेड़ा जी ने अपने अकाउंटेंट से पूछा कि वे तो अक्सर यात्रा पर ही रहते हैं और अगर कभी वे दफ्तर में न हों तो ऐसी किसी स्थिति में अकाउंटेंट क्या करेंगे? इस तरह खेड़ा जी ने अपने अकाउंटेंट की नीयत की परख की. फिर शिव खेड़ा जी ने कहा कि, ‘पहले तो आप उस कंपनी को खबर भेज दो कि उन्होंने गलत पैसे भेज दिए हैं. उन्हें तो मालूम ही नहीं है कि उन्होंने ज्यादा भुगतान किया है. फिर अपने बैंक में लिखित निर्देश दो जिसके बिना बैंक से पैसा हस्तांतरित नहीं होगा.’ शिव खेड़ा जी के दफ्तर से जब उस कंपनी को फ़ोन किया गया तो वहां से घबराहट के कारण बार-बार फ़ोन आने लगे. वह एक बिलियन डॉलर की कंपनी है फिर भी, शिव खेड़ा जी के मुताबिक, 11 मिलियन रुपये तो आखिर 11 मिलियन रुपये ही हैं. शिव खेड़ा जी ने उनसे कुछ समय मांगा और जब पैसा उस कंपनी के खाते में अंतरित हो गया तो खेड़ा जी ने उस कंपनी से पूछा कि आप लोग क्यों इतना घबराए हुए थे? आपको तो मालूम ही नहीं था, हमने ही आपको पैसे की गड़बड़ी के बारे में बताया है. तब कंपनी वालों ने जवाब दिया कि, दुनिया के इस हिस्से में कोई कानून व्यवस्था काम नहीं करती है. हमारी यह सोच थी कि, ‘पैसा मिलेगा भी या नहीं मिलेगा? ये पैसा मिलेगा तो कब मिलेगा? आप कई दिन तक हमारा पैसा रख सकते थे. यह रकम भी कुछ ज्यादा थी.’ तब शिव खेड़ा जी के दफ्तर से उस कंपनी को एक चिठ्ठी भेजी गई जिसमें लिखा था कि, शिव खेड़ा जी के जितने भी प्रोग्राम हैं, वे सभी सच्चाई और ईमानदारी पर आधारित होते हैं. उनके दफ्तर में भी पूरी ईमानदारी से काम किया जाता है और उनके दफ्तर में ईमानदारी रकम के हिसाब से नहीं नापी जाती. रकम बड़ी हो या कम, ईमानदारी तो ईमानदारी ही रहती है. अगर रकम से ईमानदारी नापी जाए तो इसका मतलब है कि वह ईमानदारी नहीं है बल्कि हमारा रेट फर्क है. तब उस कंपनी ने अपनी गलती मानते हुए शिव खेड़ा जी के दफ्तर में एक ‘धन्यवाद-पत्र’ भेजा.

  • हमें 24 कैरेट शुद्धता हासिल करने के लिए हमेशा करनी चाहिए कोशिश

इस वीडियो के आखिर में शिव खेड़ा जी हमसे यह पूछ रहे हैं कि आखिर वे हमसे अपना यह व्यक्तिगत अनुभव क्यों साझा कर रहे हैं? फिर वे कबूल कर रहे हैं कि जब हम चरित्र और ईमानदारी की बात करते हैं तो क्या वे 24 कैरेट पवित्र हैं? वे कबूल करते हैं कि वे 24 कैरेट खरे या पवित्र नहीं हैं और न ही वे किसी ऐसे इंसान को जानते हैं जो 24 कैरेट पवित्र है. लेकिन फिर वे हमसे पूछते हैं कि, हम उनसे इस बात पर जरुर सहमत होंगे कि 22 कैरेट और 8 कैरेट में बहुत फर्क होता है. फिर वे आगे हमसे पूछते हैं कि क्या उन्हें 22 कैरेट पर ही खुश हो जाना चाहिए?.....नहीं. आदमी की हमेशा यह कोशिश होनी चाहिए कि उसे 24 कैरेट तक पहुंचना है. जिंदगी एक सफर है और हम रोज़ाना कुछ सीखते रहते हैं ताकि अपने जीवन में सच्चाई, ईमानदारी, सफलता और सुकून हासिल कर सकें.     

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Education Desk

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