Positive India: कभी थे एक नाइट वॉचमैन, कड़ी मेहनत से अब बन गए हैं IIM में असिस्टेंट प्रोफेसर - जानें रंजीथ रामचंद्रन की उल्लेखनीय कहानी

Apr 15, 2021, 13:18 IST

28 वर्षीय रंजीथ रामचंद्रन BSNL टेलीफोन एक्सचेंज कासरगोड़ में नाईट वॉचमन की नौकरी करते थे और दिन में कॉलेज की पढ़ाई करते थे। इसके बाद उन्होंने IIT से Phd. की डिग्री भी हासिल की। परन्तु उनका यह सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। 

Positive India: कभी थे एक नाइट वॉचमैन, कड़ी मेहनत से अब बन गए हैं IIM में असिस्टेंट प्रोफेसर - जानें रंजीथ रामचंद्रन की उल्लेखनीय कहानी
Positive India: कभी थे एक नाइट वॉचमैन, कड़ी मेहनत से अब बन गए हैं IIM में असिस्टेंट प्रोफेसर - जानें रंजीथ रामचंद्रन की उल्लेखनीय कहानी

कहते हैं की इरादे मज़बूत हो और कुछ कर दिखने की चाह हो तो कोई भी मंज़िल पाना मुमकिन है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है केरल के कासरगोड जिले के रहने वाले  रंजीथ रामचंद्रन ने। हाल ही में रंजीथ ने अपने फेसबुक पेज पर अपनी गार्ड से प्रोफेसर तक की यात्रा का उल्लेख किया। कड़ी मेहनत और लगन से पढ़ने में विश्वास रखने वाले रंजीथ ने देश के युवाओं को सीख और प्रेरणा देने के लिए अपनी इस चुनौतीपूर्ण परन्तु सफल यात्रा को शेयर किया है। आइये जानते हैं कौन है ये 28 वर्षीय सुपर प्रोफेसर। 

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दिन में जाते थे कॉलेज, रात में करते थे गार्ड की नौकरी 

फोटो: रंजीत रामचंद्रन का घर 

सोशल मीडिया पर शेयर किये गए पोस्ट में रंजीथ बताते हैं कि हाई स्कूल में वह अच्छे अंकों से पास हुए थे। हालांकि परिवार के हालत देखते हुए उन्हें आगे पढ़ने से ज़्यादा नौकरी कर परिवार की मदद करने की चिंता थी। इसी के चलते उन्हें कासरगोड टेलीफोन एक्सचेंज में नाईट गार्ड की नौकरी मिल गयी और इसी के साथ मिला पढ़ने का एक अवसर। जहाँ होनहार छात्र होने के बावजूद रंजीथ को पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी इस नाईट ड्यूटी ने उन्हें पढ़ने का एक मौका दिया और उन्होंने सेंट पॉल कॉलेज में दाखिला लिया। रंजीथ दिन में कॉलेज अटेंड करते थे और रात में गार्ड की नौकरी करते थे। सफर मुश्किल ज़रूर था परन्तु रंजीथ ने गार्ड की नौकरी के साथ-साथ ही सफलतापूर्वक इकोनॉमिक्स होंर्स की डिग्री हासिल की। 

IIT मद्रास से की Phd. की पढ़ाई 

कासरगोड ने पढ़ाई पूरी करने के बाद रंजीथ ने IIT मद्रास में Phd की डिग्री के लिए दाखिला लिया। हालांकि वहाँ उन्हें कई चुनोतियों का सामना करना पड़ा। रंजीथ को केवल मलयालम भाषा में ही बात करना आता था जिसकी वजह से उन्हें पढ़ने और दूसरे लोगों से बात करने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा। अपने अनुभव के बारे में वह बताते हैं कि एक समय था जब उन्होंने पीएचडी कार्यक्रम छोड़ने के बारे में सोचा क्योंकि वह पाठ्यक्रम में असक्षम थे क्योंकि वह केवल मलयालम जानते थे। लेकिन उनके गाइड डॉ सुभाष ने  उनका हौसला बढ़ाया और डिग्री बीच में ना छोड़ने की सलाह दी। उनके प्रोत्साहन से रंजीथ ने खूब मेहनत से पढ़ाई की और 2020 में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की।  

IIM रांची के लिए चुने गए असिस्टेंट प्रोफेसर 

फरवरी 2021 में रंजीथ बेंगलुरु के क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयनित किए गए। रंजीथ को अब भारत के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में से एक IIM रांची में सहायक प्रोफेसर के रूप में चुना गया है। केरल के वित्त मंत्री टीएम थॉमस इसाक ने भी सोशल मीडिया पर रंजीथ को बधाई दी और कहा कि वह सभी के लिए एक प्रेरणा हैं।

रंजीथ कहते हैं, "आसमान छूने का सपना देखें, और एक दिन उन सपनों में पंख लग जाएंगे जो आपको जीत तक ले जाएंगे।"

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