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नौकरी की तलाश कर रहे छात्र, इन पांच बातों को ध्यान में रखकर पहुंचे कामयाबी के शिखर तक

Feb 19, 2018 17:02 IST
    इन पांच बातों को ध्यान में रखकर पहुंचे कामयाबी के शिखर तक
    इन पांच बातों को ध्यान में रखकर पहुंचे कामयाबी के शिखर तक

    हमारे देश भारत में प्रति वर्ष कई लाख छात्र ग्रेजुएट्स और पोस्ट-ग्रेजुएट्स की डिग्री लेकर अच्छी जॉब की ख्वाइश लेकर जॉब की तलाश करते हैं. वस्तुतः आज़कल फ्रेशर्स के लिये जॉब की तलाश करना एक चुनौती पूर्ण कार्य है.

    लगभग सभी ग्रेजुएट्स और पोस्ट-ग्रेजुएट्स एक प्रभावी और आकर्षक रिज्यूमे बनातें है और लगभग सभी  ऑनलाइन जॉब पोर्टल्स में अपना रिज्यूमे अपलोड भी करते हैं. लेकिन उन्हें इंटरव्यू के कॉल्स नहीं आते, और जॉब पानें के लिये सबसे ज़्यादा जरूरी चीज अगर कुछ है तो वह है इंटरव्यू के लिये कॉल आना.

    अतः नौकरी के इंटरव्यू के लिये कॉल्स नहीं आने के कुछ बड़े कारण इस प्रकार होतें हैं

    • आपका रिज्यूमे सही ढंग से नहीं बनाया गया है या अपनी क़्वालिफिकेशन्स को आपने अपने रिज्यूमे में सही से नहीं दर्शाया हैं

    • आप अपनी क़्वालिफिकेशन्स के हिसाब से सही जगह एप्लाई नहीं कर रहें हैं.

    • जिन कंपनियों में आप अप्लाई कर रहें हैं वहाँ बहुत भारी मात्रा में रिज्यूमे पहले से ही पड़ी हैं.

    ये कुछ इंटरव्यू के लिये कॉल्स नहीं आने के आम कारण हैं.

    आइये हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि नौकरी पाने के लिये हमें क्या करना चाहिये और किन बातों का ध्यान रखना चाहिये ?

    सभी जॉब पोर्टल्स पर अपनी प्रोफाइल बनाएं

    जॉब सर्च शुरू करने से पहले सबसे ज़रूरी काम यह है कि आप अपना रिज्यूमे बनाएं और इस बात का ध्यान रखें  कि आपके रिज्यूमे में कोई ग़लती न हो, इसलिये अपने रिज्यूमे को कई लोगों से चेक भी करायें.तदुपरांत प्रत्येक जॉब पोर्टल्स में अपनी प्रोफाइल बनाये और अपना रिज्यूमे अपलोड करें.

    अपनी प्रोफाइल बनाते समय अपनी क़्वालिफिकेशन्स और स्किल्स की जानकारी सही जानकारी दें. अगर आप प्रोफाइल बनाते समय अपने स्किल्स के (की-वर्ड) सही से नहीं सेलेक्ट करते हैं तो हो सकता है आपको कॉल नहीं आये .

    ध्यान रखिये कि हर जॉब पोर्टल्स में लाखों की संख्या में प्रोफाइल और रिज्यूमे पड़े होते हैं. जब भी कंपनियाँ इन जॉब पोर्टल्स पर किसी ख़ास स्किल सेट वाले रिज्यूमे को ढूढ़ती हैं तो, ऐसी प्रोफाइल जिनमें वो स्किल सेट होगा और जो सबसे हाल ही में अपडेट हुई होंगी वो सबसे ऊपर होती हैं .

    गोरिल्ला युद्ध वाली रणनीति अपनाएं

    अगर अपना रिज्यूमे सभी जॉब पोर्टल पर डालने के बावजूद भी आपके पास कॉल नहीं आ रहे हैं तो आपको गोरिल्ला युद्ध वाली रणनीति अपनानी चाहिये. इस रणनीति के अनुसार, आपको किसी ख़ास जगह में जितनी अच्छी कंपनियाँ है उन्हें सेलेक्ट करना चाहिए और फिर उनकी वेबसाइट के जॉब सेक्शन में जाकर अपना रिज्यूमे अपलोड करना चाहिए. अगर संभव हो तो उनके द्वारा उपलब्ध फ़ोन नंबर पर कॉल करके वेकेंसीज के बारें में पता कर सकते हैं और फिर अपना रिज्यूमे उन्हें भेज सकते हैं. इस तरीके से आपके पास इंटरव्यू कॉल्स आने की संभावना और अधिक बढ़ जाएगी. कई बार कंपनियों में वैकैंसीज़ होती हैं पर किसी वजह से उन्होंने इन वैकैंसीज़ के बारें में घोषणा नहीं की होती हैं.

    नेटवर्क का दायरा बढ़ाएं

    जॉब सर्च में गोरिल्ला रणनीति अपनानें के साथ-साथ यह भी ज़रूरी है कि आप अपने प्रोफेशनल नेटवर्क के दायरे को बढ़ाते रहें. अपने भाई-बहन, मित्र, मित्रों के मित्र या रिश्तेदार आदि सभी लोगों को अपने जॉब सर्च के बारें में बताएं. क्या पता किसी से आपको सही सुझाव मिल जाये या कहीं वैकैंसीज़ के बारे में पता चल जाये ? फेसबुक और ट्विटर में ऐसे कई पेज  हैं जो अक्सर कंपनियों में होने वाले वाक-इन इंटरव्यू, वैकैंसीज़, जॉब फ़ेयर के बारे में जानकारी पोस्ट करते रहते हैं. दिल्ली और बैंगलोर जैसे बड़े शहरों में लगभग हर समय वाक-इन इंटरव्यू चलते रहते  हैं. ऐसे में ये फ़ेसबुक पेज बहुत मददगार साबित होते हैं.

    जॉब सर्च के दौरान आपको कभी भी इंटरव्यू कॉल आ सकता हैं और इस दौरान हर एक कॉल आपके लिये महत्वपूर्ण है. इसलिये आप हमेशा इंटरव्यू के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें. 

    निरंतर आवेदन करते रहें

    इन सभी प्रयासों के बाद हो सकता है आपको सफ़लता मिले और यह भी हो सकता है कि सफ़लता न मिले. आपके पास इंटरव्यू के लिये अगर कॉल्स आयें तो भी अप्लाई करना हरगिज न छोड़े. अगर एक से ज्यादा कम्पनीज़ में आपका सेलेक्शन हो जायेगा तो आपको कई ऑफर्स में सबसा अच्छा ऑफ़र चुनने का अवसर प्राप्त होगा.

    असफलता के कारणों को जानने की कोशिश करे

    अगर बहुत प्रयास करने के बाद भी आपको सफलता नहीं मिल रही है तो आप कुछ समय के लिए इंटर्नशिप पाने की कोशिश करें. बहुत सारी ऐसी कम्पनियाँ हैं जो फ्रेशेर्स को इंटर्न की तरह रख लेती है. इंटर्नशिप की अवधि 2 से 6 महीने की होती है.यूँ तो इंटर्नशिप के दौरान इंटर्न को बहुत कम पैसे (या स्टाईपेंड) मिलते हैं, लेकिन इंटर्नशिप का अनुभव जॉब सर्च में बहुत काम आता है, ज्यादातर कम्पनियाँ  इंटर्नशिप के एक्सपीरियंस को प्रमुखता देती हैं.

    अतः उम्मीद है कि इन पांच बातों को ध्यान में रखकर तथा इस पर पूरी तरह अमल कर छात्र अवश्य ही अपनी नौकरी पाने के सपने को साकार कर पाएंगे.

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