काम और पढ़ाई में ऐसे बैठाएं सामंजस्य; शादी नहीं होगी करिअर में बाधक

आज के भौतिकवादी युग में अधिकतर युवाओं की सोच पहले नौकरी और फिर शादी वाली हो गयी है.

Created On: Apr 16, 2018 10:35 IST
Modified On: Sep 24, 2018 13:00 IST
सरकारी नौकरी की तैयारी
सरकारी नौकरी की तैयारी

आज के भौतिकवादी युग में अधिकतर युवाओं की सोच पहले नौकरी और फिर शादी वाली हो गयी है. होनी भी चाहिए क्योंकि शादी के बाद जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती है और बहुत सी जिम्मेदारियों को कोई भी व्यक्ति बिना आर्थिक रूप से सबल हुए बगैर पूरी नही कर सकता है. शादी के बाद हमारे जीवन का बहुत समय जिम्मेदारियों को निभाते हुए व्यतीत हो जाता है. इसलिए यह स्वाभाविक सी मानसिकता है कि शादी के बाद जीवन में नौकरी पाने के लिए पढाई का समय नही मिल पायेगा. पर ऐसी बात नही है कि शादी के बाद नौकरी की तैयारी नही की जा सकती है. समाज में हमें कई ऐसे लोगों के उदाहरण मिल जायेंगे जिन्होंने शादी के बाद अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए सरकारी नौकरी की तैयारी जारी रखी और सफल होकर एक मिसाल कायम किया. हम आपको इस आलेख के माध्यम से बताने का प्रयास करेंगे कि कैसे शादी के बाद भी हम अपनी तैयारी जारी रख सरकारी नौकरी प्राप्त कर सकते हैं.

सरकारी नौकरी हर युवा का एक सपना:

एक वक़्त था जब हर युवा का सपना और निर्दिष्ट सरकारी नौकरी पाना हुआ करता था. निजी क्षेत्रों में नौकरी तब मज़बूरी हीं हुआ करती थी किन्तु बाद में सरकारी नौकरी में भ्रष्टाचार, सांठ-गाँठ, पहुँच-पैरवी आदि कारणों से लोगों का रुझान इस तरफ कम होता गया. सरकारी नौकरी में नाम मात्र की तनख्वाह से भी इसका क्रेज़ लोगों के दिलों से उतरता चला गया जबकि निजी क्षेत्रों में अच्छी खासी हैंडसम सैलरी ने युवाओं को खूब लुभाया. जिसके कारण प्रतिभाशाली युवा सरकारी नौकरी से कहीं ज्यादा प्राइवेट जॉब्स की तरफ आकर्षित होने लगे. तब सरकार ने नए वेतनमान और तमाम सुविधाओं से फिर से युवाओं को लुभाना शुरू किया है और आज फिर से युवाओं की आँखों में सरकारी नौकरी पाने के सपने झिलमिलाने लगे हैं.

पुरुष हो या महिला भले हीं निजी क्षेत्रों में जॉब कर रहे हों पर उनके मन में सरकारी नौकरी में स्थान पाकर तमाम सुख सुविधाएँ, पैसा और पावर पाने की ख्वाहिश हर पल पलती रहती है किन्तु समयावभाव व जिम्मेदारियों की अधिकता के बोझ से यह सपना सपना हीं रह जाता है.

सरकारी नौकरी एवं शादी की उम्र:

आज से पच्चीस पचास साल या उसके भी पहले हमारे भारतीय समाज में लड़कों के विवाह की आदर्श आयु पन्द्रह से बीस पचीस साल मानी जाती थी गाँवों और कस्बों में ऐसी मान्यता अब भी कायम है, जबकि यही उम्र एक युवा के लिए पढाई और कैरियर बनाने की भी होती है किन्तु अधिकतर लड़कों के समक्ष माता-पिता और समाज की इच्छा को शिरोधार्य कर विवाह के लिए हामी भरने के अतिरिक्त दूसरा कोई चारा नहीं रहता था ऐसे में अनेक बार वह व्यक्ति नकारात्मक सोच का शिकार हो हीनभावना से भर जाया करता था क्योंकि सरकारी नौकरी पाने के जिस सपने के साथ उसने पढाई आरम्भ की थी वह चूर-चूर हो जाता था. ऐसे में कई लोग बिजनेस करने में लग जाते तो कोई बस अपना विकल्प प्राइवेट जॉब्स में ही बचा सोचते हुए प्राइवेट नौकरी करने को मजबूर होते और जीवन भर अपने शादी कर लेने के फैसले को गलत ठहराते हुए इसे ही असफलता के लिए जिम्मेदार मानकर अपने आप को कोसते रहते.

लड़कियों के मामले में तो स्थितियाँ और भी खराब हुआ करती थी लड़के तो हिम्मत करके फिर भी शादी की अवधि को टाल सकते थे पर लड़कियों के पास चुपचाप चौके चूल्हे में हीं अपने जीवन की सार्थकता मान लेने के अतिरिक्त दूसरा कोई विकल्प बचता हीं नही था.

Couple Reading Booksवर्तमान में युवाओं की बदलती सोच:

किन्तु आज के दूरदर्शी सोच वाले युग में अधिकतर युवाओं की सोच पहले नौकरी और फिर शादी वाली हो गयी है. उनकी इस सोच में माता पिता की मर्ज़ी भी शामिल है. नारियों के ऊपर भी वर्जनाओं के बन्धन ढीले हुए हैं यह सोच सहज और सही भी है क्योंकि शादी के बाद बहुत सारी चाही और अनचाही जिम्मेदारियां सर पर आ जाती है और इन एकाएक बढ़ी हुई जिम्मेदारियों को कोई भी व्यक्ति बिना आर्थिक रूप से सबल हुए पूरी नही कर सकता. सबसे बड़ी बात ये कि चाहे पुरुष हो या महिला नौकरी की तैयारी करने में जितना समय और एकाग्रता चाहिए वह शादी के बाद नही मिल पाता है. लेकिन ऐसा भी नही है कि जितने लोगों ने शादी की वो सभी सरकारी नौकरी के लिए प्रयास करने के बाद भी सफल नही हो पाए, ऐसे अनेक पुरुष और महिला हैं जो विवाह के बाद प्राइवेट सैक्टरों में काम करते हुए अपने परिश्रम के बल पर सरकारी नौकरियों में अच्छे खासे पोस्ट्स पर चयनित हुए.

हाँ, पर ऐसी स्थिति में सफलता का औसत जरुर कुछ कम हो जाता है क्योंकि बाहर के काम में समय एवं मष्तिष्क खपाने के बाद फिर घर पर पढाई के लिए समय निकालना थोड़ी मुश्किल सी बात होती है. परन्तु कम औसत ही इस बात को, इस मान्यता को झुठलाने के लिए काफी है कि ‘शादी के बाद सरकारी नौकरी पाने लायक मेहनत नही की जा सकती हाँ, अगर अर्थोपार्जन के लिए पति-पत्नी दोनों काम कर रहें हों तो घर बाहर की दुहरी जिम्मेदारियाँ निभाते हुए दोनों जनों के लिए सरकारी नौकरी की तैयारी करना कठिन जरूर हो जाता है.

परन्तु अगर शादी के बाद कुछ बातों पर ध्यान रखें तो शादी सरकारी नौकरी में सफलता पाने के मार्ग में कहीं से भी बाधा साबित नही होगी. आइये अब हम आपको कुछ टिप्स बताते हैं जिन्हें अपनाकर आप शादी के बाद मिलने वाले कम समय में भी तैयारी कर सकते हैं.

Couple Reading Booksशादी के बाद ऐसे करें सरकारी नौकरी की तैयारी:

-तैयारी के लिए रणनीति बनायें

- समय की महत्ता समझें

- समय प्रबन्धन सीखें

- अध्ययन के प्रति पूर्ण समर्पण रखें

- सकारात्मक दृष्टिकोण

1) तैयारी के लिए रणनीति बनायें: सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों को एक निश्चित समय सीमा के अंदर लक्ष्य पाने के लिए प्रयास करने का अवसर होता है. चूँकि शादी के बाद पढाई के लिए समय भी कम रहता है और दूसरी तरफ सरकारी नौकरी पाने का समय भी नियत है इसलिए रणनीति बनाना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. चाहे युद्ध का मैदान हो या फिर जीवन की बाधा दौड़, हर क्षेत्र में सफलता पाने के लिए एक सुनियोजित कार्ययोजना, रणनीति बनाये जाने की जरुरत पड़ती है. सबसे पहले अपने द्वारा चयनित पद के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम पर पूरा शोध कर लें. और फिर नियत समय में किस प्रकार दिए गये सिलेबस को कवर किया जा सकता है इसकी योजना बना लें. ध्यान रहे अधिक पुस्तक पढने की बजाय सिलेबस को कवर करने वाले चयनित पुस्तकों का बार बार अध्ययन करना ज्यादा महत्वपूर्ण है.

2) समय की महत्ता समझें: समय के एक-एक सेकंड का सार्थक उपयोग करना सीखें. लोकोक्तियों में कहा गया है कि पलभर का चूका इंसान कोसों दूर पिछड़ जाता है. इसका एक बेजोड़ उदाहरण यहाँ देना चाहूँगा- ग्रुशी के केवल पाँच मिनट देर करने से अपराजेय नेपोलियन बन्दी होकर अपमान की मौत मरा. अतः अपने पैरों की गति को समय की गति के साथ कसकर जोड़े रखें. चाणक्य ने भी कहा था- जो व्यक्ति जीवन में समय का ध्यान नही रखता, उसके हाथ असफलता एवं पछतावे के सिवा कुछ नही लगता है. इसलिए जरुरत है हम एक एक सेकंड का उपयोग करना सीखें.

3) घर बाहर के कार्यों में समय का प्रबन्धन - कहते हैं एक से भले दो. पति पत्नी अगर मिलकर गृहस्थी के कार्यों और जिम्मेदारियों को बाँट लें तो इससे सुन्दर समय का प्रबन्धन कुछ हो हीं नहीं सकता तथापि आर्थिक स्थिति अगर इजाज़त दे तो गृहकार्य में पार्ट टाईम मेड की सहायता लेने से कार्य-अधिकता की थकान से राहत के अलावा अध्ययन के लिए समय की उपलब्धता भी ज्यादा होगी.

4) कोचिंग ज्वाइन करें: शादी के बाद आपको हो सकता है इतना समय न मिल पाए कि आप खुद का नोट्स तैयार कर सकें. इसलिए अगर आप वर्किंग नही है तो आपको सरकारी नौकरी की तैयारी कराने वाले कोचिंग से भी जुड़ना चाहिए जिससे आपको तैयारी करने वाले ग्रुप भी मिल जायेंगे. और अगर वर्किंग हैं तो जाहिर है दिन में टाइम नहीं निकल पाएगा अतः कोई शाम की कोचिंग ज्वाइन कर सकते हैं. या फिर आप पत्राचार माध्यम से किसी प्रतिष्ठित कोचिंग का नोट्स मंगवा सकते हैं.

5) पुस्तक को हमेशा पास रखें: पुस्तक को हमेशा अपने आस-पास रखें. ऐसा ना करें कि अभी पढने का मन नही है या कोई विषय बोरिंग लगने लगे तो सारी पुस्तकों को आलमीरा में रख दें. ना भी पढना हो तो भी पुस्तकों को पास रखेंगे तो आपका पुस्तकों से जुडाव बना रहेगा और दोबारा से पढने की रूचि जगेगी.

6) कर्मयोगी बने: भाग्यवादिता से हटकर कर्मवादिता का दामन थामे रखें. इतिहास साक्षी है कि कर्मठ इंसान ने सदैव सफलता के शिखर को छुआ है. अगर वर्किंग हैं तो वीकएंड को परिश्रम का साक्षीदार बनाएँ न कि आलस्य उतारने का.

7) तार्किक वार्तालाप: जब कुछ पढ़ने का मन न हो तो पति पत्नी आपस में अपने अपने विषयों से सम्बन्धित तार्किक वार्तालाप, विचार करें. अगर आप किसी विषय पर डिस्कशन करेंगे तो आपको विषय स्मरण भी शीघ्र होगा. अगर वैकल्पिक प्रकार के प्रश्नों वाली परीक्षा की तैयारी करनी हो तो एक दुसरे को प्रश्न पूछें और जवाब बताने कहें. ऐसा करने से उत्तर आपको आसानी से याद हो सकता है.

8) अपडेट रहें: प्रतियोगी परीक्षाओं से सम्बन्धित मैगजीन्स हर महीने अवश्य क्रय करें. इसके साथ साथ सुबह जब चाय का समय हो तो कम से कम न्यूज़ पेपर को एक बार सरसरी निगाह से जरुर देख जाएँ. इससे आप परीक्षा में पूछे जाने वाले करेंट अफेयर्स के प्रश्नों को आसानी से हल कर पायंगे. ध्यान रहे पढ़ते वक़्त मुख्य मुख्य याद करने योग्य तथ्यों को अंडर लाइन करना ना भूलें. इससे आप परीक्षा के निकट आने पर पढ़े गये मेगेजींस का रिविजन कम समय में कर पाएंगे.

9) लक्ष्य को केंद्र में रखें: आप अगर हमेशा लक्ष्य को केंद्र में रखते हुए कार्य करेंगे तो निश्चय ही कोई बाधा आपको लक्ष्य पाने से नही रोक सकती. बस जरुरत है अपने उद्देश्य से निष्ठा के साथ जुड़े रहने की.

10) हर काम का एक समय बनाएँ: एक सुनिश्चित रूटीन के रहने से समय की बर्बादी नहीं होगी.
परिश्रम, समय का सदुपयोग और आशावादी सोच के साथ तैयारी करें तो निश्चित हीं आप सफलता के विकास का इतिहास रचकर, कामयाबी के शिखर तक पहुँच कर, अपने सपने को साकार रूप दे सकते हैं.

इस प्रकार अगर आप उपर्युक्त बताये गये मार्गों पर चलते हैं तो निश्चय ही सफलता आपके कदम चूमेगी. बस जरुरत है पति-पत्नी आपस में सामंजस्य बनाते हुए प्रगति के पथ पर अग्रसर रहें. अगर आप एक दुसरे का सहयोगी बन एक दुसरे के जरूरतों को समझेंगे तो एक दुसरे का साथ आपकी सफलता के लिए पूरक बनेगा.

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