IAS मुख्य परीक्षा 2017: अर्थशास्त्र वैकल्पिक विषय 1
इस लेख में हमने IAS मुख्य परीक्षा 2017 का अर्थशास्त्र वैकल्पिक विषय 1 का प्रश्न-पत्र प्रदान कर रहे है जो कि IAS परीक्षा 2018 की तैयारी करने वाले IAS उम्मीदवारों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। दिए गए प्रश्न-पत्र को हल करें और IAS परीक्षा 2018 के लिए तदानुसार रणनीति बना लें।
IAS परीक्षा में अच्छे अंक अर्जित करने के लिए यह अहम है कि IAS उम्मीदवार पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न-पत्रों को हल करें और उसी पैटर्न को आधार मानकर IAS परीक्षा 2018 की तैयारी में जुट जायें। यहां इस लेख में हमने IAS मुख्य परीक्षा 2017 का अर्थशास्त्र वैकल्पिक विषय 1 का प्रश्न-पत्र उपलब्ध कर रहे हैं जो कि अर्थशास्त्र वैकल्पिक के रुप में चयन करने वाले उम्मीदवारों के लिए काफी महत्त्वपुर्ण है।
IAS मुख्य परीक्षा 2017: लोक प्रशासन वैकल्पिक विषय 1
IAS मुख्य परीक्षा 2017
अर्थशास्त्र वैकल्पिक विषय 1
निर्धारित समय : तीन घंटे
अधिकतम अंक : 250
प्रश्न-पत्र के लिए विशिष्ट अनुदेश
कृपया प्रश्नों के उत्तर देने से पूर्व निम्नलिखित प्रत्येक अनुदेश को ध्यानपूर्वक पढ़ें :
इसमें आठ प्रश्न हैं जो दो खण्डों में विभाजित हैं तथा हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में छपे हैं। परीक्षार्थी को कुल पाँच प्रश्नों के उत्तर देने हैं।
प्रश्न संख्या 1 और 5 अनिवार्य हैं तथा बाकी में से प्रत्येक खण्ड से कम-कम-कम एक प्रश्न चुनकर किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
प्रत्येक प्रश्न/भाग के अंक उसके सामने दिए गए है।
प्रश्नों के उत्तर उसी माध्यम में लिखे जाने चाहिए जिसका उल्लेख आपके प्रवेश-पत्र में किया गया है, और इस माध्यम का स्पष्ट उल्लेख प्रश्न-सह-उत्तर (क्यू.सी.ए.) पुस्तिका के मुख-पृष्ठ पर निर्दिष्ट स्थान पर किया जाना चाहिए। उल्लिखित माध्यम के अतिरिक्त अन्य किसी माध्यम में लिखे गए उत्तर पर कोई अंक नहीं मिलेंगे।
प्रश्नों में शब्द सीमा, जहाँ विनिर्दिष्ट है का अनुसरण लिया जाना चाहिए ।
प्रश्नों के उत्तरों की गणना क्रमानुसार की जाएगी। यदि काटा नहीं हो, तो प्रश्न के उत्तर की गणना की जाएगी चाहे वह उत्तर अंशत: दिया गया हो| प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका में खाली छोड़ा हुआ पृष्ठ या उसके अंश को स्पष्ट रूप से काटा जाना चाहिए।
खण्ड – A
1. निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(a) बाजार संतुलन की मार्शल एवं वालरास की स्थिरता दशा का कथन कीजिए। क्या आप समझते हैं कि मार्शल द्वारा वर्णित स्थिरता की स्थिति आवश्यक रूप से वालरास की स्थिरता स्थिति को सुनिश्चित करती है और कि विपरीत स्थिति में भी ऐसा ही होता है? व्याख्या कीजिए।
(b) बैन की सीमा कीमत थियोरी का कथन कीजिए।
(c) रेखाचित्र की सहायता से विकृत माँग वक्र थियोरी को स्पष्ट कीजिए।
(d) ऊर्ध्वाधर आइ० एस० और ऊर्ध्वाधर एल० एम० वक्रों के राजकोषीय और मोद्रिक निहिर्ताथ क्या होते हैं?
(e) वितरण की काल्डोर एवं कैलेकी थियोरी का परीक्षण कीजिए।
2. (a) ““नव क्लासिकी समष्टि-अर्थशास्त्र के आगमन ने कीन्स्वादियों और काफी हद तक मुद्रावादियों की स्थिति को डाँवांडोल कर दिया है।” “ चर्चा कीजिए।
(b) प्रिजनर्स दुविधा और नैश साम्यावस्था पर लिखिए।
(c) मुद्रा की परिमाण थियोरी के फ्रीडमैन के पुन:कथन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए तथा क्लासिकी परिमाण थियोरी से इसकी समानता/असमानता बताइए।
3. (a) प्रत्याशा – संवर्धित फिलिप्स वक्र के मुद्रावादी एवं नव-कीन्सवादी उपागमों में अन्तर कीजिए।
(b) क्या भारत जैसी उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति पर प्रहार केंदीय बैंकों की मौद्रिक नीति का मुख्य कार्य होना चाहिए? निवेश एवं आर्थिक संवृद्धि पर इसके निहितार्थों को दर्शाइए।
(c) लेमन बाजार से क्या तात्पर्य है? इसमें संकेतन और छानबीन की क्या भूमिका है? समझाइए।
4. (a) असममित सूचना क्या होती है? यह किस प्रकार घटिया चयन एवं बाजार असफलता की स्थिति उत्पन्न कर सकती है? विवेचना कीजिए।
(b) प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र के सन्दर्भ में अनिष्टकर सब्सिडी की अवधारणा की व्याख्या कीजिए।
(c) किसी अर्थव्यवस्था के विकास प्रक्रम में सार्वजनिक व्यय के प्रभावों का परिक्षण कीजिए।
खण्ड – B
5. निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:
(a) अंतर-उद्योग एवं आंतरिक- उद्योग के बीच विभेदन कीजिए। क्या मानव हेक्शर-ओलिन मॉडल आंतरिक-उद्योग की व्याख्या कर सकता है? चर्चा कीजिए।
(b) विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की डनिंग की संकलनवादी थियोरी की व्याख्या कीजिए।
(c) अल्पाधिकारी बाज़ार में ब्रैंडर-क्रममैन के आंतरिक-उद्योग मॉडल की व्याख्या कीजिए।
(d) कुजनेट्स की व्युत्क्रमित ‘यू’ परिकल्पना को समझाइए। क्या संवृद्धि गरीबों के लिए हितकर होती है? बताइए।
(e) किन दशाओं में आर्थिक संवृद्धि, रोजगार संवृद्धि को कम कर देती है? विवेचना कीजिए।
6. (a) संवृद्धि के उस पथ का वर्णन कीजिए, जिसे अर्थव्यवस्था द्वारा एक बार प्राप्त कर लेने पर यह किसी अन्य संवृद्धि पथ के मुकाबल सदैव प्रति व्यक्ति उपभोग का उच्चतर स्तर प्राप्त करता है।
(b) “पूँजीप्रधान क्षेत्रक में तकनीकी विकास लगभग सदैव ही वास्तविक मजदूरी दर में कमी और पूँजी के वास्तविक प्रतिफल में वृद्धि करता है। श्रमप्रधान क्षेत्रक में तकनीकी प्रगति वास्तविक मजदूरी दर में वृद्धि एवं वास्तविक पूँजी प्रतिफल में कमी करती है।” समझाइए।
(c) कम विकसित अर्थव्यवस्था में सब्सिडी के मुद्दे पर विश्व व्यापार संगठन में क्या गतिरोध है? विवेचन कीजिए।
7. (a) “यह तर्क कि हो सकता है कि निर्यात-अभिनत संवृद्धि देश के व्यापार शर्तों को प्रतिकूल कर दे अत: देश के लिए हितकर नहीं है, बड़े देशों के संदर्भ में न कि छोटे देशों के संदर्भ में, लागू होता है।” स्पष्ट कीजिए।
(b) साल्टर-स्वैन रेखाचित्र की सहायता से किसी अर्थव्यवस्था के असंतुलन के क्षेत्रों को परिभाषित कीजिए एवं भुगतान- संतुलन के घाटे के साथ-साथ मुद्रास्फीति एवं बेरोजगारी के क्षेत्रों के संदर्भ में नीतिगत सुझाव दीजिए।
(c) अल्पविकास गतिहीनता के निराकरण हेतु लाइबेनस्टीन के न्यूनतम क्रांतिक प्रयास सिद्धांत का विवेचन कीजिए।
8. (a) भुगतान-सन्तुलन समायोजन के प्रत्यास्थता और अवशोषण उपागम क्या हैं? विवेचना कीजिए।
(b) “प्रदुषण – आय वर्धमानता कृषि समुदाय (स्वच्छ) से औद्योगिक अर्थव्यवस्था (प्रदुषण – गहन) से सेवा अर्थव्यवस्था (स्वच्छतर) की मान्यता तब धराशायी हो जाती है जब अधिकाशं व्यक्तियों की ऊँची आय तथा उपभोग – स्तर अंत में पुन:प्रदुषण को बढ़ावा देने वाले बन जाते हैं” विचेचना कीजिए।
(c) ल्युइस के आर्थिक विकास माडल में रेकार्डों की परम्परा का संकेत कीजिए।
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