सरकारी टीचर की नौकरी कैसे प्राप्त करें?? जानिये टीचर की नौकरी का महत्व

आज जब हमारे देश भारत की साक्षरता दर लगभग 75% है तो स्वाभाविक ही मन में अपने देश भारत में आज के सन्दर्भ में टीचर अर्थात शिक्षक की भूमिका के बारे में विचार उठते हैं.

Created On: Mar 17, 2017 11:34 IST
Modified On: Mar 17, 2017 13:16 IST

Teacher jobsआज जब हमारे देश भारत की साक्षरता दर लगभग 75% है (केरल राज्य में अधिकतम लगभग 94% साक्षरता दर है और बिहार राज्य में न्यूनतम साक्षरता दर लगभग 64% है) तो स्वाभाविक ही मन में अपने देश भारत में आज के सन्दर्भ में टीचर अर्थात शिक्षक की भूमिका के बारे में विचार उठते हैं और हम अपने देश एवं विश्व में शिक्षा के सर्वोच्च महत्व के साथ ही शिक्षक के सर्वोच्च महत्व को समझ जाते हैं.

परिचय:

विश्व गुरु के नाम से प्रसिद्ध हमारा देश भारत आज भी शिक्षा के नये आयाम छू रहा है, फिर चाहे वह विद्यालयी शिक्षा हो या महा विद्यालय, विश्वविद्यालय में प्रदान की जाने वाली औपचारिक, अनौपचारिक, आधुनिक शिक्षा ही हो...शिक्षण में शिक्षक और शिक्षिका की निरंतर बढ़ती और नई उचाईयां छूती भूमिका को आज कौन नकार सकता है??

भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 के अनुसार, “ शिक्षक का स्तर किसी समाज के सामाजिक-सांस्कृतिक लोकाचार को दर्शाता है...” यह सच ही कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति अपने शिक्षक के स्तर से अधिक ऊपर नहीं जा सकता है.

यह भी एक वास्तविकता है कि भारत सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अपनाई जाने वाली नीतियां और योजनायें केवल प्रशिक्षित, कुशल, समर्थ और समर्पित शिक्षकों के प्रयास से ही साकार हो सकती हैं. यदि हमें अपने देश को एक विकासशील से विकसित देश बनाना है तो इसकी पहली शर्त ही 100% साक्षरता दर को प्राप्त करना है और आज हमारे शिक्षक इस दिशा में अपना पुरजोर योगदान दे रहे हैं.  

शिक्षक विकास की मजबूत नीव:

हमारे शिक्षक ही एक सुदृढ़ और विकासशील देश की मजबूत नींव हैं. बच्चों के माता-पिता के अलावा शिक्षक ही बच्चों के ज्ञान और जीवन मूल्यों का मुख्य आधार हैं. किसी भी बच्चे/ छात्र और समाज का भविष्य शिक्षकों के हाथ में पूरी तरह सुरक्षित होता है. इसलिये शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता भी कहा जाता है.

एक अच्छे शिक्षक के दायित्व:

आमतौर पर ढाई – तीन वर्ष में ही बालक “प्ले स्कूल” में एडमिशन लेते ही अपने शिक्षक से जुड़ जाते हैं और यह सफर ग्रेजुएशन/ पोस्ट ग्रेजुएशन/ एमफिल और पीएचडी की डिग्री पाने तक चलता है. इतना ही नहीं, अगर किसी छात्र/ छात्रा को प्रोफेशनल ट्रेनिंग चाहिए या नई नौकरी मिलने पर किसी कर्मचारी या ऑफिसर को ट्रेनिंग की आवश्यकता है तो वह ट्रेनिंग भी किसी प्रोफेशनल इंस्ट्रक्टर अर्थात शिक्षक द्वारा ही दी जाती है. ऐसे में बालपन से व्यस्क होने तक छात्र/ छात्राओं के व्यक्तित्व पर अपने शिक्षकों का प्रभाव साफ़ दिखाई देता है. इसलिए यह एक वास्तविकता है कि शिक्षक का दायित्व केवल क्लासरूम तक ही नहीं सिमटता बल्कि यह दायित्व बालकों/ छात्रों के व्यक्तित्व के विकास और चरित्र निर्माण का भी एक अहम हिस्सा होता है.

शिक्षक के व्यवसाय का महत्व:

शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक के व्यवसाय का ऐसा ही महत्व है जैसे कि ऑपरेशन करने के लिए किसी डॉक्टर का महत्व. शिक्षक ही शिक्षा और शिष्य के उद्देश्य पूरे करते हैं. इसलिए किसी भी शिक्षा प्रणाली या शिक्षा योजना की सफलता या असफलता शिक्षा क्षेत्र के सूत्रधार शिक्षकों के रवैये पर निर्भर करती है. भारत सरकार द्वारा लागू की गई सभी शिक्षा नीतियों/ योजनाओं – कोठारी आयोग की रिपोर्ट (1964-66), शिक्षा नीति (1968), शिक्षा पर पंच वर्षीय योजना की रिपोर्ट और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) - में शिक्षक के व्यवसाय के महत्व की पहचान की गई है. इस तथ्य को और स्पष्ट करने के लिए प्राथमिक स्कूल के शिक्षण व्यवसाय का उदाहरण दिया जा सकता है जिसे विश्व में सबसे महत्वपूर्ण व्यवसाय माना गया है क्योंकि प्राथमिक स्कूल के शिक्षक छोटे बच्चों को ज्ञान और जीवन के मूल्य उन्हें समझ आने लायक भाषा में प्रदान करते हैं ताकि इन छोटे बच्चों का भविष्य सुरक्षित और सुनहरा बन सके. अब क्योंकि आज के बच्चे कल देश का सुनहरा भविष्य हैं तो बच्चों को आज अच्छी शिक्षा देने का अर्थ कल देश के सुनहरे भविष्य का निर्माण करना है और इस कार्य में प्राथमिक स्कूल के शिक्षक निरंतर सकारात्मक भूमिका निभाते हैं.

आगे चर्चा करें तो इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि प्राथमिक स्कूल के बाद माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल भी छात्र/ छात्राओं के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं और जब हम किसी स्कूल की बात करते हैं तो वास्तव में उस स्कूल में कार्यरत विभिन्न विषयों के शिक्षक ही उस स्कूल में पढने वाले सभी छात्र/ छात्राओं को अर्थपूर्ण शिक्षा प्रदान करते है.

जब अच्छी शिक्षा देने की बात आती है तो विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले सभी शिक्षक इसके प्रणेता नजर आते हैं. शिक्षा, शिक्षक और शिष्य के आत्मीय और निकटम सम्बन्ध को कभी तोड़ा नहीं जा सकता है.

आज भले ही आधुनिक युग में शिक्षा का स्वरुप दिन – ब- दिन बदलता जा रहा है और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली जैसे इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय तथा इंटरनेट पर अत्यधिक शिक्षण वेब पोर्टल होने के बावजूद भी “क्लासरूम शिक्षा और शिक्षक का महत्व” सर्वोच्च मुकाम पर है.

आज के शिक्षक की बहु आयामी भूमिका:

आज के इस आधुनिक इंटरनेट युग में शिक्षक की भूमिका भी बहु आयामी हो गई है. आज शिक्षक अपने विद्यालय में शिक्षा देने के साथ ही इंटरनेट के माध्यम से भी शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और इस प्रकार की शिक्षा में शिक्षक का अपने छात्रों से सीधा संपर्क नहीं होता है. वे अपने कोर्स या विषय की शिक्षा देते समय ही अपने छात्रों की संभावित शंकाओं और प्रश्नों का समाधान भी कर देते हैं. विशेष रूप से उच्च और उच्चतम शिक्षा हेतु इंटरनेट शिक्षण का अपना ही महत्व है और इसके साथ ही शिक्षक की भूमिका भी अपने क्लासरूम से निकल कर जिला, प्रान्त, राज्य, राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित हो जाती है और यह भी सच है कि आधुनिक शिक्षक अपनी यह बहु आयामी भूमिका बखूबी निभा रहे हैं.

अंततः यह कहना अतियुक्ति नहीं होगी कि वर्तमान युग में शिक्षक छात्र/  छात्राओं के सक्षम मार्गदर्शक होने के साथ ही देश के भाग्य विधाता और भविष्य निर्माता भी हैं.

शिक्षक और सरकारी नौकरी:

अब प्रश्न यह उठता है कि एक शिक्षक का व्यवसाय चुन कर हम कैसे अपने समाज और देश की सेवा कर सकते हैं? स्वाभाविक रूप से निजी या प्राइवेट स्कूल में शिक्षक की नौकरी करने से कहीं बेहतर किसी सरकारी विद्यालय, महाविद्यालय या विश्वविद्यालय में शिक्षक की नौकरी करना है जिसमें आर्थिक सुरक्षा के साथ ही समाज में सम्मान और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सहित अन्य कई लाभ प्राप्त होते हैं तो इसके लिए हम यह स्पष्ट कर दें कि हमारे देश भारत में सभी राज्यों और केन्द्रीय स्तर पर स्थापित प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों के साथ ही महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विभिन्न राज्य सरकारें और केंद्र सरकार प्रत्येक वर्ष स्कुल – कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए समय-समय पर रोज़गार अधिसूचनायें जारी करती रहती हैं और शिक्षक की नौकरी हेतु पात्रता मानदंड पूरे करने वाले सभी पुरुष और महिला उम्मीदवार शिक्षकों हेतु नवीनतम सरकारी नौकरियों की समय रहते जानकारी जागरण जोश.कॉम के वेब पोर्टल से प्राप्त कर सकते हैं.

सरकारी शिक्षक की नौकरी प्राप्त करने के इच्छुक और योग्य उम्मीदवार नीचे दिए गए कुछ लिंक देख सकते हैं और अंतिम तिथि समाप्त होने से पूर्व अपनी योग्यता के अनुसार शिक्षक के पद के लिए अपने आवेदन भेज सकते हैं:

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