एक समय था जब UPSC की परीक्षा में आमतौर पर पुरुष टॉपर्स का ही नाम सामने आता था हालाँकि पिछले कुछ सालों में यह धारणा बदली है और देश की बेटियां भी कठिन परिश्रम कर इस परीक्षा में सफल नहीं बल्कि टॉप भी कर रही हैं। इस साल अगस्त में घोषित हुए UPSC सिविल सेवा 2019 की मेरिट लिस्ट में टॉप 20 रैंक होल्डर्स में 9 महिलाएं शामिल हैं। यह ना सिर्फ देश की प्रगति का प्रमाण हैं बल्कि हर भारतीय के लिए गौरव की बात है। आइये जानते हैं इस साल की अनोखी महिला टॉपर्स के संघर्ष और सफलता की कहानी।
UPSC सिविल सेवा 2019: 22 वर्षीय सिमी करण ने केवल चार महीनों की तैयारी में हासिल की 31वीं रैंक
पूर्णा सुनथरी - नेत्रहीनता को मानती हैं एक शक्ति
"UPSC सिविल सेवा की परीक्षा मेरे लिए कठिन नहीं थी।" यह कहना है मदुरै की रहने वाली पूर्णा सुनथरी का जो नेत्रहीन हैं। 25 वर्षीय पूर्णा ने अपने चौथे प्रयास में 286वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की है। उनका कहना है कि यपरीक्षा पास करने के बाद वह "अब चाँद पर है।"
पूर्णा बताती हैं की वह 11 वीं कक्षा से ही IAS अधिकारी बनना चाहती थीं।वह स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में सेवा करना चाहती हैं। अपनी तैयारी के बारे में वह कहती हैं की “मुझे ऑडियो प्रारूप में सभी अध्ययन सामग्री नहीं मिल पाती थी इसलिए मेरे माता-पिता दिन-रात मेरे लिए किताबें पढ़ते थे, और मेरे दोस्तों ने कुछ पुस्तकों को ऑडियो प्रारूप में बदलने में मदद की।उन्होंने मेरे लिए सभी उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराई। उन सभी की मेहनत की वजह से ही मैं आज IAS बन पाई हूँ।
ऐश्वर्या श्योरान - मिस इंडिया फाइनलिस्ट से IAS
Aishwarya Sheoran, Femina Miss India 2016 finalist, Campus Princess Delhi 2016, Freshface winner Delhi 2015 made us immensely proud as she scored the All India Rank 93 in the Civil Services Examination. A huge congratulations to her on this achievement!#AishwaryaSheoran #CSE pic.twitter.com/SrDu4iK6T0
— Miss India (@feminamissindia) August 4, 2020
एक और प्रेरणादायक महिला उम्मीदवार हैं ऐश्वर्या श्योराण हैं जो मिस इंडिया की पूर्व फाइनलिस्ट हैं। आईएएस अधिकारी बनना उसका सपना था और अब 93 वीं रैंक हासिल करने के बाद उसने इस पद के लिए क्वालीफाई कर लिया है। एनसीसी तेलंगाना बटालियन, करीमनगर के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल अजय कुमार की बेटी ऐश्वर्या अपनी सफलता पर कहती हैं की "मुझे लगा कि मुझे परिवार में विविधता के लिए सिविल सेवाओं के लिए प्रयास करना चाहिए और अंतिम विचार राष्ट्र की सेवा करना ही है। सेना में महिलाओं के बढ़ने के अवसर हैं लेकिन यह अभी भी बहुत सीमित है। सिविल सेवाओं में, एक महिला क्या हासिल कर सकती है इसकी कोई सीमा नहीं है। ”
नदिया बेग - केवल 23 साल की उम्र में बनीं IAS
कश्मीर के कुपवाड़ा जिले की 23 साल की नादिया बेग ने अपने दूसरे प्रयास में UPSC की परीक्षा पास की। अपनी सफलता पर वह कहती हैं “मैं पहली बार 2018 में परीक्षा के लिए उपस्थित हुई। पूरी तैयारी के बावजूद भी मैं प्रीलिम्स पास करने में असमर्थ रही। यह पहली बार था जब मैं इस तरह की उच्च योग्यता की राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा दे रही थी। मैं अपनी पढ़ाई के लिए दिन-रात समर्पित होने के बावजूद आश्वस्त नहीं थी। इस साल मैंने अपनी कमजोरियों पर काम किया था" नादिया ने इस साल की UPSC परीक्षा में 350 वीं रैंक हासिल की है।
दिल्ली पुलिस के अधिकारीयों की बेटियां - विशाखा यादव और नवनीत मान
Congratulations to Vishakha Yadav, D/o ASI Rajkumar Yadav, for securing Rank 6 in #UPSC2020. ASI Rajkumar works in the Personnel Section of DCP Office, Dwarka Distt. and the Delhi Police family celebrates this joyous occasion. You have made us all proud Vishakha!@DelhiPolice pic.twitter.com/6oB7B6mBGE
— DCP/Dwarka, Delhi (@DCPDwarka) August 4, 2020
दिल्ली पुलिस के दो अधिकारियों की बेटियाँ विशाखा यादव और नवनीत मान ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में क्रमशः छठा और 33 वां स्थान हासिल किया है। विशाखा दिल्ली पुलिस के सहायक उप निरीक्षक राजकुमार यादव की बेटी हैं और नवनीत दिल्ली के एक पुलिस निरीक्षक सुखदेव सिंह मान की बेटी हैं।
रूचि बिंदल - ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए करना चाहती हैं काम
मालवीय नगर निवासी रूचि बिंदल ने अखिल भारतीय 39 रैंक हासिल की है। वह जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) की आवासीय कोचिंग अकादमी (आरसीए) से कोचिंग लेने वाले 30 छात्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता बनकर उभरी हैं। वह "महिलाओं और बच्चों के लिए काम करना चाहती हैं। रूचि कहती हैं की "मेरा मानना है कि ट्रांसजेंडर हमारे समाज में सबसे अधिक पीड़ित समुदायों में से एक हैं, जिसमें कोई पारिवारिक और सामाजिक समर्थन नहीं है। उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा भी उन्हें स्वीकार नहीं किया जाता है। मैं उन लोगों के जीवन सुधार के लिए काम करना चाहती हूँ। "
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