अमूमन ये माना जाता है की UPSC सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा को केवल इंटेलीजेंट और पढ़ाई में तेज़ छात्र ही क्लियर कर सकते है। परन्तु बिहार के कुमार अनुराग ने ऐसे सभी मिथकों को गलत साबित कर दिया है। अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में बैकबेंचर रहे अनुराग ने UPSC परीक्षा को दूसरे ही एटेम्पट में क्लियर कर 48वीं रैंक हासिल की और यह साबित कर दिया की सफलता केवल मेहनत और लगन से ही हासिल की जा सकती है। आइये जानते हैं उनके इस सफर के बारे में:
12वीं की प्री बोर्ड परीक्षा में हुए थे फेल, बोर्ड में हासिल किये थे 90% अंक
अनुराग की शुरुआती पढ़ाई, बिहार के ही साधारण हिंदी मीडियम स्कूल से हुई। इसके बाद उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए दसवीं में दूसरे शहर भेज दिया गया। यह नया स्कूल इंग्लिश मीडियम था जिसकी वजह से उन्हें काफी समस्या का सामना करना पड़ा। अनुराग का कहना है की वह बेशक ही एक एवरेज स्टूडेंट थे परन्तु जब कुछ करने का ठान लेते थे तो उसके लिए खूब मेहनत करते थे। यही कारण था की अनुराग ने 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किये। वह बताते हैं की 12वीं की मैथ्स प्री बोर्ड परीक्षा में वह फेल हो गए थे। परन्तु वह निराश नहीं हुए और बेहतर तैयारी से बोर्ड की परीक्षा दी। अनुराग ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा में भी 90 प्रतिशत से ज़्यादा स्कोर किया था।
कई बार बैक पेपर्स क्लियर करने के बाद पूरी की ग्रेजुएशन की डिग्री
अनुराग ने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री दिल्ली विश्ववियालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स से हासिल की है। अपने कॉलेज के दिनों के बारे में अनुराग बताते हैं की वे हमेशा ही बैकबैंचर थे और टॉपर्स के नोट्स फोटोकॉपी करा कर पढ़ते थे। कई बार बैक आने के बाद उनकी डिग्री पूरी हुई। हालांकि अनुराग ने कभी हताश हो कर हार नहीं मानी। वह निरंतर सफल होने का प्रयास करते रहे। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से MA की डिग्री भी पूरी की।
अपनी गलतियों से सीख ले कर IAS बनने का लक्ष्य चुना
एक इंटरव्यू में अनुराग कहते हैं कि व्यक्ति को पता होना चाहिए कि आखिर वह क्यों फेल हो रहा है। अपनी गलतियों के बारे में वह कहते हैं कि उन्होंने कड़ी मेहनत नहीं की और वह अनुशासित जीवन न जीते हुए पढ़ाई में रुचि नहीं ले रहे थे। इसी के कारण उन्हें असफलताओं का सामना करना पड़ा। इन सबके बावजूद अनुराग को खुद की काबिलियत पर विश्वास था। उन्हें पता था कि अगर वे मेहनत करेंगे तो IAS जरूर बनेंगे। इसी विचार के साथ अनुराग ने UPSC की तैयारी आरंभ की।
UPSC के दूसरे प्रयास में हासिल की 48वीं रैंक
अनुराग ने अपनी गलतियों से सीख ली और पढ़ाई की ओर अपना एटीट्यूड बदला। UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने नोट्स बनाए, खूब मेहनत की और कई मॉक टेस्ट दिए। आपको बता दें की अनुराग ने अपने पहले प्रयास में भी UPSC परीक्षा को पास कर लिया था। परन्तु कम स्कोर होने के कारण उन्हें 677वीं रैंक मिली थी। अनुराग अपने लक्ष्य को ले कर क्लियर थे और इसलिए उन्होंने अगले साल एक बार फिर परीक्षा दी। अपनी पिछले साल की गलतियों से सीख ले कर इस साल अनुराग ने कड़ी मेहनत की और 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल की।
कुमार अनुराग का यह सफर प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा है। अनुराग ने अपनी काबिलियत पर भरोसा रखा और सिद्ध कर दिया की यदि सच्ची लगन और कड़ी मेहनत से प्रयास किया जाए तो सफलता निश्चित ही प्राप्त होती है।
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