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भारत में गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered)10 पक्षी प्रजातियों की सूची

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने 2013 के लिए भारत में देखी जाने वाली पक्षियों की दस प्रजातियों को गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल किया है। इनमें ग्रेट साइबेरियन क्रेन, गोडावण (Indian Bustard), सफेद पीठ वाला गिद्ध, लाल– सिर वाला गिद्ध, जंगली उल्लू और सफेद पेट वाला बगुला आदि शामिल हैं।
Jul 21, 2016 15:54 IST
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अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने 2013 के लिए भारत में देखी जाने वाली पक्षियों की दस प्रजातियों को गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल किया है। इनमें ग्रेट साइबेरियन क्रेन, गोडावण (Indian Bustard), सफेद पीठ वाला गिद्ध ,लाल– सिर वाला गिद्ध, जंगली उल्लू (Forest Owlet), स्पून बिल्ड सैंडपाइपर और सफेद पेट वाला बगुला आदि। इन पक्षियों की आबादी में गिरावट की मुख्य वजहों में आवास का नुकसान, संशोधन, विखंडन और समाप्त होना, पर्यावरण प्रदूषण, शिकार और भू– उपयोग में परिवर्तन शामिल है।

1. ग्रेट इंडियन बुसटर्ड (गोडावण)

ग्रेड इंडियन बुसटर्ड सबसे संकटग्रस्त प्रजातियों में से एक है जो सिर्फ भारत और इसके आस–पास के इलाकों में ही पाया जाता है। यह उड़ सकने वाली बड़ी पक्षियों की प्रजातियों में से एक है। इसका वजन 15 किलोग्राम होता है और यह जमीन से करीब 1 मीटर उंचा होता है। जमीन पर रहने वाले सबसे बड़े पक्षी का आवास झाड़ियां, लबे घास, अर्द्ध– शुष्क घास के मैदान और राजस्थान के अर्द्ध रेगिस्तान इलाके हैं। बहुत अधिक शिकार और आवास के समाप्त होने के कारण ये पक्षी भारत के कई इलाकों से समाप्त हो चुके हैं। यह राजस्थान का राज्य पक्षी है। महाराष्ट्र के सोलापुर में ग्रेड इंडियन बुसटर्ड सैंचुरी नाम से वन्यजीव अभयारण्य भी है।

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Image source:siberiantimes.com

2. लाल सिर वाला गिद्ध

लाल– सिर वाले गिद्ध को भारतीय काला गिद्ध या राजा गिद्ध भी कहते हैं। यह भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला पूर्वजगत गिद्धों की प्रजातियों में से एक है। पशु चिकित्सा में इस्तेमाल किए जाने वाले डाइक्लोफेनाक की वजह से हाल के वर्षों में इस प्रजाति की आबादी बहुत तेजी से कम हुई है। भारतीय गिद्ध, लंबी– चोंच वाला गिद्ध और सफेद पुट्ठे वाला गिद्ध, भारत में पाए जाने वाली गिद्ध की कुछ और प्रजातियां हैं और पक्षियों के विलुप्तप्राय प्रजातियों की श्रेणी में आती हैं।

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3. जंगली उल्लू (Forest Owlet)

परंपरागत उल्लू प्रजाति में से जंगली उल्लू (Forest Owlet) सबसे संकटग्रस्त प्रजात है औऱ यह मध्य भारत के जंगलों में पाया जाता है। छोटे जंगली उल्लुओं को विलुप्त माना जाता था लेकिन बाद में इन्हें फिर से पाया गया और भारत में इनकी बहुत कम आबादी इन्हें विलुप्तप्राय की श्रेणी में ले आई। मेलघाट टाइगर रिजर्व, मध्यप्रदेश का तलोदा वन रेंज और वन क्षेत्र एवं छत्तीसगढ़ में छोटे जंगली उल्लू पाए जाते हैं। यह महाराष्ट्र का राज्य पक्षी है।

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4. चम्मच की चोंच वाला टिटहरी (Spoon Billed Sandpiper)

चम्मच की चोंच वाली टिटहरी विश्व की सबसे संकटग्रस्त पक्षी प्रजाति है औऱ भारत में भी यह विलुप्तप्राय श्रेणी में ही आती है। बहुत ही कम आबादी, आवास का समाप्त होना और बहुत कम प्रजनन इस प्रजाति की पक्षियों को विलुप्त होने की कगार पर ले आया है। भारत में ये सुंदरवन डेल्टा और पड़ोसी देशों में पाई जाती हैं।

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5. जेरडॉन्स करसर (Jerdon’s Courser)

रात में दिखाई देने वाला जेरडॉन्स करसर पक्षी भारत का सबसे संकटग्रस्त और रहस्य भरे पक्षियों में से एक है। यह खास तौर पर दक्षिणी आंध्र प्रदेश में देखी जाती है। जेरडॉन्स करसर विलुप्तप्राय पक्षी के तौर पर सूचीबद्ध है। इस विलुप्त घोषित किया जाना था लेकिन यह फिर से दिखी और आवास की कमी की वजह से विलुप्तप्राय प्रजाति बना हुआ है। यह पक्षी आमतौर पर गोदावरी नदी घाटी, श्री लंकामल्लेश्वर अभयारण्य और पूर्वी घाट के वन क्षेत्र में पाया जाता है।

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6. चरस ( Bengal Florican)

चरस बुसटर्ड फैमली का दुर्लभ प्रजाति है और सिर्फ भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है। यह विलुप्तप्राय प्रजातियों में से एक है और दुनिया के अन्य स्थानों से लगभग समाप्त हो चुका है। भारतीय उपमहाद्वीप में 1,000 से भी कम युवा चरस मौजूद हैं। यह दुनिया का सबसे दुर्लभ बुसटर्ड है लेकिन शिकार और कृषि के भू– संरक्षण की वजह से इसका प्राकृतिक आवास समाप्त हो गया और यह दुर्लभ प्रजाति की सूची में आ गया।

7. सफेद पेट वाला बगुला (White Bellied Heron)

ग्रेट ह्वाइड– बेलिड हेरॉन जिसे इंपीरियल हेरॉन भी कहते हैं, पूर्वी हिमालय पर्वतमाला के ग्रेट हिमालय की तलहटी में पाया जाता है। लंबा, काला और भूरे रंग का बगुला बड़ी प्रजाति का है। इसकी गर्दन सबसे लंबी होती है और उस पर कोई काली धारी भी नहीं होती। दलदली जमीनों के समाप्त होने, शिकार और निवास स्थान का खत्म होना बगुलों के लिए प्रमुख चिंता का कारण है।

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8. हिमालयी बटेर (Himalayan Quail)

अद्भुत और सुंदर हिमालयी बटेर तीतर के परिवार से है और उत्तराखंड के पश्चिमी हिमालय और भारत के उत्तर– पश्चिम इलाके में ही पाया जाता है। हिमालयी बटेर भारतीय पक्षियों में से सबसे अधिक संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों में से एक है। आवास स्थान के समाप्त होने की वजह से ये विलुप्त होने की कगार पर आ गए हैं। बटेर मध्यम आकार वाले होते हैं और सिर्फ अपने आस– पास के इलाकों में ही उड़ते हैं।

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9. सोसिएबल लैपविंग (Sociable Lapwing)

सोसिएबल लैपविंग कजाकिस्तान के घास के खुले मैदानों से आने वाला प्रवासी पक्षी है जो भारत के सिर्फ उत्तर– पश्चिम इलाकों में ही पाया जाता है। मध्यम आकार का लैपविंग लंबी टांगों, गहरे रंग के पेट और छोटे काले बिल की वजह से बहुत आकर्षक दिखता है। आवास का समाप्त होना इस प्रजाति के पक्षियों को संकटग्रस्त सूची में लाने की मुख्य वजह है।

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10. साइबेरियन क्रेन

शानदार साइबेरियन क्रेन प्रवासी पक्षी हैं और सर्दियों के मौसम में भारत आते हैं। खूबसूरत साइबेरियन क्रेन दुनिया में विलुप्तप्राय प्रजाति की पक्षियों में से एक हैं। बीते कुछ वर्षों में प्रवासी साइबेरियन क्रेन की आबादी थोड़ी कम हुई है और इन पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।

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