उत्तर प्रदेश की पहली केंद्रीय जेल कौन-सी है, जानें
उत्तर प्रदेश भारत का विविध संस्कृति और अनूठी परंपराओं वाला राज्य है। भारत का यह राज्य देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि 240,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। प्रदेश में अपराधियों पर नियंत्रण के लिए अलग-अलग प्रयास किए जाते रहे हैं। इस कड़ी में कई जेल का निर्माण भी हुआ है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश की पहली केंद्रीय जेल कौन-सी है। यदि नहीं जानते हैं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
उत्तर प्रदेश भारत के प्रमुख राज्य में से एक है। भारत का यह राज्य चौथा सबसे बड़ा राज्य है। इसका कुल क्षेत्रफल भारत के क्षेत्रफल का 7.33 फीसदी हिस्सा है। बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश में अपराध की दुनिया में नियंत्रण करने के लिए प्रयास बढ़े हैं।
इस कड़ी में प्रदेश में कई जेल मौजूद हैं, जिनमें अपराधियों को रखा जाता है। आपने प्रदेश की कई प्रमुख जेलों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश की पहली केंद्रीय जेल कौन-सी है। यदि नहीं जानते हैं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
उत्तर प्रदेश में कुल जेल की संख्या
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि उत्तर प्रदेश में कुल कितनी जेल हैं ? आपको बता दें कि प्रदेश में कुल जेलों की संख्या 73 है। इसमें छोटी से लेकर बड़ी जेल शामिल है, जिसमें कुख्यात और वांछित अपराधियों को सजा के तौर पर रखा गया है।
यूपी में कुल केंद्रीय जेल
अब हम यह जान लेते हैं कि उत्तर प्रदेश में कुल केंद्रीय जेल कितनी हैं, तो आपको बता दें कि इनकी संख्या 8 है। ये आठ जेल कुल 7 जिलों में मौजूद हैं, जिसमें आगरा, बरेली, फतेहगढ़, नैनी, वाराणसी, लखनऊ और इटावा शामिल है। इनमें बरेली जिले में दो केंद्रीय जेल हैं, जबकि अन्य जिलों में एक-एक केंद्रीय जेल है।
यूपी में कुल जिलेवार जेल
उत्तर प्रदेश में कुल जिलेवार जेल की बात करें, तो इनकी संख्या 62 है। ऐसे में अलग-अलग जिलों के अपराधी अलग-अलग जेलों में देखे जा सकते हैं।
यूपी की पहली केंद्रीय जेल
उत्तर प्रदेश की पहली केंद्रीय जेल की बात करें, तो यह आगरा जेल है। इस जेल की स्थापना ब्रिटिश समय में 1884 में की गई थी।

कालीन के लिए जानी जाती है आगरा सेंट्रल जेल
आपको बता दें कि आगरा सेंट्रल जेल सिर्फ जेल ही नहीं है, बल्कि यहां उन्नत कौशल वाले बुनकर भी रहते हैं। यह जेल आजादी से पहले से ही उच्च गुणवत्ता वाली कालीन का केंद्र रही है, जो कि यहां बुनकरों द्वारा बनाई जाती है। 1877 में यहां बनी कालीन को रानी विक्टोरिया को भी उपहार के रूप में दिया गया था।
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