उत्तर प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि 240,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। भारत का यह राज्य देश के विकास के लिए अहम राज्य माना जाता है। देश में जिस समय रेलवे का विकास समय की पटरी पर चलते-चलते रफ्तार पकड़ रहा था, उस समय इस राज्य ने भी रेलवे के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।
यहां रेलवे स्टेशन का निर्माण कर रेलवे को विस्तार दिया गया था। इस कड़ी में क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश का पहला रेलवे स्टेशन कौन-सा है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
जब रेलवे ने किया उत्तर भारत का रूख
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा 16 अप्रैल,1853 में भारत में पहली ट्रेन के संचालन के बाद कंपनी के अधिकारी खुश थे। मुंबई से ठाणे के बीच पहली ट्रेन चलाने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों ने अब उत्तर भारत का रूख करने की सोची थी, जिससे रेलवे का विस्तार पश्चिम से उत्तर भारत की तरफ हो सके।
उत्तर प्रदेश का सबसे पुराना रेलवे स्टेशन
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि उत्तर प्रदेश का सबसे पुराना रेलवे स्टेशन कौन-सा है। आपको बता दें कि प्रदेश का सबसे पुराना रेलवे स्टेशन कानपुर सेंट्रल है। दरअसल, प्रदेश में प्रयागराज का नाम भी सबसे पुराने रेलवे स्टेशन के तौर पर लिया जाता है। ऐसा क्यों ?, जानने के लिए नीचे पढ़ें।
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क्यों है सबसे पुराना रेलवे स्टेशन
अब सवाल है कि कानपुर और प्रयागराज प्रदेश के सबसे पुराने रेलवे स्टेशन क्यो हैं, तो आपको बता दें कि उस समय कानपुर छावनी होने के साथ-साथ औद्योगिक नगरी के रूप में भी विकसित हो रहा था। ऐसे में कारखानों तक कोयला पहुंचाने और कारखानों में तैयार माल को देश के अन्य भागों तक पहुंचाने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों ने कानपुर से प्रयागराज तक ट्रेन चलाने की योजना बनाई थी।
1859 से चली पहली ट्रेन
ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा साल 1855 में प्रयागराज से कानपुर तक रेल लाइन बिछाने काम शुरू हुआ। चार साल की मेहनत के बाद 1859 में प्रयागराज और कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन का काम शुरू हुआ। इस दौरान दोनों स्टेशनों के बीच पहली ट्रेन का संचालन किया गया।
1885 में बनकर तैयार हुई इमारत
पहले कानपुर रेलवे स्टेशन छोटा स्टेशन हुआ करता था। हालांकि,बाद में 1883 में इसकी इमारत का डिजाइन तैयार किया गया। साल 1885 में कानपुर रेलवे स्टेशन बनकर तैयार हुआ। साल 1932 में इस रेलवे स्टेशन को बंद कर दिया गया और अब इसे रेलवे अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
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