पटरी के ऊपर कैसे चढ़ाई जाती है रेलगाड़ी? 99% लोग नहीं जानते होंगे इसका जवाब

Jul 11, 2025, 11:31 IST

रेलवे भारत की रीढ़ मानी जाती है। हर दिन लाखों लोग इसमें यात्रा करते हैं। भारतीय रेलवे यात्रियों की सहूलियत और जरूरतों के हिसाब से ट्रेनों की सुविधा देता है। आपकी जरूरत के अनुसार सुपरफास्ट ट्रेन से लेकर लोकल ट्रेन भी मौजूद है, लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि आखिर इन ट्रेनों को पटरियों पर कैसे उतारा जाता है। किस चीज की मदद से ट्रेन के सभी डिब्बों को पटरियों पर रखा जाता है? आइए इस बारे में थोड़ा विस्तार से यहां जानते हैं।  

Indian Railways
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भारत में ज्यादातर लोग लंबी दूरी की यात्रा के लिए ट्रेन का सहारा लेते हैं। हर रोज लाखों की तादाद में लोग एस शहर से दूसरी शहर जाने के लिए ट्रेन से सफर करते हैं। यहां तक की दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर जैसे मेट्रो सिटी में लोग दैनिक आधार पर मेट्रो से ही यात्रा करते हैं। लाखों ट्रेनें रोजाना पटरियों पर दौड़ती है, लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि आखिर इतनी भारी-भरकम ट्रेनों को पटरियों पर कैसे उतारा जाता है? आप में से कई लोगों को ऐसा लगता होगा कि ट्रेन को पटरी पर चढ़ाने के लिए क्रेन का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। बता दें कि ट्रेन को पटरी पर चढ़ाने का तरीका थोड़ा अलग है, जो शायद ही किसी को मालूम होगा। आज हम आपको बताएंगे कि ट्रेनों को पटरियों पर कैसे चढ़ाया जाता है।

क्या क्रेन से उठाया जा सकता है ट्रेन?

ट्रेन बाइक और कारों की तरह छोटी नहीं होती है। ट्रेन की लंबाई इतनी होती है कि कोई भी क्रेन इसे एक साथ नहीं उठा सकती है। जिस तरह से बाइक और कारों को उठाया जाता है उस तरह ट्रेन को उठाना संभव नहीं है। क्रेन की ताकत इतनी नहीं होती है कि वह भारी भरकम ट्रेन को उठाकर एक जगह से दूसरी जगह पर रख सके। वहीं ट्रेन का सिस्टम  बड़ी कारों की तरह भी नहीं होता कि उसे किसी बड़ी मशीन या क्रेन की मदद से बांधकर एक जगह से दूसरी जगह पर रखा जा सकें। ट्रेन में इतने डिब्बे होते है कि इसे किसी भी ताकत या मशीन की मदद से कही नहीं रखा जा सकता है और यही कारण है कि ट्रेनों के डिब्बों को शिफ्ट करने के लिए ट्रिक का इस्तेमाल किया जाता है।

पटरी पर कैसे चढ़ाई जाती है इतनी लंबी ट्रेन?

ट्रेन को पटरी पर उतारना इतना भी आसान नहीं है। ट्रेन को पटरी पर चढ़ाने से पहले पटरी पर प्लास्टिक के दो बड़े प्लेटफॉर्म रखे जाते हैं। इन प्लेटफॉर्म के जरिए ही सबसे पहले इंजन को ट्रैक पर चढ़ाया जाता है। इसके बाद ट्रेन की इंजन से सभी डिब्बों को बांधा जाता है, जो धीरे-धीरे कर के सभी डिब्बों को पटरी पर खिंचती हैं। इस तरह से एक-एक कर के सभी डिब्बों को ट्रेन पर उतारा जाता है। ट्रेन को पटरी पर चढ़ाने के दौरान उसके सभी डिब्बे पटरी के बगल में ही रखे होते हैं। फिर जैसे-जैसे ट्रेन के डिब्बों को प्लास्टिक पर चढ़ाया जाता है डिब्बे एक-एक कर के पटरी पर उतरती जाती हैं। प्लास्टिक के टुकड़ों की मदद से ही ट्रेन पटरी पर चढ़ती है, जिसके बाद वह ट्रैक पर दौड़ती हैं।

क्या ट्रेन को ट्रैक पर चढ़ाने के लिए हाइड्रोलिक जैक का इस्तेमाल किया जाता है?

हालांकि, अब कई मामलों में विशेष रूप से डिजाइन किए गए उपकरण जैसे रेल-माउंटेड क्रेन या हाइड्रोलिक जैक का इस्तेमाल किया जाता है। ये उपकरण न केवल डिब्बों को उठाने में मदद करते हैं बल्कि उन्हें पटरियों पर ठीक तरह से व्यवस्थित करने में भी मदद करते हैं।

ट्रेन के पटरी से उतरने पर क्या होता है?

ट्रेनों को एक बार में "ट्रैक पर नहीं लाया जाता"। इसके बजाय, ट्रेन की गाड़ियों को रेल पर बनाया जाता है और फिर मुख्य ट्रैक पर ले जाया जाता है, या क्रेन या जैक जैसे विशेष उपकरणों का उपयोग करके पटरी से उतरने के बाद उन्हें फिर से पटरी पर लाया जाता है।  

1. विनिर्माण और प्रारंभिक प्लेसमेंट: 

ट्रेन की गाड़ियां (लोकोमोटिव, कोच, वैगन) आमतौर पर किसी कारखाने के अंदर रेल पर बनाई जाती हैं। फिर उन्हें मुख्य रेलवे लाइनों पर ले जाया जाता है।

 2. पटरी से उतरने के बाद फिर से पटरी पर लाना: 

यदि कोई ट्रेन पटरी से उतर जाती है, तो उसे वापस पटरी पर लाना आवश्यक हो सकता है। यह अक्सर भारी-भरकम क्रेन या विशेष रीरेलिंग उपकरणों का उपयोग करके किया जाता है। रीरेलिंग उपकरण, जिसे "रीरेलर" के रूप में भी जाना जाता है, ट्रेन की गाड़ी को उठाने और उसे पटरी पर लाने के लिए हाइड्रोलिक जैक या अन्य तंत्र का उपयोग कर सकता है। आसान मामलों में, पहियों को वापस पटरियों पर लाने में मदद करने के लिए अनुभवी कर्मियों द्वारा क्रॉबर और लकड़ी के ब्लॉक का उपयोग किया जा सकता है। अस्थायी ट्रैक खंडों का उपयोग ट्रेन की गाड़ी को मुख्य ट्रैक पर वापस लाने के लिए रैंप बनाने के लिए किया जा सकता है।

3. अन्य परिदृश्य:

यदि किसी यांत्रिक समस्या के कारण ट्रेन रुक जाती है, तो उसे खींचने या धकेलने के लिए दूसरा लोकोमोटिव भेजा जा सकता है।

विशेष चालों का उपयोग करके ट्रेनों को उलटा भी किया जा सकता है या किसी दूसरे ट्रैक पर ले जाया जा सकता है, लेकिन यह उसी अर्थ में "ट्रैक पर रखना" नहीं है, जैसा कि प्रारंभिक प्लेसमेंट या रीरेलिंग है।





Mahima Sharan
Mahima Sharan

Sub Editor

Mahima Sharan, working as a sub-editor at Jagran Josh, has graduated with a Bachelor of Journalism and Mass Communication (BJMC). She has more than 3 years of experience working in electronic and digital media. She writes on education, current affairs, and general knowledge. She has previously worked with 'Haribhoomi' and 'Network 10' as a content writer. She can be reached at mahima.sharan@jagrannewmedia.com.

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