Search

इनकम टैक्स रिटर्न भरने पर कितना सड़क दुर्घटना मुआवजा मिलता है?

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में सिविल अपील संख्या 9858 के जबाब में यह निर्णय दिया था कि यदि किसी व्यक्ति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है और यदि वह 3 सालों से लगातार आयकर रिटर्न भर रहा था तो सरकार का यह कर्तव्य हो जाता है कि उस व्यक्ति के परिवार को मृत व्यक्ति की तीन वर्षों की औसत आय का 3 गुना मुआवजा दे.
Aug 16, 2017 17:53 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon
Income Tax Return and accidental compensation
Income Tax Return and accidental compensation

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी किये गए नए आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रति 10 मिनट में 3 व्यक्ति सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं. 2011 में जहाँ 136,000 लोग सड़क दुर्घटना में मारे गए थे वहीँ 2015 में 148,000 लोग मारे गए थे. अकेले दिल्ली जैसे शहर में ही 92 लाख के लगभग वाहन है जो कि पूरे भारत के किसी भी शहर से सबसे ज्यादा हैं. इसलिए दिल्ली जैसे शहर में दुर्घटनाओं की संख्या भी बहुत अधिक है. ज्ञातव्य है कि भारत में हर साल 5 लाख सड़क दुर्घटनाओं की सूचना आती है जिसमें लगभग 1.5 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है. सरकार इन दुर्घटनाओं और मृत्यु संख्या को अगले पांच साल में 50 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्रतिबद्ध है.
यह लेख मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 में वर्णित नियम के आधार पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति को मिलने वाले मुआवजे के बारे में प्रकाश डालता है. इस लेख के विवरण में जाने से पहले आइये यह समझ लेते हैं कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के मुख्य प्रावधान क्या हैं.
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 मुख्य तथ्य
1. मोटर वाहन अधिनियम की धारा 3 के तहत किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाने के लिये उसके पास लाइसेंस होना आवश्यक है और लाइसेंस न रहने पर उसके दण्ड को धारा 181 में बताया गया है.
2. इसी प्रकार अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति का सार्वजनिक स्थान में मोटर वाहन चलाना अपराध होता है.
3. 16 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति केवल 50 CC  से कम की क्षमता वाला वाहन चला सकता है.
4. मोटर वाहन अधिनियम की धारा 177 के अनुसार मोटर वाहन का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, वहां चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए, दो पहिया वाहन चालक को हेलमेट पहनना चाहिये और ड्राईवर की वेशभूषा में ही गाड़ी चलाना चाहिए.

20 ऐसे कानून और अधिकार जो हर भारतीय को जानने चाहिए
5. मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा-2-47 के अनुसार एक शैक्षिक संस्थान की बस एक परिवहन वाहन है और इसलिए सडक पर इसके परिवहन के लिए एक परमिट की आवश्यकता होती है और हर साल इसके फिटनेस टेस्ट के बाद ही नवीनीकरण किया जाना चाहिए.

school bus
image source:www.alamy.com
मोटर अधिनियम, 1988 की धारा 166 के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में सिविल अपील संख्या 9858 के जबाब में यह निर्णय दिया था कि यदि किसी व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है और यदि वह 3 सालों से  लगातार आयकर रिटर्न भर रहा था तो सरकार का यह कर्तव्य हो जाता है कि उस व्यक्ति के परिवार को मृत व्यक्ति की औसत आय का 3 गुना मुआवजा दे.
उदाहरण के लिए, अगर किसी की वार्षिक आय क्रमशः 2015, 2016 और 2017 में क्रमशः 6 लाख रुपये, 7 लाख रुपये, और 8 लाख रुपये है, तो उसकी औसत आय 7 लाख रुपये हुई. यदि किसी व्यक्ति ने 2015 से 2017 तक लगातार आयकर रिटर्न भरा है और बदकिस्मती से 2017 में उसकी मृत्यु हो जाती है तो सरकार का यह दायित्व बनता है कि उसके परिवार को 7 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करे.

compensation in accident
image source:Rediff.com
यहाँ पर यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि व्यक्ति को हर साल नियमित रूप से अपना आयकर रिटर्न भरना चाहिए क्योंकि यदि किसी साल रिटर्न नही भरा गया तो हो सकता है कि सड़क दुर्घटना के बाद फैमिली को मिलने वाली राशि को कम कर दिया जाये या फिर बिलकुल ही मुआवजा न दिया जाये. कोर्ट भी मृतक के आश्रित को मुआवजा नही दिला पायेगा क्योंकि कोर्ट भी सिर्फ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को ही सही सबूत मानता है किसी फिक्स्ड डिपाजिट और बिज़नस इत्यादि को सबूत नही मानता है.
कम जानकारी के अभाव में, लोग सरकार के पास इस राशि का दावा नही करते हैं. कई बार लोग अपना आयकर रिटर्न रेगुलर नही भरते हैं और कई लोग इसे बहुत ही हल्के में लेते हैं. लेकिन ध्यान रहे कि आपकी यह लापरवाही आपके जाने के बाद परिवार को भारी पड़ सकती है.
तो इस प्रकार आपने पढ़ा कि आयकर रिटर्न भरना न सिर्फ देश के हित में है बल्कि आपके स्वयं के हित में भी है. इसलिए नियमित रूप से अपना आयकर रिटर्न भरना ना भूलें.

जानें ड्राइविंग करते समय किस नियम को तोड़ने पर देना पड़ेगा कितना जुर्माना