सड़क दुर्घटना के मामलों में मुआवजे के लिए कैसे आवेदन करें?

देश में सड़कों पर एक्सीडेंट आपने अक्सर देखें होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं इन एक्सीडेंट्स से अक्सर न केवल लोग जख्मी होते हैं बल्कि मर भी जाते है क्या आप जानते हैं ऐसे में विक्टिम को मुआवजा कैसे मिल सकता है ?
सड़क दुर्घटना के मामलों में मुआवजे के लिए कैसे आवेदन करें?
सड़क दुर्घटना के मामलों में मुआवजे के लिए कैसे आवेदन करें?

सुबह का अख़बार पढ़ते ही आपको देश के अलग- अलग भागों में हुए सडक हादसों के समाचार मिलते रहते हैं.  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी किये गए नए आंकड़ों के अनुसार भारत में वर्ष 2019 में 4,37,396 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 1,54,732 लोगों की मौत हो गई थी और 4,39,262 लोग घायल हुए थे। 

वर्ष 2011 में 1,36,000 लोग और 2015 में 1,48,000 लोग सड़क दुर्घटना में मारे गए थे। दिल्ली जैसे शहरों की की बात की जाए तो यहां देश के बाकी हिस्सों के मुकाबले अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं क्योंकि यहां वाहनों की संख्या अधिक है। केंद्र सरकार इन दुर्घटनाओं को आने वाले सालों में 50 प्रतिशत की दर से कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। 

इस लेख के माध्यम से हम ये जानेंगे कि दुर्भाग्यवश अगर कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो मुआवजे के अनुदान के लिए कैसे आवेदन करें। 

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुसार मुआवजे का दावा 

- क्षतिग्रस्त संपत्ति के मालिक द्वारा

-दुर्घटना में मारे गए मृतक के सभी या किसी भी कानूनी प्रतिनिधि द्वारा

-घायल व्यक्ति के विधिवत अधिकृत एजेंट द्वारा या दुर्घटना में मारे गए मृतकों के सभी या किसी भी कानूनी प्रतिनिधि द्वारा किया जा सकता है।

मुआवजे के लिए कैसे आवेदन करें?

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत 10 रुपये के कोर्ट-शुल्क टिकटों पर क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन किया जा सकता है। ध्यान रहे कि ये आवेदन दुर्घटना की घटना के छह महीने के भीतर करना होता है। 

मुआवजे का आवदेन कहां दायर करें?

1. जहां दुर्घटना हुई है, उस क्लेम ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में।

2. क्लेम ट्रिब्यूनल के स्थानीय सीमा के भीतर जहां दावेदार निवासी है या व्यवसाय करता है।

3. जिनके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमा के भीतर प्रतिवादी रहता है।

मुआवजे के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है?

1- दुर्घटना के संबंध में दर्ज प्राथमिकी की प्रतिलिपि।

2- एमएलसी/पोस्टमार्टम रिपोर्ट/मृत्यु रिपोर्ट की प्रति।

3- मौत के मामले में दावेदारों और मृतकों की पहचान के दस्तावेज। 

4- उपचार रिकॉर्ड के साथ उपचार पर किए गए खर्च का बिल। 

5- मृतक की शैक्षिक योग्यता के दस्तावेज, यदि कोई हो तो। 

6- विकलांगता प्रमाण पत्र,  यदि व्यक्ति पहले से ही विकलांग हो।

7. मृतक या घायल की आय का प्रमाण। 

8- पीड़ित की उम्र से संबंधितदस्तावेज। 

9- थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी का कवर नोट, यदि कोई हो। 

सड़क दुर्घटना में मरने वाले या घायल होने वाले व्यक्तियों को मिलने वाला मुआवजा

1.  मृत्यु के मामले में 5 लाख रुपये

2. गंभीर चोट के मामले में 2.5 लाख रुपये।

इस अधिनियम में हिट एंड रन दुर्घटना के मामले में मृत्यु के मामले में 2 लाख रुपये और गंभीर चोट के मामले में 50,000 रुपये के मुआवजे की निश्चित राशि के भुगतान का प्रावधान है।

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के मुख्य तथ्य

1. मोटर वाहन अधिनियम की धारा 3 के तहत किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाने के लिये उसके पास लाइसेंस होना आवश्यक है और लाइसेंस न रहने पर उसके दण्ड को धारा 181 में बताया गया है।

2. इसी प्रकार अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति का सार्वजनिक स्थान में मोटर वाहन चलाना अपराध है।

3. 16 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति केवल 50 CC  से कम की क्षमता वाला वाहन चला सकता है। 

4. मोटर वाहन का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, वाहन चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए, और दो पहिया वाहन चालक को हेलमेट पहनना चाहिये। 

5. एक शैक्षिक संस्थान की बस एक परिवहन वाहन है और इसलिए सड़क पर इसके परिवहन के लिए एक परमिट की आवश्यकता होती है और हर साल इसके फिटनेस टेस्ट के बाद ही नवीनीकरण किया जाना चाहिए।

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