भारतीय संविधान की बारहवीं अनुसूची में वर्णित मदों की विषयवस्तु

भारतीय संविधान की बारहवीं अनुसूची; नगरपालिकाओं की शक्तियों, अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में बताती है. बारहवीं अनुसूची को 1992 के 74 वें संशोधन अधिनियम द्वारा संवैधानिक दर्जा दिया गया था. इस सूची में 18 मदों या कामों को शामिल किया गया है जो कि नगरपालिकाओं के कार्य क्षेत्र में आते हैं. इस लेख में हम नगरपालिकाओं के दायरे में आने वाले सभी कार्यों की सूची बता रहे हैं.
Apr 5, 2018 12:24 IST
    Municipal Corporations in India

    भारत में नगरीय शासन प्रणाली को 74 वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम,1992 के माध्यम से संवैधानिक बनाया गया था. इस अधिनियम का उद्देश्य नगरीय शासन प्रणाली का पुनरुद्धार और उसे मजबूत करना है ताकि वे स्थानीय सरकार की इकाइयों के रूप में कारगर ढंग से कार्य कर सकें.

    नगर पालिकाओं की स्थापना शहरों और छोटे शहरों के प्रशासन के लिए की गई थी. भारत में 8 प्रकार के शहरी स्थानीय शासन हैं जिनमे मुख्य हैं; नगरपालिका, नगरपालिका परिषद्,  अधिसूचित क्षेत्र समिति, शहरी क्षेत्र समिति, छवानी बोर्ड, पत्तन न्यास आदि.

    ज्ञातव्य है कि भारत में “सत्ता का विकेंद्रीकरण” स्थानीय स्वशासन की स्थापना के बाद ही संभव हुआ था जिसमे लार्ड रिपन का अहम् योगदान है और इसी कारण रिपन को भारत में “स्थानीय स्वशासन का  जनक” भी कहा जाता है.

    12 वीं सूची में 18 मदों या कामों को शामिल किया गया है जो कि नगरपालिकाओं के कार्य क्षेत्र में आते हैं. इस लेख में हम नगरपालिकाओं के दायरे में आने वाले सभी कार्यों की सूची बता रहे हैं.
    1. नगरीय सुख सुविधाओं जैसे; पार्क, खेल के मैदान की व्यवस्था

    2. जन सुविधाएँ; जिनमे मार्गों पर बिजली, पार्किंग, बस स्टैंड और जन-सुविधाएँ शामिल हैं.

    3. नगर के विकास के लिए समग्र योजना बनाना

    4. भूमि पर अनधिकृत कब्ज़ा रोकना और सार्वजानिक भवनों का निर्माण कराना

    5. नगर में आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए योजना बनाना

    6. सड़क और पुल निर्माण

    7. औद्योगिक, वाणिज्यिक और घरेलू उपयोग के लिए जल की सुविधा उपलब्ध कराना

    8. सार्वजानिक भवनों की सफाई, और कूड़ा करकट का प्रबंधन करना

    9. अग्निशमन सेवाएँ उपलब्ध कराना

    10. नगर में पेड़-पौधे लगवाना और पर्यावरण संरक्षण के उपाय करना

    11. मलिन वस्तियों को खत्म करना और उनके विकास की दिशा में काम करना

    12. शहरी गरीबी को ख़त्म करने की दिशा में काम करना

    13. नगर में सांस्कृतिक, शैक्षिक और सुन्दरीकरण को बढ़ावा देना

    14. शवदाह के लिए विद्युत् शवदाह गृह और शव गाड़ने के लिए जमीन की व्यवस्था करना

    15. आवारा पशुओं के लिए कांजी हाउस की व्यवस्था करना और उनके खिलाफ क्रूरता कम कराना  

    16. जन्म और मृत्यु से सम्बंधित आंकड़े जुटाना

    17. बूचडखानों और चर्म शोधनालयों का विनियमन करना

    18. समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के हितों का संरक्षण करना जिनमें मानशिक और विकलांग भी शामिल हैं.

    ऊपर लिखे गए विषयों की सूची, स्थानीय लोगों के कल्याण को बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. शहरी स्थानीय शासन की स्थापना के बाद अब लोगों को अपने छोटे छोटे कार्यों के लिए प्रदेश शासन के सबसे ऊँचे स्तर पर बैठे मुख्यमंत्री से गुहार नही लगानी पड़ती है क्योंकि अब उनकी छोटी मोटी समस्याओं का हल उनके आस पास मौजूद नगरपालिका के अधिकारी ही कर देते हैं.

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